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Jehanabad News: वंदना कुमारी भगत को पीएच.डी. की उपाधि, क्षेत्रीय शोध को मिला सम्मान

Jehanabad News: वंदना कुमारी भगत को पीएच.डी. की उपाधि, क्षेत्रीय शोध को मिला सम्मान
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बोधगया। मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के जंतु विज्ञान विभाग ने वरिष्ठ पत्रकार, भाजपा नेता एवं आयकर अधिवक्ता राजीव भगत की सुपुत्री, पूर्व राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य विद्यार्थी परिषद एवं युवा भाजपा नेत्री वंदना कुमारी भगत को विद्या वाचस्पति (Ph.D.) की उपाधि प्रदान की।

गुरुवार को विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के सभागार में आयोजित समारोह में वंदना कुमारी ने “The Impact of Cypermethrin in Heteropneustes fossilis” विषय पर आधारित शोध प्रस्तुत किया। यह शोध गया शहर के प्रसिद्ध दिग्घी तालाब की मछली की एक प्रजाति पर केंद्रित था।

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वंदना ने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा से जंतु विज्ञान में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की है। अपने शोध कार्य के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण शोध पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित किए। उनके शोध निर्देशक डॉ. शैलेन्द्र कुमार, सेवानिवृत्त प्राध्यापक, टी.एस. कॉलेज, हिसुआ, नवादा ने बताया कि वंदना ने गहन रुचि और मेहनत के साथ यह शोध कार्य संपन्न किया और क्षेत्रीय स्तर पर मछलियों की जैव विविधता और पर्यावरणीय प्रभावों का विश्लेषण प्रस्तुत किया।

वंदना के मित्र व संस्कार भारती दक्षिण बिहार प्रान्त के मंत्री विकास मिश्र ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि गया बिहार की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों का केन्द्र है और इस प्रकार के शोध क्षेत्र की वैश्विक पहचान को मजबूत करते हैं।

इस अवसर पर एस.एन. सिन्हा महाविद्यालय, जहानाबाद के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. सुबोध झा, हिंदी प्राध्यापिका कुमारी मानसी, डॉ. उदय शंकर सिन्हा (वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय), डॉ. दिलीप केशरी (विभागाध्यक्ष, जंतु विज्ञान), डॉ. एस.एन.पी. यादव, डॉ. सरफराज, डॉ. तरुण, डॉ. अदिति कुमारी, प्रो. आभा कुमारी, प्रो. पूनम कुमारी, प्रो. राजेंद्र प्रसाद (महाराजा कॉलेज, आरा), सीनेट सदस्य अनिल स्वामी, वंदना की माता ओम ज्योति भगत, भाई सुधांशु व अमृतांशु समेत कई विशिष्ट जन उपस्थित रहे।

वंदना ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शोध निर्देशक, विभागाध्यक्ष, प्रोफेसरों और अपने सभी सहयोगी मित्रों को देते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत परिश्रम का परिणाम है, बल्कि क्षेत्रीय शोध को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

AK
Author: AK

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