प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन पहुंचे, जहां उनका रेड कार्पेट से स्वागत हुआ। एससीओ शिखर सम्मेलन में मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन एक मंच पर होंगे।
PM Modi’s China Visit: A New Strategic Push with Xi & Putin

पीएम मोदी का चीन दौरा: जिनपिंग और पुतिन संग नई कूटनीतिक पहल
प्रस्तावना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हालिया चीन दौरा भारत की कूटनीति के लिए एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। जापान के दो दिवसीय दौरे के बाद पीएम मोदी बीजिंग पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत रेड कार्पेट बिछाकर किया गया। इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक ही मंच पर नजर आएंगे। यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों और अमेरिका के टैरिफ युद्ध के बीच एक नई रणनीतिक साझेदारी का संकेत भी देती है।
抵达中国天津,期待在上海合作组织峰会期间展开深入讨论,并与各国领导人会晤。 pic.twitter.com/vs59dukMND
— Narendra Modi (@narendramodi) August 30, 2025
चीन में पीएम मोदी का स्वागत
रेड कार्पेट रिसेप्शन
बीजिंग एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत भारतीय राजनयिकों और चीनी अधिकारियों ने किया। रेड कार्पेट और पारंपरिक चीनी सम्मान इस यात्रा की गंभीरता और महत्व को दर्शाता है।
भारत-चीन रिश्तों का नया अध्याय
2018 के बाद यह पीएम मोदी की पहली चीन यात्रा है। खासकर 2020 की गलवान घाटी झड़पों के बाद दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण रहे। इसलिए इस मुलाकात को रिश्तों को रीसेट करने का प्रयास माना जा रहा है।
एससीओ शिखर सम्मेलन: बहुध्रुवीय दुनिया की ओर
अमेरिका के टैरिफ युद्ध का असर
वर्तमान समय में वैश्विक राजनीति पर अमेरिका की टैरिफ नीतियों का गहरा प्रभाव है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% और चीन पर 30% शुल्क लगाया है। रूस पहले से ही कठोर आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। ऐसे माहौल में एससीओ सम्मेलन को अमेरिका के वर्चस्व के खिलाफ एक साझा मंच के रूप में देखा जा रहा है।
जिनपिंग, मोदी और पुतिन की साझा रणनीति
इस सम्मेलन में शी जिनपिंग, नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन एक साथ दिखेंगे। तीनों नेता बहुध्रुवीय दुनिया की पैरवी कर रहे हैं, जहां एक ही महाशक्ति का दबदबा न हो बल्कि कई शक्तियां संतुलन बनाए रखें।
China’s Indian community accorded a very special welcome in Tianjin. Here are some glimpses. pic.twitter.com/PzAV517ewF
— Narendra Modi (@narendramodi) August 30, 2025
भारत की रणनीतिक स्थिति
रूस के साथ ऊर्जा साझेदारी
रूस-यूक्रेन युद्ध के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा है। अमेरिका के दबाव के बावजूद मोदी सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए स्वतंत्र नीति अपनाएगा।
चीन से संबंध सुधारने की कोशिश
गलवान विवाद के बाद भारत-चीन संबंधों में ठंडापन आ गया था। लेकिन यह दौरा इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि भारत और चीन दोनों सहयोग के नए रास्ते तलाशना चाहते हैं, खासकर व्यापार और सुरक्षा मामलों में।
वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका
संतुलन साधता भारत
भारत आज एक ऐसी स्थिति में है जहां उसे अमेरिका, रूस और चीन – तीनों के साथ संबंध बनाए रखने हैं। अमेरिका के साथ रक्षा और तकनीक, रूस से ऊर्जा और रक्षा उपकरण, और चीन से व्यापार – यह त्रिकोण भारत की विदेश नीति की मजबूरी और ताकत दोनों है।
बहुध्रुवीय दुनिया का समर्थन
मोदी का चीन दौरा केवल द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं है। यह दुनिया को यह संदेश भी देता है कि भारत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन करता है।
विशेषज्ञों की राय
राजनयिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उसे एशिया में अपनी रणनीतिक भूमिका मजबूत करने का मौका मिलेगा। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को चीन और रूस के साथ करीबी बढ़ाने से अमेरिका नाराज हो सकता है, लेकिन भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहेगा।
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Author: AK
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