लंदन में टॉमी रॉबिन्सन की रैली में एक लाख से ज्यादा लोग जुटे। पुलिस से झड़प, 26 अफसर घायल और 25 प्रदर्शनकारी गिरफ्तार। जानें पूरी रिपोर्ट।

London Protest: Why Tommy Robinson Rally Turned Violent
🚨 NOW: A historically massive UK protest is taking place and attendees are chanting "CHARLIE! CHARLIE! CHARLIE!" 🔥🙏
— Eric Daugherty (@EricLDaugh) September 13, 2025
"British patriots are chanting the name of Charlie Kirk in his memory."pic.twitter.com/mQmTSJqy1f
प्रस्तावना: लंदन की सड़कों पर क्यों उमड़ा जनसैलाब?
नेपाल और फ्रांस में हाल के प्रदर्शनों के बाद अब ब्रिटेन की राजधानी लंदन भी बड़े स्तर के विरोध-प्रदर्शनों का गवाह बना। शनिवार, 13 सितंबर को इंग्लिश फार-राइट नेता टॉमी रॉबिन्सन द्वारा आयोजित “यूनाइट द किंगडम” मार्च में लाखों लोग शामिल हुए। लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर जुटी भीड़ ने हिंसा का रूप ले लिया। नतीजा यह रहा कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई, 26 पुलिस अधिकारी घायल हुए और 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
टॉमी रॉबिन्सन कौन हैं?
फार-राइट राजनीति का चेहरा
- टॉमी रॉबिन्सन (असल नाम स्टीफन यैक्सले-लेनन) ब्रिटेन की इंग्लिश डिफेंस लीग (EDL) के संस्थापक हैं।
- वे लंबे समय से एंटी-इमिग्रेशन और फार-राइट विचारधारा को बढ़ावा देते रहे हैं।
- उनके समर्थकों का मानना है कि ब्रिटेन पर प्रवासियों, खासकर मुस्लिम समुदाय का दबाव बढ़ रहा है।
“यूनाइट द किंगडम” मार्च: भीड़ और विवाद
उम्मीद से ज्यादा लोग पहुंचे
- पुलिस के मुताबिक, इस मार्च में 1 लाख 10 हजार से लेकर 1.5 लाख लोग शामिल हुए।
- इसके जवाब में “मार्च अगेंस्ट फासिज्म” नाम की एक प्रतिप्रदर्शन रैली भी हुई, जिसमें लगभग 5,000 लोग जुटे।
- इन लोगों ने “शरणार्थियों का स्वागत है” और “फार-राइट को खत्म करो” जैसे नारे लगाए।
झड़प और हिंसा
- रैली के दौरान स्थिति तब बिगड़ी, जब रॉबिन्सन समर्थकों का एक समूह पुलिस और विरोधी प्रदर्शनकारियों से भिड़ गया।
- भीड़ ने पुलिस पर बोतलें फेंकीं, मुक्के और लातें चलाए।
- हिंसा को काबू करने के लिए दंगा-रोधी दस्ते को तैनात करना पड़ा।
पुलिस पर हमला और चोटें
आधिकारिक रिपोर्ट
- 26 पुलिस अधिकारी घायल हुए, जिनमें चार गंभीर रूप से जख्मी हैं।
- किसी की नाक टूटी, किसी के दांत, जबकि एक अधिकारी को रीढ़ की चोट लगी।
- 25 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया और जांच जारी है।
पुलिस का बयान
असिस्टेंट कमिश्नर मैट ट्विस्ट ने कहा:
“बहुत लोग शांतिपूर्वक आए थे, लेकिन बड़ी संख्या में लोग सिर्फ हिंसा फैलाने की नीयत से पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस पर हमला किया और सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश की।”
The guardian reported "110k" at our London rally today.
— Tommy Robinson 🇬🇧 (@TRobinsonNewEra) September 13, 2025
Yet, literally had their own helicopter showing the millions of patriots 🤡
Legacy media proving again they'll just lie to your face for their own agenda.
This is why nobody trusts them.
We are the media now. pic.twitter.com/s0yOh2NEfe
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ
यूरोप से बयान
- फ्रांस के फार-राइट नेता एरिक ज़ेमूर ने कहा कि यूरोप मुस्लिम देशों से “कॉलोनाइजेशन” का शिकार हो रहा है।
- उनका बयान यूरोप में चल रही राजनीतिक बहस को और भड़का गया।
एलन मस्क की टिप्पणी
- अमेरिकी अरबपति एलन मस्क ने वीडियो संदेश भेजा।
- उन्होंने ब्रिटेन की सरकार पर आरोप लगाया कि अनियंत्रित प्रवास देश की सामाजिक और आर्थिक संरचना को कमजोर कर रहा है।
The people of England love Elon Musk.
— DogeDesigner (@cb_doge) September 13, 2025
Look at their reaction when @elonmusk appeared on the big screen. pic.twitter.com/tvyvpkc7Ux
श्रद्धांजलि और सांस्कृतिक पहलू
- रैली में अमेरिकी दक्षिणपंथी कार्यकर्ता चार्ली किर्क को श्रद्धांजलि दी गई।
- एक मिनट का मौन रखा गया और “अमेजिंग ग्रेस” धुन बगपाइपर ने बजाई।
रैली में लगे नारे
रॉबिन्सन और उनके समर्थकों ने कई विवादित नारे लगाए, जैसे:
- “स्टॉप द बोट्स” (नौकाओं से आने वालों को रोकें)
- “सेन्ड देम होम” (उन्हें वापस भेजो)
- “वी वांट आवर कंट्री बैक” (हम अपना देश वापस चाहते हैं)
इन नारों ने न केवल ब्रिटेन बल्कि पूरे यूरोप में प्रवासियों और शरणार्थियों के मुद्दे पर बहस तेज कर दी।
नेपाल और फ्रांस से लंदन तक: एक समान पैटर्न
नेपाल में विरोध
- हाल ही में नेपाल में युवाओं ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और राजशाही की वापसी की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए।
- शुरुआत शांतिपूर्ण रही, लेकिन बाद में यह आंदोलन हिंसक हो गया।
फ्रांस में अशांति
- फ्रांस में सरकार की आर्थिक नीतियों और विवादित कानूनों के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए।
- वहां भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं और संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
समानताएँ
- तीनों देशों में भीड़ शुरू में शांतिपूर्ण रही।
- लेकिन बाद में विरोध हिंसक हो गया और पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
ब्रिटेन के लिए खतरे की घंटी
लंदन का यह बवाल ब्रिटेन के लिए कई सवाल खड़े करता है:
- क्या समाज में फार-राइट और लेफ्ट विंग के बीच टकराव बढ़ रहा है?
- क्या प्रवास और शरणार्थी नीतियों को लेकर असंतोष हिंसक रूप ले रहा है?
- क्या ब्रिटिश सरकार सामाजिक एकजुटता बनाए रखने में असफल हो रही है?
निष्कर्ष: विरोध से हिंसा तक की यात्रा
लंदन की टॉमी रॉबिन्सन रैली यह साबित करती है कि यूरोप में प्रवास, पहचान और राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दे कितने संवेदनशील और विस्फोटक हैं।
जहां एक ओर लाखों लोग अपनी आवाज उठाने के लिए सड़कों पर उतरते हैं, वहीं दूसरी ओर भीड़ का हिंसक रूप लोकतांत्रिक मूल्यों को चुनौती देता है।
नेपाल, फ्रांस और अब ब्रिटेन—तीनों जगह यह संदेश साफ है कि यदि सरकारें सामाजिक असंतोष और प्रवासी नीतियों को संतुलित ढंग से नहीं संभालेंगी, तो सड़कें लोकतंत्र का मंच बन सकती हैं और कभी भी हिंसा भड़क सकती है।
- London protest
- टॉमी रॉबिन्सन रैली
- ब्रिटेन में हिंसा
- लंदन पुलिस झड़प
- यूनाइट द किंगडम मार्च
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !












