Pew Survey में पाकिस्तान को लेकर भारतीयों की राय सामने आई। 78% भारतीयों की सोच नकारात्मक है, जबकि हिंदू-मुस्लिम नजरिए में भी बड़ा अंतर दिखा।
Pew Survey: Indians’ Views on Pakistan

भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सिर्फ सरकारों और कूटनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच तनाव, सीमा विवाद, आतंकवाद, सुरक्षा और राजनीतिक बयानबाजी का असर आम लोगों की सोच पर भी पड़ता है। ऐसे समय में अमेरिकी संस्था प्यू रिसर्च सेंटर का ताजा सर्वे भारत और पाकिस्तान की जनता के नजरिए की एक अहम तस्वीर सामने रखता है। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि दोनों देशों में एक-दूसरे को लेकर नकारात्मक धारणा काफी मजबूत है। हालांकि, भारत के भीतर अलग-अलग धार्मिक समूहों की राय में भी उल्लेखनीय अंतर दिखाई देता है।
Pew Survey Report के मुताबिक, भारत में 78 फीसदी लोगों ने पाकिस्तान के प्रति नकारात्मक राय जाहिर की। इनमें 65 फीसदी की राय पाकिस्तान के बारे में बेहद नकारात्मक थी। इसके विपरीत केवल 22 फीसदी भारतीयों ने पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक नजरिया व्यक्त किया। पाकिस्तान में भारत को लेकर धारणा और भी सख्त नजर आई। वहां 93 फीसदी लोगों ने भारत के बारे में नकारात्मक राय दी, जबकि 73 फीसदी ने भारत के प्रति अपनी राय को बहुत खराब बताया।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि India Pakistan Relations को लेकर दोनों देशों की जनता के बीच भरोसे की स्थिति काफी कमजोर है। लेकिन इस सर्वे की सबसे दिलचस्प बात भारत में हिंदू और मुस्लिम समुदायों की राय के बीच दिखाई देने वाला अंतर है।
पाकिस्तान को लेकर भारतीयों की कुल राय क्या है?
प्यू रिसर्च के सर्वे में भारत के लोगों से पाकिस्तान के बारे में उनकी राय पूछी गई। कुल मिलाकर 78 फीसदी भारतीयों का नजरिया नकारात्मक रहा। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी जिनकी राय बेहद नकारात्मक थी।
इसके उलट केवल 22 फीसदी लोगों ने पाकिस्तान को लेकर सकारात्मक राय जाहिर की। इसका मतलब यह है कि भारत में पाकिस्तान को लेकर सकारात्मक सोच रखने वाले लोगों की संख्या नकारात्मक सोच रखने वालों की तुलना में काफी कम है।
इस तरह के आंकड़ों को केवल राजनीतिक नजरिए से देखना सही नहीं होगा। आम लोगों की राय कई कारणों से बनती है। सीमा पर होने वाली घटनाएं, आतंकवाद, मीडिया कवरेज, राजनीतिक बयान, सैन्य तनाव और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक विवाद जनता की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
पाकिस्तान को खतरा मानने वालों की संख्या
सर्वे में एक और महत्वपूर्ण सवाल यह था कि लोग अपने देश के लिए सबसे बड़ा भू-राजनीतिक खतरा किसे मानते हैं।
भारत में 54 फीसदी लोगों ने पाकिस्तान को सबसे बड़ा जियोपॉलिटिकल खतरा बताया। पाकिस्तान में 43 फीसदी लोगों ने भारत को अपने देश के लिए सबसे बड़ा खतरा माना।
यह आंकड़ा बताता है कि दोनों देशों के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव आम लोगों की सुरक्षा संबंधी सोच में भी मौजूद है।
हालांकि, दोनों देशों में सभी लोग पड़ोसी देश को सबसे बड़ा खतरा नहीं मानते। भारत में पाकिस्तान के बाद 21 फीसदी लोगों ने चीन को बड़ा खतरा बताया। पाकिस्तान में इजरायल और अमेरिका दोनों को 24-24 फीसदी लोगों ने बड़ा खतरा माना।
हिंदू और मुस्लिमों की राय में कितना अंतर?
Pew Research India सर्वे का एक अहम हिस्सा भारत के धार्मिक समूहों से जुड़ा है। आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान को लेकर भारतीय हिंदुओं और मुसलमानों की राय पूरी तरह एक जैसी नहीं है।
करीब 21 फीसदी भारतीय मुसलमानों ने पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक राय व्यक्त की। वहीं भारतीय हिंदुओं में यह आंकड़ा केवल 6 फीसदी रहा।
इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय मुसलमानों की बहुसंख्यक आबादी पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक है। बल्कि आंकड़ों के अनुसार मुस्लिम समुदाय में भी सकारात्मक राय रखने वालों की संख्या अल्पमत में है। अंतर केवल इतना है कि हिंदुओं की तुलना में मुस्लिमों में पाकिस्तान को लेकर सकारात्मक नजरिया अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दिया।
दूसरी ओर, पाकिस्तान को भारत के लिए सबसे बड़ा भू-राजनीतिक खतरा मानने के मामले में भी दोनों समुदायों के बीच अंतर सामने आया।
करीब 34 फीसदी भारतीय मुसलमानों ने पाकिस्तान को सबसे बड़ा खतरा माना, जबकि हिंदुओं में यह आंकड़ा 57 फीसदी था।
आंकड़ों को कैसे समझना चाहिए?
इन आंकड़ों की व्याख्या करते समय सावधानी जरूरी है। किसी भी सर्वे में लोगों की राय कई सामाजिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों से प्रभावित हो सकती है। धार्मिक पहचान अपने आप में किसी व्यक्ति की विदेश नीति संबंधी सोच तय नहीं करती।
किसी व्यक्ति की राय उसके परिवार, शिक्षा, क्षेत्र, मीडिया से संपर्क, राजनीतिक विचारों और व्यक्तिगत अनुभवों से भी प्रभावित हो सकती है।
इसलिए इन आंकड़ों का अर्थ यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि भारत का कोई एक धार्मिक समुदाय पाकिस्तान के पक्ष में है और दूसरा उसके खिलाफ। वास्तविक तस्वीर इससे कहीं अधिक जटिल है।
पाकिस्तान में भारत को लेकर धारणा और सख्त
भारत की तुलना में पाकिस्तान में भारत को लेकर नकारात्मक सोच रखने वालों की संख्या और ज्यादा है। सर्वे में 93 फीसदी पाकिस्तानियों ने भारत के प्रति नकारात्मक राय व्यक्त की।
इनमें करीब 73 फीसदी लोगों ने भारत के बारे में अपनी राय को बहुत खराब बताया।
यह आंकड़ा India Pakistan Opinion के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष और राजनीतिक तनाव का असर जनता की सोच में स्पष्ट दिखाई देता है।
जब दो देशों के नागरिक लंबे समय तक एक-दूसरे को सुरक्षा चुनौती के रूप में देखते हैं, तो उनके बीच सामाजिक और मानवीय स्तर पर भी दूरी बढ़ सकती है।
पाकिस्तान के लिए चीन सबसे बड़ा सहयोगी
प्यू रिसर्च सर्वे में लोगों से यह भी पूछा गया कि वे अपने देश के लिए किस राष्ट्र को सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी मानते हैं।
पाकिस्तान में चीन स्पष्ट रूप से सबसे आगे रहा। करीब 75 फीसदी पाकिस्तानियों ने चीन को अपने देश का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी बताया।
इसके बाद केवल 12 फीसदी लोगों ने सऊदी अरब का नाम लिया। यह अंतर बताता है कि पाकिस्तान की जनता के बीच चीन को लेकर रणनीतिक और राजनीतिक भरोसा काफी मजबूत है।
चीन और पाकिस्तान के बीच आर्थिक, रक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े संबंध लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी CPEC भी दोनों देशों के संबंधों का प्रमुख हिस्सा रहा है।
भारत में रूस पर भरोसा
भारत में सहयोगी देश को लेकर तस्वीर अलग दिखाई देती है। करीब 36 फीसदी भारतीयों ने रूस को अपना सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी बताया। इसके बाद 16 फीसदी लोगों ने अमेरिका का नाम लिया।
हालांकि करीब एक-तिहाई भारतीयों ने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया।
भारत और रूस के संबंध दशकों पुराने हैं। रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच लंबे समय से संबंध रहे हैं। यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि आज भी भारतीय जनता की राय में दिखाई देती है।
रूस को लेकर भारतीयों की सकारात्मक राय
सर्वे में रूस को लेकर भारतीयों की राय भी महत्वपूर्ण रही। करीब 58 फीसदी भारतीयों ने रूस के प्रति सकारात्मक नजरिया जाहिर किया।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लेकर भी भारतीयों में अपेक्षाकृत मजबूत भरोसा दिखाई दिया। सर्वे के मुताबिक 51 फीसदी भारतीयों ने पुतिन पर भरोसा जताया।
प्यू रिसर्च द्वारा 37 देशों में किए गए सर्वे की तुलना में रूस और पुतिन को लेकर सबसे अधिक सकारात्मक राय भारत में दर्ज की गई।
यह आंकड़ा बताता है कि वैश्विक राजनीति में भारत के नागरिकों की प्राथमिकताएं केवल पश्चिमी देशों के साथ संबंधों तक सीमित नहीं हैं। रूस के साथ ऐतिहासिक संबंधों का प्रभाव जनता के नजरिए में अभी भी देखा जा सकता है।
पाकिस्तान में अमेरिका को लेकर बदली सोच
सर्वे में पाकिस्तान की अमेरिका के प्रति बदलती धारणा भी सामने आई। प्यू रिसर्च के अनुसार पाकिस्तान में अमेरिका को लेकर सकारात्मक राय में बढ़ोतरी हुई है।
रिपोर्ट में इसके संभावित कारणों में अमेरिकी प्रशासन की नीतियों का उल्लेख किया गया है। हालांकि जिस अवधि में पाकिस्तान में सर्वे किया गया, उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण घटनाएं भी चल रही थीं।
पाकिस्तान में यह सर्वे 8 अप्रैल से 7 मई 2026 के बीच 1,039 वयस्कों के बीच किया गया था। भारत में सर्वे 8 फरवरी से 27 अप्रैल 2026 के बीच किया गया, जिसमें 3,566 वयस्कों ने हिस्सा लिया।
इन समयावधियों को ध्यान में रखना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी देश में जनता की विदेश नीति संबंधी राय बदलते अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से प्रभावित हो सकती है।
भारत और पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताएं अलग क्यों हैं?
दोनों देशों की सुरक्षा चिंताओं में कुछ समानताएं हैं, लेकिन प्राथमिकताएं अलग दिखाई देती हैं।
भारत में पाकिस्तान सबसे बड़ा जियोपॉलिटिकल खतरा माना गया, जबकि उसके बाद चीन का स्थान रहा। यह भारत की भौगोलिक स्थिति और दोनों पड़ोसी देशों के साथ सुरक्षा संबंधों को दर्शाता है।
पाकिस्तान में भारत के अलावा इजरायल और अमेरिका को भी बड़ी संख्या में लोगों ने खतरा माना। इससे पता चलता है कि पाकिस्तान की जनता की सुरक्षा संबंधी सोच में दक्षिण एशिया के अलावा पश्चिम एशिया और वैश्विक राजनीति का भी प्रभाव है।
क्या इन धारणाओं में बदलाव संभव है?
जनता की राय स्थायी नहीं होती। यदि दो देशों के बीच तनाव कम हो, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क बढ़े तथा सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध मजबूत हों, तो समय के साथ नकारात्मक धारणाओं में बदलाव संभव है।
लेकिन इसके लिए केवल राजनीतिक घोषणाएं पर्याप्त नहीं होतीं। सीमा पर स्थिरता, आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई, नियमित संवाद और आर्थिक संपर्क भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सर्वे भारत-पाकिस्तान संबंधों के बारे में क्या बताता है?
Pew Survey Report का सबसे बड़ा संदेश यह है कि भारत और पाकिस्तान के नागरिकों के बीच एक-दूसरे को लेकर भरोसा अभी कमजोर है।
भारत में 78 फीसदी लोगों की पाकिस्तान के प्रति नकारात्मक राय और पाकिस्तान में 93 फीसदी लोगों की भारत के प्रति नकारात्मक राय इस दूरी को स्पष्ट करती है।
हालांकि, भारत के भीतर धार्मिक समूहों के बीच अंतर भी ध्यान देने योग्य है। भारतीय मुसलमानों में पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक राय रखने वालों का अनुपात हिंदुओं की तुलना में अधिक रहा, लेकिन मुस्लिम समुदाय में भी बहुमत पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक नहीं था।
इसी तरह पाकिस्तान को खतरा मानने के मामले में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच स्पष्ट अंतर रहा।
सोशल मीडिया और मीडिया का कितना प्रभाव?
आज जनता की विदेश नीति संबंधी सोच पर सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों का प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। भारत-पाकिस्तान से जुड़ी कोई भी घटना कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाती है।
वीडियो, राजनीतिक बयान और सोशल मीडिया पोस्ट अक्सर भावनात्मक प्रतिक्रियाएं पैदा करते हैं। ऐसे में किसी एक घटना के आधार पर पूरे पड़ोसी देश के नागरिकों के बारे में राय बनना आसान हो जाता है।
इसी कारण सर्वे के आंकड़ों को समझते समय यह भी देखना जरूरी है कि जनता तक सूचना किस तरह पहुंचती है। अलग-अलग मीडिया वातावरण लोगों की धारणाओं को अलग दिशा में प्रभावित कर सकते हैं।
आगे क्या हो सकता है?
भारत और पाकिस्तान के रिश्ते भविष्य में किस दिशा में जाएंगे, यह कई कारकों पर निर्भर करेगा। सुरक्षा स्थिति, सीमा पर शांति, आतंकवाद, राजनीतिक नेतृत्व और दोनों देशों के बीच संवाद इसमें प्रमुख भूमिका निभाएंगे।
सर्वे यह जरूर बताता है कि जनता के स्तर पर दोनों देशों के बीच अविश्वास गहरा है। ऐसे माहौल में किसी भी शांति प्रक्रिया को केवल सरकारों के बीच समझौते तक सीमित रखने के बजाय लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी ध्यान देना होगा।
छात्रों, कलाकारों, खिलाड़ियों, शोधकर्ताओं और व्यापारिक समुदायों के बीच संवाद लंबे समय में एक-दूसरे के प्रति समझ विकसित कर सकता है।
निष्कर्ष
Pew Research का ताजा सर्वे भारत और पाकिस्तान के नागरिकों की सोच को समझने के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है। भारत में 78 फीसदी लोगों ने पाकिस्तान के प्रति नकारात्मक राय जाहिर की, जबकि पाकिस्तान में 93 फीसदी लोगों का नजरिया भारत के प्रति नकारात्मक रहा।
भारत के भीतर भी धार्मिक समूहों की राय में अंतर देखने को मिला। करीब 21 फीसदी भारतीय मुसलमानों ने पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक राय जताई, जबकि हिंदुओं में यह आंकड़ा 6 फीसदी रहा। वहीं पाकिस्तान को भारत के लिए सबसे बड़ा भू-राजनीतिक खतरा मानने वालों में हिंदुओं का अनुपात 57 फीसदी और मुसलमानों का 34 फीसदी रहा।
सहयोगी देशों के मामले में भी दोनों देशों की प्राथमिकताएं अलग हैं। पाकिस्तान में 75 फीसदी लोगों ने चीन को सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी माना, जबकि भारत में रूस सबसे आगे रहा। करीब 36 फीसदी भारतीयों ने रूस को सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी बताया और 58 फीसदी ने रूस के प्रति सकारात्मक राय जाहिर की।
इन आंकड़ों से यह समझ आता है कि India Pakistan Relations केवल सरकारों के बयानों से नहीं बनते, बल्कि जनता की धारणाएं भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सर्वे में दिख रही नकारात्मकता दोनों देशों के बीच लंबे समय से मौजूद अविश्वास को दर्शाती है। साथ ही, भारत के भीतर अलग-अलग समुदायों और दोनों देशों की वैश्विक साझेदारियों को लेकर अलग-अलग सोच यह बताती है कि दक्षिण एशिया की राजनीति बेहद जटिल है।
आने वाले समय में यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है और संवाद बढ़ता है, तो जनता की राय में भी बदलाव की संभावना बनी रहेगी। फिलहाल, Pew Survey के आंकड़े यही संकेत देते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक दूरी के साथ-साथ आम लोगों के नजरिए में भी गहरी दूरी मौजूद है।
Author: AK
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