एससीओ शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात तय समय से अधिक चली। बैठक में सीधी उड़ान सेवा और सीमा विवाद पर बातचीत हुई।
SCO Summit: Historic Meeting Between PM Modi and Xi Jinping

Modi Xi Jinping meeting: एससीओ शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और शी जिनपिंग की ऐतिहासिक मुलाकात
भारत और चीन एशिया की दो सबसे बड़ी ताकतें हैं। दोनों देशों के बीच रिश्तों में उतार-चढ़ाव लंबे समय से रहा है। कभी सीमा विवाद तो कभी व्यापारिक मुद्दों के कारण दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी रही। लेकिन शंघाई सहयोग संगठन (SCO Summit) के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने एक नए सकारात्मक संकेत दिए हैं। यह मुलाकात न केवल तय समय से अधिक चली बल्कि कई अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
Sharing my remarks during meeting with President Xi Jinping. https://t.co/pw1OAMBWdc
— Narendra Modi (@narendramodi) August 31, 2025
बैठक का समय और महत्व
एससीओ शिखर सम्मेलन तियानजिन (चीन) में आयोजित किया गया। पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात 40 मिनट के लिए निर्धारित थी, लेकिन यह एक घंटे से भी ज्यादा चली। यह तथ्य इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच कई गंभीर विषयों पर गहन चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के दौरान आपसी भरोसे और सम्मान पर आधारित रिश्तों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
सीधी उड़ान सेवा की बहाली
कोविड-19 के बाद रुकी थी उड़ानें
साल 2020 में कोविड महामारी के दौरान भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें बंद हो गई थीं। इसके बाद पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव ने इन उड़ानों की बहाली को और टाल दिया।
नई शुरुआत का संकेत
बैठक के दौरान पीएम मोदी ने घोषणा की कि जल्द ही भारत और चीन के बीच सीधी उड़ान सेवा (Direct Flight Service) दोबारा शुरू होगी। यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
सीमा विवाद पर बातचीत
भारत-चीन संबंधों में सबसे संवेदनशील मुद्दा सीमा विवाद है। पूर्वी लद्दाख, डोकलाम और अरुणाचल प्रदेश को लेकर दोनों देशों के बीच अक्सर तनाव की स्थिति बनी रहती है।
विशेष प्रतिनिधियों के बीच वार्ता
बैठक में यह भी बताया गया कि सीमा विवाद सुलझाने के लिए दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का दौर शुरू हो चुका है। यह पहल रिश्तों में विश्वास और स्थिरता लाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
Honored to attend the bilateral meeting between Chinese President Xi Jinping and Indian Prime Minister Modi on the sidelines of the SCO summit. pic.twitter.com/w3AaTVI98U
— Xu Feihong (@China_Amb_India) August 31, 2025
पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत आपसी संवेदनशीलता, भरोसे और सम्मान के आधार पर रिश्तों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पिछले वर्ष रूस के कजान शहर में हुई मुलाकात को याद किया और कहा कि उसका द्विपक्षीय संबंधों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा था।
उन्होंने यह भी बताया कि मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू की गई है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
अमेरिका की रणनीति पर असर
मोदी और शी जिनपिंग की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापारिक तनाव बढ़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% तक का आयात कर (Tariff) लगा दिया है। इस पृष्ठभूमि में मोदी और चीन के राष्ट्रपति की यह मुलाकात अमेरिका की कूटनीति पर एक बड़ा संदेश मानी जा रही है।
रूस और चीन का साझा मंच
एससीओ शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी की मुलाकात केवल शी जिनपिंग से ही नहीं, बल्कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी होनी है। यह स्थिति एशिया में नई सामरिक और आर्थिक ध्रुवीयता की ओर इशारा करती है।
आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग
भारत और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग कई बार तनाव के बावजूद स्थिर रहा है।
व्यापारिक अवसर
सीधी उड़ानों की बहाली से व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही बढ़ेगी। इससे छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायों को भी नए अवसर मिलेंगे।
सांस्कृतिक संबंध
भारतीय योग, आयुर्वेद और बॉलीवुड चीन में काफी लोकप्रिय हैं। वहीं चीनी भाषा और मार्शल आर्ट्स भारत में अपनी पहचान बना चुके हैं। दोनों देशों के बीच सीधी कनेक्टिविटी इन सांस्कृतिक संबंधों को और गहरा कर सकती है।
भविष्य की संभावनाएँ
विश्वास और संवेदनशीलता की ज़रूरत
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत-चीन संबंधों को स्थायी रूप से मजबूत करने के लिए सिर्फ आर्थिक सहयोग काफी नहीं होगा। इसके लिए सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर ईमानदारी से बातचीत और समाधान की आवश्यकता है।
वैश्विक राजनीति में भूमिका
भारत और चीन मिलकर न केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। यदि दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ता है तो यह पूरी मानवता के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
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Author: AK
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