Rahul Gandhi Women Empowerment Statement

पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कई तरह की हिंसा और पाबंदियों का इस्तेमाल किया जाता है।
राहुल गांधी ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा को तीन रूपों में बताया। उन्होंने कहा कि इसमें शारीरिक हिंसा के अलावा महिलाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों से दूर रखना तथा आर्थिक रूप से कमजोर रखना भी शामिल है।
महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर क्या बोले राहुल गांधी?
राहुल गांधी ने दावा किया कि 80 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी तरह के उत्पीड़न का सामना करती हैं। उन्होंने 29 प्रतिशत महिलाओं के शारीरिक हिंसा झेलने और छह प्रतिशत महिलाओं के दुष्कर्म का सामना करने का भी दावा किया।
उन्होंने यह भी कहा कि यौन हिंसा के कई मामले सामाजिक दबाव और बदनामी के डर से सामने नहीं आते। हालांकि, भाषण में बताए गए इन आंकड़ों के स्रोत की स्वतंत्र पुष्टि किया जाना जरूरी है।
सुरक्षा के नाम पर महिलाओं पर पाबंदियां
राहुल गांधी ने कहा कि कई बार महिलाओं की सुरक्षा को आधार बनाकर उनकी स्वतंत्रता सीमित कर दी जाती है। उन्होंने लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग सामाजिक नियमों का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि लड़कों को देर रात तक बाहर रहने की अनुमति मिल जाती है, जबकि लड़कियों को एक निश्चित समय तक घर लौटने के लिए कहा जाता है। उनके मुताबिक ऐसी पाबंदियां आगे चलकर महिलाओं की शिक्षा, नौकरी और स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती हैं।
पढ़ाई और नौकरी छोड़ने का भी मुद्दा उठाया
राहुल गांधी ने कहा कि कई महिलाओं को शादी और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण अपनी पढ़ाई या रोजगार छोड़ना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि 45 प्रतिशत महिलाएं ऐसी परिस्थितियों का सामना करती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को शिक्षा और रोजगार में समान अवसर देने के साथ-साथ परिवार और समाज की सोच में बदलाव की जरूरत है।
आर्थिक असमानता पर भी बोले राहुल
कांग्रेस नेता ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि केवल आठ प्रतिशत महिलाओं के नाम जमीन है और महिलाएं पुरुषों की तुलना में 25 प्रतिशत कम कमाती हैं।
राहुल गांधी के मुताबिक, महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत किए बिना वास्तविक महिला सशक्तिकरण संभव नहीं है। उन्होंने महिलाओं को अपने फैसले खुद लेने और अपनी आवाज उठाने की अपील की।
घर के काम में भी असमानता का दावा
राहुल गांधी ने घरेलू काम में पुरुषों और महिलाओं के बीच असमानता का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 15 से 29 वर्ष की महिलाएं घर में करीब 5.5 घंटे काम करती हैं, जबकि उसी उम्र के पुरुष लगभग 30 मिनट घरेलू काम में लगाते हैं।
उन्होंने कहा कि घरेलू जिम्मेदारियों का असमान बोझ महिलाओं के लिए पढ़ाई, नौकरी और करियर में आगे बढ़ने की राह मुश्किल कर सकता है।
महिलाओं को खुद पर भरोसा रखने की अपील
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने महिलाओं को देश की बड़ी ताकत बताते हुए उनसे अपने लिए आवाज उठाने और खुद पर विश्वास रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने फैसले लेने और अपनी पहचान बनाने का अधिकार होना चाहिए।
पुणे में आयोजित यह कार्यक्रम मुख्य रूप से महिलाओं और छात्राओं से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहा। शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
राहुल गांधी के बयान के बाद महिला सुरक्षा और Women Empowerment को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होने की संभावना है।
Author: AK
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