सीबीएसई 12वीं रिजल्ट के बाद धुंधली स्कैन कॉपियों और गायब पन्नों को लेकर विवाद बढ़ा। शिक्षा मंत्री ने समीक्षा बैठक कर सुधार का भरोसा दिया।
CBSE Exam 2026: Questions Over Blurred Copies
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी की सीबीएसई की 12वीं कक्षा का परिणाम आने के 15 दिन बाद एक बार अब नया विवाद खड़ा हुआ है। सीबीएसई के हजारों विद्यार्थी मूल्यांकन प्रक्रिया यानी ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) पर सवाल उठा रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि उत्तर पुस्तिकाओं के आखिर 40 करोड़ पन्ने स्कैन कैसे किए गए।
विद्यार्थी सोशल मीडिया पर लगातार उत्तर पुस्तिका की ब्लर यानी धुंधली स्कैन कॉपी मिलने का आरोप लगा रहे हैं। कई विद्यार्थियों का सप्लीमेंट्री कॉपी गायब होने का भी आरोप है। मगर, सीबीएसई ने जवाब नहीं दिया।
40 करोड़ पन्ने कैसे हुए स्कैन ?
दरअसल में 17 लाख से अधिक विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। बोर्ड अधिकारियों ने कहा था कि 98 लाख कॉपियों की ओएसएम से जांच कराई गई। अधिकतर कॉपियां 35 से 40 पेजों की होती हैं।
सूत्रों के अनुसार परीक्षा के दौरान मुख्य उत्तर पुस्तिका के बाद ज्यादातर बच्चे सप्लीमेंट्री कॉपी मांगते हैं, जो एक-दो या तीन हो सकती हैं। ऐसे में औसत देखें तो प्रति विद्यार्थी करीब 40 पेजों की कॉपी रही होगी। सभी कॉपियों की गिनती की जाए तो 40 करोड़ पन्ने स्कैन करने पड़े होंगे। बच्चे-अभिभावकों से लेकर विशेषज्ञ भी सवाल उठा रहे हैं कि इतनी अधिक कॉपियां और पन्ने एकसाथ स्कैन कैसे किए गए। कैसे निगरानी हुई।

शिक्षा मंत्री ने बुलाई बैठक
वहीं सीबीएसई कक्षा विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सीबीएसई मुख्यालय में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में पुनर्मूल्यांकन और वेरिफिकेशन प्रक्रिया के दौरान छात्रों को आ रही तकनीकी और भुगतान संबंधी समस्याओं पर चर्चा की गई।
बैठक के बाद शिक्षा मंत्री ने कहा कि सीबीएसई ने कक्षा 12 परीक्षाओं के लिए पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस वर्ष करीब 17 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे। कुल 98 लाख उत्तर पुस्तिका कॉपियों का मूल्यांकन किया गया, जिनमें लगभग 40 करोड़ स्कैन किए गए पन्ने शामिल थे।
पहली बार लागू हुई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि पहली बार सीबीएसई ने डिजिटल मूल्यांकन यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली लागू की है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और प्रक्रिया को छात्र-केंद्रित बनाना है।
उन्होंने कहा कि अब छात्र अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं देख सकते हैं, अंकों की जांच कर सकते हैं और किसी भी त्रुटि पर सवाल उठा सकते हैं। अब तक लगभग 4 लाख छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाएं एक्सेस कर चुके हैं, जिनमें करीब 11 लाख कॉपियां शामिल हैं।
आईआईटी और पीएसयू बैंकों को भी जोड़ा गया
शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस पूरी तकनीकी प्रक्रिया की निगरानी के लिए आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास जैसी प्रमुख संस्थाओं को शामिल किया गया है। वहीं भुगतान प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए SBI, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक के पेमेंट गेटवे को जोड़ा गया है।
गड़बड़ियों हुईं हैं, जिनका दायित्व मैं लेता हूं’: प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान ने माना कि प्रक्रिया में कुछ विसंगतियां सामने आई हैं और सरकार इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करती है। उन्होंने कहा कि सभी समस्याओं को दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे और हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र की शिकायत या सवाल को अनसुलझा नहीं छोड़ा जाएगा।
Author: AK
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