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दिल्ली सरकार में पर्यायवरण मंत्री हैं गोपाल राय। उन्होंने 12 अक्टूबर को एक ऐलान किया कि जब राजधानी में वायु प्रदूषण चरम पर होगा तो सर्दियों से पहले वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर अंकुश लगाने के लिए वह पीयूसी को अनिवार्य कर देंगे। लेकिन अपने इस फैसले को उन्होंने वापस ले लिया है। अब अचानक इस तरह के ऐलान और फिर अपनी ही बातों को वापस लेना कई सारे सवाल खड़ा कर रहा है। हालांकि गोपाल राय ने यह जरूर कहा कि पेट्रोल डीजल मालिक संघों ने कानून व्यवस्था के संबंध में कई सुझाव दिए हैं। इस पर मुख्यमंत्री (अरविंद केजरीवाल) के साथ चर्चा की जाएगी और तब निर्णय लिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सीएम से चर्चा करने की जरूरत है।
पीयूसी को वापस लेने के पीछे तार्किक कारण
अखिल भारतीय पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बंसल ने कहा, “ईंधन भरने के लिए पीयूसी को अनिवार्य करने से फिलिंग स्टेशनों पर कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है। पेट्रोल पंप आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम के तहत आते हैं और वे किसी को भी रिफिलिंग से मना नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा, रिफिलिंग में लगे लोग कुशल श्रमिक नहीं हैं और इस प्रकार पीयूसी से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
दिल्ली में 10 क्षेत्रों में फैले लगभग 966 पीयूसी जांच केंद्र हैं। प्रदूषण लेवल टेस्ट इंस्पेक्टरों द्वारा रैंडम जांच भी की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पीयूसी केंद्र सही प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं।इसके लिए सजा का भी प्रावधान सुनिश्चित किया गया है। वैध पीयूसी प्रमाण पत्र के बिना चलने वाले वाहन पर मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190 (2) के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है और तीन महीने तक की कैद या 10,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है।
एक और कारण दिया गया जो कि सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) द्वारा पिछले साल नवंबर में किए गए एक विश्लेषण पर आधारित है। विश्लेषण साफ कहता है कि दिल्ली में स्थानीय पार्टिकुलेट मैटर में वाहनों का सबसे बड़ा योगदान है। हालांकि, सरकार ने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई शुरू की है और लोगों को जागरूक करने के लिए बाहरी फिलिंग स्टेशनों सहित शहर भर में 120 प्रवर्तन दल तैनात किए हैं कि पीयूसी प्रमाणपत्र एक अनिवार्य दस्तावेज है जो यह प्रमाणित करता है कि वाहन का टेलपाइप उत्सर्जन अनुमेय सीमा के भीतर है।
‘रेड लाइट ऑन, गाडी ऑफ’ अभियान 28 से होगा शुरू
इस बीच, गोपाल राय ने यह भी घोषणा की कि वाहन विरोधी प्रदूषण अभियान ‘रेड लाइट ऑन, गाडी ऑफ’ (Red Light On, Gaadi Off) का पहला चरण 28 अक्टूबर से 28 नवंबर तक शुरू होगा, जिसके दौरान दिल्ली में सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स यात्रियों को विभिन्न माध्यमों से वाहनों के प्रदूषण के बारे में जागरूक करेंगे। इसके पहले भी यह योजना शुरू की गई थी जिसपर कई सारे सवाल खड़े किए गए थे। पहला तो यह कि जिन बच्चों के हाथों में कलम होना चाहिए था उनके हाथों में केजरीवाल ने अपनी मुस्कुराते चेहरे वाली तस्वीर थमा दी है। दूसरा सवाल की उस योजना से कोई खास अंतर नहीं महसूस किया गया।
जबकि ठीक इसके उलट दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि ‘रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ’ अभियान अतीत में वाहनों से होने वाले प्रदूषण के बारे में जागरूकता फैलाने में सफल साबित हुआ है। अभियान के तहत, जन प्रतिनिधि और अधिकारी वाहनों के प्रदूषण को रोकने के लिए यात्रियों को रेड लाइट पर अपने वाहन बंद करने के लिए प्रेरित करते हैं। गोपाल राय के अनुसार, “रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ’ अभियान का पहला चरण 28 अक्टूबर से 28 नवंबर तक चलेगा। यह अभियान मुख्य रूप से 100 भीड़-भाड़ वाले चौराहों पर चलाया जाएगा। इसके लिए 2,500 सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को शामिल करने के लिए अपनी मंजूरी दी गई है। जागरूकता अभियान दो शिफ्टों में सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक चलेगा।



















