जहानाबाद ऑल इंडिया यूनाईटेड मुस्लिम मोर्चा, जकात भवन ट्रस्ट और सेन्टर फॉर पीस (CPOS) के संयुक्त बैनर तले आगामी 20 अप्रैल 2025 को बापू सभागार, पटना में “मिल्लत बचाव, मुल्क बचाव” नामक एक अहम कांफ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। इस सम्मेलन का मकसद देश में बढ़ती नकारात्मक राजनीति के खिलाफ आवाज उठाना और माइनोरिटी समुदायों, खासकर उनके कमजोर तबकों को कानूनी सुरक्षा दिलाने की मांग करना है।
इस सिलसिले में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया यूनाईटेड मुस्लिम मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता हाफिज गुलाम सरवर ने कहा कि आज माइनोरिटी समुदाय के कमजोर तबकों की स्थिति वैसी ही हो गई है जैसी 1980 के दशक तक दलितों और आदिवासियों की थी। उन्होंने कहा कि 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी द्वारा बनाया गया “अत्याचार निवारण अधिनियम” (SC/ST एक्ट) ने दलितों-आदिवासियों को विशेष सुरक्षा दी थी, और आज उसी तरह की सुरक्षा की जरूरत माइनोरिटीज के लिए भी महसूस की जा रही है।
हाफिज सरवर ने जोर देकर कहा कि अगर इस एक्ट में माइनोरिटीज के कमजोर तबकों को भी शामिल कर लिया जाए, तो नफरत, दंगे-फसाद और सांप्रदायिक राजनीति पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “भारत की मिट्टी में धर्म के आधार पर नफरत कभी स्थायी नहीं रही है, लेकिन पिछले 70 वर्षों से वोट की राजनीति ने इस खाई को गहरा किया है। अब समय आ गया है कि इस पर कानूनी ब्रेक लगाया जाए वरना देश की एकता और अखंडता पर खतरा मंडरा सकता है।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूनाइटेड मुस्लिम मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राशिद अहमद और संगठन के सचिव मोहम्मद सहबाज आलम भी मौजूद थे। उन्होंने मीडिया से अपील की कि इस महत्वपूर्ण पहल में वे सहयोग करें और इसकी आवाज़ जन-जन तक पहुँचाएं।
प्रवक्ता हाफिज सरवर ने यह भी बताया कि मोर्चा की निरंतर कोशिशों के फलस्वरूप केंद्र सरकार ने “भारतीय न्याय संहिता 2023” की धारा 101(2) में माब लिंचिंग के खिलाफ कानून बनाया है, जो सराहनीय कदम है। उन्होंने मांग की कि इसे जल्द से जल्द पूरे देश में लागू किया जाए, और इसके साथ ही एक समग्र “प्रोटेक्शन एक्ट” भी बनाया जाए, जो उकसावे वाले नारों, गाली-गलौज, मारपीट और सांप्रदायिक दंगों जैसे मामलों को कवर करे।
Author: AK
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