शुक्र, अप्रैल 17, 2026

शिवसेना का स्थापना दिवस: 57 साल पहले आज के दिन रखी गई शिवसेना की नींव, अब पार्टी दो फाड़ में बंटी, बाल ठाकरे की एक आवाज में कभी मुंबई थम जाती थी

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आज बात करेंगे एक ऐसे कट्टर हिंदू नेता की जिन्होंने अपने आखिरी समय तक अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया। पूरा जीवन मराठी मानुष और हिंदुओं के लिए आवाज उठाते रहे। जी हां हम बात कर रहे हैं बाला साहब ठाकरे की। बाला साहेब ठाकरे ने 57 साल पहले 19 जून 1966 को शिवसेना का गठन किया था। शिवसेना ने मराठी मानुष के सम्मान को अपनी राजनीति का आधार बनाया। बाला साहेब खुद कभी चुनाव नहीं लड़े। लेकिन उनका महाराष्ट्र की राजनीति में जबरदस्त प्रभाव हुआ करता था। उनकी एक आवाज में कभी बंबई (मुंबई) थम जाती थी। ‌17 नवंबर साल 2012 को बालासाहेब ठाकरे का निधन हो गया। ‌आज भले ही आज बालासाहेब ठाकरे नहीं है लेकिन पूरे महाराष्ट्र में उनका नाम आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है।

हालांकि अब पार्टी का बंटवारा हो चुका है। आज बाला ठाकरे होते तो जरूर अपनी पार्टी की यह हालत देखकर अफसोस करते । बता दें कि शिवसेना के गठन से पहले बाल ठाकरे एक अंग्रेजी अखबार में कार्टूनिस्ट थे। उनके पिता ने मराठी बोलने वालों के लिए अलग राज्य की मांग को लेकर आंदोलन किया था। बाला साहेब ने भी बॉम्बे में दूसरे राज्यों के लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ‘मार्मिक’ नाम से अखबार शुरू किया था। अखबार में बाला साहेब भी इस विषय पर खूब लिखते थे।

शिवसेना के गठन के समय बाला साहेब ठाकरे ने नारा दिया था, ‘अंशी टके समाजकरण, वीस टके राजकरण’। अर्थात 80 प्रतिशत समाज और 20 फीसदी राजनीति। पार्टी के गठन के कुछ साल बाद ही शिवसेना काफी लोकप्रिय हो गई। हालांकि महाराष्ट्र के मूल निवासियों के मुद्दे की वजह से दूसरे राज्यों से व्यापार करने महाराष्ट्र आए लोगों पर काफी हमले भी हुए। धीरे-धीरे पार्टी मराठी मानुष के मुद्दे से हटकर हिन्दुत्व की राजनीति करने लगी। 1990 में शिवसेना ने पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव लड़ा, जिसमें 183 में से पार्टी के 52 प्रत्याशियों को जीत मिली। इससे एक साल पहले 1989 में हुए लोकसभा चुनावों में पहली बार शिवसेना का कोई नेता लोकसभा पहुंचा।

बॉम्बे नॉर्थ सेंट्रल सीट से जीते विद्याधर संभाजी गोखले शिवसेना के पहले सांसद थे। बाल ठाकरे 90 के दशक में महाराष्ट्र की राजनीति में किंगमेकर रहे, लेकिन 2019 में उनका परिवार किंगमेकर से किंग की भूमिका में आ गया। बाला साहेब के बेटे उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने और पोते आदित्य ठाकरे ने विधानसभा चुनाव लड़ा। शिवसेना का बंटवारा हुए एक साल का समय बीत गया है। दोनों ही पार्टियां बालासाहेब ठाकरे की विरासत पर अपना दावा जता रहे हैं। आज शिवसेना के स्थापना दिवस पर शिंदे शिवसेना और शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे, इस मौके पर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित करेंगी।

अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं, साथ ही निकाय चुनाव भी होने हैं। यही वजह है कि स्थापना दिवस के मौके पर दोनों ही पार्टियां अपने आप को असली शिवसेना और बाला साहेब ठाकरे की उत्तराधिकारी साबित करने की कोशिश करती दिखेंगी। बता दें कि बीते साल जून में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने शिवेसना में उद्धव ठाकरे नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी। जिसके चलते महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार अल्पमत में आ गई और सरकार गिर गई। इसके बाद एकनाथ शिंदे ने भाजपा के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई और शिंदे राज्य के सीएम और देवेंद्र फडणवीस डिप्टी सीएम बने। चुनाव आयोग ने भी शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को असली शिवसेना माना और पार्टी का चुनाव चिन्ह धनुष बाण शिंदे की पार्टी को देने का फैसला किया।

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Author: AK

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