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Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में सियासी सस्पेंस, DMK-AIADMK गठबंधन की चर्चा तेज

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सस्पेंस बढ़ गया है। विजय की TVK, DMK-AIADMK गठबंधन और कांग्रेस की रणनीति ने राजनीति गरमा दी है। Tamil Nadu Politics: DMK-AIADMK Alliance Buzz तमिलनाडु में सत्ता की लड़ाई ने बढ़ाया सस्पेंस तमिलनाडु की राजनीति इस समय ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां हर घंटे समीकरण बदलते दिखाई दे … Read more

Tamil Nadu Politics: DMK-AIADMK Alliance Buzz

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सस्पेंस बढ़ गया है। विजय की TVK, DMK-AIADMK गठबंधन और कांग्रेस की रणनीति ने राजनीति गरमा दी है।

Tamil Nadu Politics: DMK-AIADMK Alliance Buzz


तमिलनाडु में सत्ता की लड़ाई ने बढ़ाया सस्पेंस

तमिलनाडु की राजनीति इस समय ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां हर घंटे समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं। अभिनेता विजय की पार्टी तमिलग वेट्री कझगम यानी TVK ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए शानदार प्रदर्शन किया और 108 सीटों के साथ विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। लेकिन बहुमत के आंकड़े से कुछ सीटें पीछे रह जाने के कारण सरकार गठन को लेकर अब भी असमंजस बना हुआ है।

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इसी बीच द्रविड़ राजनीति के दो पुराने प्रतिद्वंद्वी—द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (DMK) और अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (AIADMK)—के बीच संभावित गठबंधन की खबरों ने राज्य की राजनीति को और रोमांचक बना दिया है। दशकों से एक-दूसरे के खिलाफ राजनीति करने वाले ये दोनों दल अब एक साथ आ सकते हैं, ऐसी चर्चाओं ने तमिलनाडु के राजनीतिक माहौल को पूरी तरह बदल दिया है।


TVK की ऐतिहासिक एंट्री ने बदला राजनीतिक गणित

विजय का राजनीतिक दांव सफल

दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार विजय लंबे समय से राजनीति में आने की तैयारी कर रहे थे। जब उन्होंने TVK के जरिए चुनावी मैदान में कदम रखा, तब इसे केवल स्टारडम का असर माना जा रहा था। लेकिन चुनाव परिणामों ने साबित कर दिया कि विजय की लोकप्रियता केवल फिल्मों तक सीमित नहीं है।

TVK ने 108 सीटें जीतकर न सिर्फ मजबूत प्रदर्शन किया, बल्कि राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनने का रिकॉर्ड भी बनाया।

बहुमत से पीछे रहने का असर

234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। TVK बहुमत से 10 सीट पीछे रह गई। यही कारण है कि अब सरकार गठन के लिए राजनीतिक जोड़तोड़ और गठबंधन की राजनीति तेज हो गई है।


DMK और AIADMK क्यों आ सकते हैं साथ?

दशकों पुरानी दुश्मनी के बावजूद बातचीत

तमिलनाडु की राजनीति में DMK और AIADMK हमेशा एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे हैं। दोनों दलों के बीच वैचारिक और राजनीतिक संघर्ष का लंबा इतिहास रहा है।

लेकिन इस बार राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं। TVK के उभार ने दोनों पारंपरिक दलों के लिए चुनौती पैदा कर दी है। ऐसे में सत्ता से बाहर होने के डर ने दोनों दलों को करीब ला दिया है।

सत्ता से विजय को दूर रखने की कोशिश?

राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि DMK और AIADMK पर्दे के पीछे सरकार गठन को लेकर बातचीत कर रहे हैं। इस संभावित गठबंधन का मुख्य उद्देश्य विजय को सत्ता में आने से रोकना बताया जा रहा है।

कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि TVK सरकार बनाती है, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में स्थायी बदलाव ला सकता है। यही वजह है कि पुराने राजनीतिक दल एकजुट होने पर विचार कर रहे हैं।


DMK ने AIADMK के सामने क्या शर्त रखी?

भाजपा से दूरी बनाने की मांग

सूत्रों के मुताबिक DMK ने AIADMK के सामने सबसे बड़ी शर्त भाजपा से संबंध तोड़ने की रखी है। DMK का कहना है कि भाजपा को “सांप्रदायिक पार्टी” मानते हुए उसके साथ जुड़े दलों को समर्थन देना मुश्किल होगा।

DMK ने साफ संकेत दिया है कि AIADMK यदि भाजपा से दूरी बना लेती है, तभी गठबंधन या बाहरी समर्थन पर विचार किया जा सकता है।

छोटे दलों को साधने की रणनीति

DMK ने विदुथलै चिरुथैगल काची (VCK) जैसे छोटे सहयोगी दलों को मंत्रिमंडल में जगह देने का प्रस्ताव भी रखा है। इसका उद्देश्य इन दलों को विजय के खेमे से दूर रखना बताया जा रहा है।


वामपंथी दलों की भूमिका क्यों अहम?

TVK के लिए जरूरी समर्थन

विजय कांग्रेस, वाम दलों और VCK के साथ मिलकर सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रहे थे। इन दलों के समर्थन से TVK को बहुमत के करीब पहुंचने की उम्मीद थी।

वाम दलों में मतभेद

हालांकि वामपंथी दलों के भीतर इस मुद्दे पर एक राय नहीं बन पाई है। कुछ नेता विजय का समर्थन करने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ तटस्थ रहने की बात कर रहे हैं।

वाम दलों की बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी उत्सुकता बनी हुई है क्योंकि उनका फैसला सरकार गठन की दिशा तय कर सकता है।


कांग्रेस ने क्यों बदला अपना रुख?

विजय को दिया समर्थन

तमिलनाडु कांग्रेस ने विजय की TVK को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। यह फैसला इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस लंबे समय से DMK की सहयोगी रही है।

कांग्रेस नेता मणिक्कम टैगोर ने DMK पर “सेकुलर राजनीति से समझौता” करने का आरोप लगाया है।

भाजपा पर भी निशाना

कांग्रेस नेताओं ने AIADMK को भाजपा की “बी टीम” बताया है। उनका कहना है कि भाजपा तमिलनाडु में कांग्रेस और TVK को सत्ता से दूर रखने के लिए पर्दे के पीछे राजनीति कर रही है।


क्या भाजपा की भी भूमिका है?

राजनीतिक चर्चाएं तेज

तमिलनाडु की राजनीति में यह चर्चा भी तेज है कि DMK-AIADMK गठबंधन के पीछे भाजपा की रणनीति हो सकती है।

कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा नहीं चाहती कि कांग्रेस समर्थित सरकार तमिलनाडु में बने। इसलिए पर्दे के पीछे राजनीतिक समीकरण बदले जा रहे हैं।

भाजपा ने आरोपों को नकारा

भाजपा के राज्य प्रवक्ता एन. तिरुपति ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि यह एक “खंडित जनादेश” है और जो भी दल बहुमत साबित करेगा, राज्यपाल संवैधानिक रूप से उसी को सरकार बनाने का अवसर देंगे।


राज्यपाल की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण हो गई?

विजय और राज्यपाल के बीच गतिरोध

राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर और TVK के बीच बढ़ते तनाव ने राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना दिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार गठन की प्रक्रिया में देरी की जा रही है।

सबसे बड़ी पार्टी को मिलेगा मौका?

संवैधानिक परंपराओं के अनुसार सबसे बड़ी पार्टी को पहले सरकार बनाने का मौका दिया जाता है। लेकिन यदि कोई गठबंधन बहुमत साबित कर देता है, तो राज्यपाल उसे भी आमंत्रित कर सकते हैं।

यही कारण है कि अब सभी दल अपनी संख्या मजबूत करने में जुटे हुए हैं।


आंकड़ों का खेल क्या कहता है?

यदि DMK और AIADMK अपने सहयोगी दलों के साथ मिलते हैं, तो उनके पास लगभग 120 सीटें हो सकती हैं। यह बहुमत के आंकड़े से ज्यादा है।

दूसरी ओर TVK कांग्रेस और छोटे दलों के समर्थन के बावजूद बहुमत तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रही है।

यानी तमिलनाडु की राजनीति पूरी तरह संख्या और रणनीति के खेल में बदल चुकी है।


क्या तमिलनाडु में तीसरा मोर्चा मजबूत होगा?

विजय का बढ़ता प्रभाव

भले ही TVK अभी सरकार बनाने में सफल हो या नहीं, लेकिन विजय ने यह साबित कर दिया है कि वह तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा चेहरा बन चुके हैं।

उनकी लोकप्रियता खासकर युवाओं और शहरी मतदाताओं के बीच तेजी से बढ़ी है।

पारंपरिक राजनीति को चुनौती

TVK का उभार यह संकेत देता है कि तमिलनाडु की जनता अब पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से अलग विकल्प तलाश रही है। आने वाले वर्षों में यह बदलाव और बड़ा रूप ले सकता है।


जनता की नजर अब अगले कदम पर

तमिलनाडु में इस समय हर राजनीतिक गतिविधि पर जनता की नजर बनी हुई है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर सरकार कौन बनाएगा और क्या राज्य में राजनीतिक स्थिरता बनी रहेगी।

यदि गठबंधन की राजनीति ज्यादा जटिल हो जाती है, तो राज्य में दोबारा चुनाव की संभावना भी पैदा हो सकती है।


निष्कर्ष

तमिलनाडु की राजनीति इस समय बेहद संवेदनशील और रोमांचक दौर से गुजर रही है। विजय की TVK ने पहली बार चुनाव लड़कर इतिहास रचा, लेकिन बहुमत से पीछे रह जाने के कारण सत्ता की राह आसान नहीं दिख रही।

DMK और AIADMK के संभावित गठबंधन ने राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। कांग्रेस, वाम दल और छोटे क्षेत्रीय दल भी अब इस सत्ता संघर्ष में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि तमिलनाडु में नई सरकार किसकी बनेगी और क्या राज्य की राजनीति में स्थायी बदलाव देखने को मिलेगा।



AK
Author: AK

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