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जहानाबाद के “बचपन प्ले स्कूल ” में सावन महोत्सव की धूम, आस्था और संस्कृति का अनोखा संगम।

भगवान शंकर, माता पार्वती और गणेश की आराधना ने महोत्सव को बनाया अलौकिक

जहानाबाद, सावन के पावन माह में जब प्रकृति हरियाली की चादर ओढ़े संवरती है, तब आस्था और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिलता है। ऐसा ही दृश्य  जहानाबाद स्थित प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान “बचपन प्ले स्कूल” में सावन महोत्सव के अवसर पर देखने को मिला, जहां बच्चों से लेकर शिक्षिकाएं तक पूरी तरह से सावन के रंग में रंगे नजर आए।

विद्यालय परिसर में आयोजित इस विशेष आयोजन में सभी ने हरे रंग के वस्त्र धारण कर सावन की हरियाली को आत्मसात किया। कार्यक्रम की मुख्य विशेषता भगवान शंकर, माता पार्वती और भगवान गणेश की भव्य पूजा-अर्चना और आरती रही, जिसने पूरे वातावरण को अलौकिक, पवित्र और श्रद्धा से ओतप्रोत बना दिया।

शिव-पार्वती और गणेश की जीवंत झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम में भगवान शंकर के रूप में रुद्र कुमार, माता पार्वती के रूप में चनाया शर्मा और भगवान गणेश के रूप में देवराज ने सभी का मन मोह लिया। बच्चों को इन दिव्य रूपों में सजाने में उनके माता-पिता ने जो समर्पण और तन्मयता दिखाई, उसकी सराहना विद्यालय प्रबंधन द्वारा विशेष रूप से की गई।

संस्कृति से जुड़ाव का माध्यम बना सावन उत्सव
विद्यालय की प्राचार्या शिक्षा श्रीवास्तव ने इस अवसर पर कहा,
“हम हमेशा प्रयास करते हैं कि बच्चे अपनी संस्कृति, आस्था और परंपराओं से जुड़े रहें। यह महज एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों और संस्कारों का पाठ है जो उन्हें समाज और जीवन में आगे ले जाएगा।”

शिक्षिकाओं की भूमिका रही अहम
कार्यक्रम की सफलता में शिक्षिकाओं रंजू कुमारी, साक्षी श्रीवास्तव, स्वाति कुमारी और आरूषी कुमारी की अहम भूमिका रही। इन्होंने न केवल बच्चों को सांस्कृतिक प्रस्तुति के लिए तैयार किया, बल्कि कार्यक्रम को सुसंगठित और जीवंत बनाने में विशेष योगदान दिया।

सावन महोत्सव का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि यह बच्चों को भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने का एक प्रेरणादायक प्रयास भी सिद्ध हुआ। विद्यालय परिसर में गूंजते मंत्रोच्चार, भक्ति गीतों की मधुर ध्वनि और बच्चों की उत्साही सहभागिता ने सावन के इस पर्व को स्मरणीय बना दिया।

The celebration of Saavan festival in “Bachpan Play School” of Jehanabad, a unique confluence of faith and culture.

AK
Author: AK

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