बिहार पंचायत चुनाव 2027 को लेकर तैयारियां तेज हैं। परिसीमन और GIS मैपिंग के बाद ही तारीख तय होगी। जानें मुखिया की सीटें और जरूरी दस्तावेज।
Bihar Panchayat Election 2027: Key Update

बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। लेकिन अभी चुनाव की तारीख को लेकर तस्वीर साफ नहीं है।
बिहार पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के मुताबिक परिसीमन के बाद ही चुनाव कराए जाएंगे। परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या में बदलाव हो सकता है। परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम एक साल लगने की संभावना है। ऐसे में इस साल चुनाव होने की संभावना नहीं दिख रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, बिहार में पंचायत चुनाव अगले साल यानी 2027 के जुलाई-अगस्त से पहले संभव नहीं माना जा रहा है। पंचायतों के परिसीमन का आधार 2011 की जनगणना के आंकड़े पर होंगे। साथ ही इसी के अनुसार पंचायतों की सीमाओं और जनसंख्या से जुड़े बदलाव तय किए जाएंगे।
पंचायतों का जीआईएस मैपिंग का चल रहा है काम
बता दें कि फिलहाल राज्य में पंचायतों का जीआईएस मैपिंग का काम चल रहा है। जनगणना 2011 के आंकड़ों के आधार पर पंचायतों की मैपिंग के साथ कम्युनिकेशन प्लान भी तैयार किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक 8 अगस्त तक पंचायतों का जीआईएस मैपिंग का काम पूरा किया जा चुका है। अब पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है।
परिसीमन के बाद ही साफ होगी चुनाव की तस्वीर
पंचायतों के परिसीमन को लेकर जारी हालिया दिशा-निर्देशों के अनुसार राजस्व ग्रामों की सीमाओं, जनसंख्या में अंतर और मानचित्रों से जुड़ी त्रुटियों को दूर करने के लिए विभागीय स्तर पर समय-सीमा तय कर दी गई है। इन कामों के पूरा होने के बाद ही परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
परिसीमन के दौरान राजस्व ग्रामों की वास्तविक स्थिति और जनसंख्या के आंकड़ों का मिलान किया जाएगा। इसके साथ ही नक्शे में दर्ज नहीं होने या सीमा से जुड़ी गड़बड़ियों को भी ठीक किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि परिसीमन की पूरी प्रक्रिया को तय समय के भीतर पूरा किया जाए, ताकि आगे की चुनावी तैयारी में किसी तरह की परेशानी न हो।
बिहार राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से भी इस संबंध में जल्द ही पूरी जानकारी जारी किए जाने की उम्मीद है। हालांकि मौजूदा स्थिति को देखते हुए अगले साल जुलाई-अगस्त से पहले पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं दिख रहा है।
मुखिया की सीटों की संख्या में भी होगा बदलाव
वहीं माना जा रहा है कि राज्य के पंचायतों में मुखिया की सीटों की संख्या भी बढ़ सकती है। इसमें करीब 60 फीसदी तक बढ़ोतरी की बात कही जा रही है। मौजूदा व्यवस्था में परिसीमन के लिए जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में मुखिया की कुल संख्या करीब 13 हजार तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
मुखिया बनने के लिए तैयार कर लें ये दस्तावेज
अगर आप भी मुखिया का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं तो दस्तावेज अभी से तैयार कर लें। नामांकन के समय कागजों की कमी परेशानी बढ़ा सकती है। आखिरी समय में प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए भागदौड़ करनी पड़ सकती है।
जैसे-मतदाता सूची में नाम, प्रस्तावक का नाम, उम्र का प्रमाण, शपथ-पत्र, फोटो और पहचान पत्र, आरक्षित सीट है तो जाति प्रमाण-पत्र रखें, निवास प्रमाण-पत्र भी रखें।
पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। यही वजह है कि फिलहाल चुनाव से ज्यादा जोर पंचायतों की सीमाओं, जनसंख्या के आंकड़ों और जीआईएस मैपिंग से जुड़ी तैयारियों को पूरा करने पर है। परिसीमन का काम अंतिम रूप लेने के बाद ही पंचायत चुनाव को लेकर अगली बड़ी तस्वीर सामने आएगी।
Author: AK
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