
बांग्लादेश में हिंदुओं पर चार महीनों से हमले किए जा रहे हैं। इसके साथ कई हिंदू मंदिरों पर भी लगातार तोड़फोड़ हो रही है। बांग्लादेश में जारी अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले को लेकर भारत में भारी आक्रोश व्याप्त है। भारत के कई राज्यों में हिंदू संगठनों ने पिछले दिनों रैली निकालकर बांग्लादेशी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस बीच बांग्लादेश की सीमा से लगे पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा ने बड़ा एलान किया है। अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को देखते हुए त्रिपुरा ने बांग्लादेशी पर्यटकों के लिए नो-एंट्री लागू कर दिया है। राज्य के होटल-रेस्टोरेंट्स में बांग्लादेशियों के लिए खाने-पीने या ठहरने की सुविधा पर रोक लगा दी गई है।
होटल-रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने इस बात की जानकारी दी है । इससे पहले अगरतला और कोलकाता के दो अस्पतालों ने बांग्लादेशी नागरिकों के इलाज पर भी रोक लगा दी थी। कोलकाता के जेएन रे अस्पताल के सुभ्रांशु भक्त ने कहा- अब बांग्लादेशी मरीजों का इलाज नहीं करेंगे। क्योंकि बांग्लादेश में तिरंगे का अपमान हो रहा है। भारत ने उनकी आजादी में अहम भूमिका निभाई, इसके बावजूद हम उनमें भारत विरोधी भावनाएं देख रहे हैं। इस बीच सोमवार को त्रिपुरा होटल और रेस्टोरेंट्स ने भी एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने अब बांग्लादेशियों को सेवाएं देने से किया इनकार कर दिया है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर अत्याचार करना भारी पड़ता जा रहा है। नवरात्रि के समय पंडालों पर भारी भरकम टैक्स लगाना और अब इस्कॉन मंदिर के मुखिया के साथ हुए अत्याचार की चिंगारी भारत में भी सुलगने लगी है। इस बीच बांग्लादेश की सीमा से लगे पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा ने बड़ा एलान किया है। राज्य के होटल-रेस्टोरेंट संघ ने कहा कि बांग्लादेशी नागरिकों को राज्य के होटलों में रुकने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही साथ कोई रेस्तरां उन्हें भोजन भी नहीं देगा।
यह बयान ऐसे समय जारी हुआ जब सैकड़ों लोगों ने राजधानी अगरतला में बांग्लादेशी मिशन के चारों ओर विशाल रैली निकाली। इस दौरान बांग्लादेश में हिंदू भिक्षु चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के साथ-साथ पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों पर हमलों का विरोध किया गया।इससे पहले, आईएलएस अस्पताल ने घोषणा की थी कि वह पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के विरोध में बांग्लादेश के किसी भी मरीज का इलाज नहीं करेगा। अगरतला स्थित एक मल्टी-स्पेशियलिटी निजी अस्पताल ने शनिवार को बांग्लादेशी नागरिकों का इलाज नहीं करने का फैसला किया था। दरअसल,शनिवार दोपहर को अस्पताल के बाहर एक समूह विरोध प्रदर्शन कर रहा था, जिसके चलते अस्पताल ने यह फैसला लिया। आईएलएस अस्पताल अपनी निकटता और किफायती उपचार लागत के कारण पड़ोसी देश के मरीजों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य रहा है। बता दें कि बांग्लादेश में हिंदुओं की हालत लगातार खराब होती जा रही है। यहां मोहम्मद युनूस की सरकार के बनने के बाद कट्टरपंथी संगठनों के हौसले और भी ज्यादा बुलंद हो गए हैं। अब ये संगठन हिंदुओं को पूजा- अर्चना करने से भी रोक रहे हैं। बांग्लादेश में लगातार हिंदू मंदिरों पर हमले किए जा रहे हैं। बीते कुछ दिन पहले बांग्लादेश में भारत के ध्वज का भी अपमान किया गया था। जिसके बाद भारत के अलग-अलग राज्यों में बांग्लादेश के विरोध में प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
Author: AK
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