तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सियासी हलचल तेज है। टीवीके प्रमुख विजय को वामपंथी दलों का समर्थन मिलने के संकेत मिले हैं।
Tamil Nadu Deadlock: Vijay Near Majority
तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ा सस्पेंस
तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के कई दिन बाद भी सरकार गठन को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। राज्य की राजनीति लगातार नए मोड़ ले रही है। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है, लेकिन बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए उसे अभी भी सहयोगियों की जरूरत है।
इसी बीच वामपंथी दलों की ओर से टीवीके को समर्थन मिलने के संकेतों ने राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। अब खबरें हैं कि विजय तीसरी बार राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात कर सकते हैं। इस मुलाकात को सरकार गठन की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है।
तमिलनाडु में तेजी से बदलते घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।

सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी सरकार क्यों नहीं?
TVK को मिली 108 सीटें
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए शानदार प्रदर्शन किया। 234 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी ने 108 सीटें जीतकर खुद को सबसे बड़ी पार्टी साबित किया।
हालांकि सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। यानी विजय की पार्टी बहुमत से 10 सीट पीछे रह गई।
राज्यपाल ने मांगा समर्थन का प्रमाण
राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने विजय से स्पष्ट कहा है कि मुख्यमंत्री पद की शपथ से पहले उन्हें कम से कम 118 विधायकों के समर्थन का प्रमाण देना होगा।
इसी वजह से विजय लगातार सहयोगी दलों से बातचीत कर रहे हैं और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
वामपंथी दलों के समर्थन से बदलेगा खेल?
CPI और CPM का समर्थन अहम
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) और विदुथलाई चिरुथाइगल कत्ची (VCK) टीवीके को समर्थन देने पर विचार कर रहे हैं।
इन तीनों दलों के पास कुल 6 विधायक हैं।
कांग्रेस पहले ही कर चुकी समर्थन का ऐलान
कांग्रेस के 5 विधायक पहले ही विजय को समर्थन देने की घोषणा कर चुके हैं। यदि वामपंथी दल और VCK भी समर्थन दे देते हैं, तो टीवीके गठबंधन के पास कुल 119 विधायक हो जाएंगे।
यह संख्या बहुमत के आंकड़े 118 से एक अधिक होगी।
तीसरी बार राज्यपाल से मिलेंगे विजय
लगातार बढ़ रही राजनीतिक सक्रियता
सूत्रों के अनुसार विजय शुक्रवार शाम को राज्यपाल से मुलाकात कर सकते हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद यह उनकी तीसरी मुलाकात होगी।
इस मुलाकात में वह संभावित समर्थन पत्र और बहुमत के आंकड़े से जुड़े दस्तावेज पेश कर सकते हैं।
समर्थकों का प्रदर्शन
इस बीच चेन्नई में टीवीके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। उन्होंने मांग की कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते विजय को सरकार बनाने का न्योता दिया जाए।
समर्थकों का कहना है कि लोकतंत्र में सबसे पहले जनता के सबसे बड़े जनादेश का सम्मान होना चाहिए।
राज्यपाल की भूमिका पर उठ रहे सवाल
विपक्ष ने लगाए आरोप
राज्यपाल द्वारा अभी तक विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं करने पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
कांग्रेस और अन्य दलों का आरोप है कि संवैधानिक परंपरा के अनुसार सबसे बड़ी पार्टी को पहले मौका मिलना चाहिए।
“संविधान से बाहर जाने” का आरोप
कुछ राजनीतिक नेताओं ने कहा कि राज्यपाल जरूरत से ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं, जिससे राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है।
कांग्रेस नेताओं ने यहां तक आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और भाजपा राज्यपाल के जरिए राजनीतिक प्रभाव डालने की कोशिश कर रहे हैं।
DMK और AIADMK गठबंधन की चर्चाएं तेज
दशकों पुराने विरोधी साथ आ सकते हैं?
तमिलनाडु की राजनीति में इस समय सबसे बड़ी चर्चा DMK और AIADMK के संभावित समझौते को लेकर हो रही है।
दोनों दल लंबे समय से कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। लेकिन विजय की बढ़ती लोकप्रियता ने दोनों को करीब ला दिया है।
विजय को रोकने की रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि DMK और AIADMK का संभावित गठबंधन केवल एक उद्देश्य के लिए बन सकता है—विजय को मुख्यमंत्री बनने से रोकना।
यदि दोनों दल अपने सहयोगियों के साथ आते हैं, तो उनके पास बहुमत का आंकड़ा पार करने की क्षमता हो सकती है।
कांग्रेस ने DMK और AIADMK पर बोला हमला
“बी-टीम” की राजनीति का आरोप
कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने DMK और AIADMK दोनों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दोनों दल सिर्फ विजय को रोकने के लिए साथ आ रहे हैं।
उन्होंने AIADMK को भाजपा की “बी-टीम” तक बताया।
भाजपा पर गंभीर आरोप
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा राज्यपाल का इस्तेमाल करके समय खरीद रही है और विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है।
भाजपा ने क्या कहा?
भाजपा ने आरोपों को नकारा
भाजपा नेताओं का कहना है कि यह एक “खंडित जनादेश” है और संविधान के अनुसार वही दल सरकार बनाएगा जो बहुमत साबित करेगा।
पार्टी का कहना है कि राज्यपाल पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं।
तमिलनाडु में भाजपा की सीमित मौजूदगी
दिलचस्प बात यह है कि तमिलनाडु विधानसभा में भाजपा के पास सिर्फ एक विधायक है। इसके बावजूद विपक्ष भाजपा पर पर्दे के पीछे राजनीति करने का आरोप लगा रहा है।
वामपंथी दलों की दुविधा
अंतिम फैसला अभी बाकी
भाकपा और माकपा ने इस मुद्दे पर अपनी बैठकों का आयोजन किया है। दोनों दल अभी अंतिम फैसला लेने की प्रक्रिया में हैं।
सेकुलर राजनीति बनाम सत्ता संतुलन
वाम दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे किस राजनीतिक दिशा में जाएं। एक ओर वे भाजपा विरोधी राजनीति करते रहे हैं, दूसरी ओर विजय को समर्थन देने पर नए राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं।
क्या विजय तमिलनाडु की राजनीति बदल देंगे?
युवाओं में बड़ी लोकप्रियता
विजय की लोकप्रियता खासकर युवाओं और शहरी मतदाताओं के बीच तेजी से बढ़ी है। उनकी सभाओं में भारी भीड़ देखने को मिली थी।
पारंपरिक द्रविड़ राजनीति को चुनौती
कई राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि टीवीके का उभार तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति के लिए बड़ी चुनौती है।
दशकों से DMK और AIADMK के बीच घूम रही सत्ता अब तीसरे विकल्प की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।
जनता क्या चाहती है?
तमिलनाडु की जनता इस समय राजनीतिक स्थिरता चाहती है। लगातार चल रहे राजनीतिक गतिरोध ने लोगों में बेचैनी बढ़ाई है।
कई लोग मानते हैं कि सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए, जबकि कुछ लोग स्थिर गठबंधन सरकार के पक्ष में हैं।
आने वाले 48 घंटे क्यों अहम?
सरकार गठन पर हो सकता है फैसला
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगले 48 घंटे तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद अहम होंगे।
यदि विजय बहुमत का आंकड़ा साबित कर देते हैं, तो वह जल्द मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।
गठबंधन राजनीति का नया दौर
दूसरी ओर यदि DMK और AIADMK के बीच कोई समझौता होता है, तो राज्य की राजनीति पूरी तरह बदल सकती है।
निष्कर्ष
तमिलनाडु में इस समय राजनीतिक सस्पेंस अपने चरम पर है। विजय की टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे सहयोगियों की जरूरत है।
वामपंथी दलों के संभावित समर्थन ने विजय की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। वहीं DMK और AIADMK के बीच गठबंधन की चर्चाओं ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
अब सभी की नजर राज्यपाल और राजनीतिक दलों की अगली चाल पर टिकी हुई है। आने वाले दिन तय करेंगे कि तमिलनाडु में सत्ता किसके हाथ में जाएगी।
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Author: AK
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