जनता की नजर में अरविंद केजरीवाल दोषी

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दिल्ली प्रदेश भाजपा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जनता का दोषी करार दिया। जनता के साथ किए गए हर वादे को केजरीवाल भूल गए हैं। इसलिए जनता की तरफ से भाजपा ने केजरीवाल के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया है।
ऐसा मानना है दिल्ली भाजपा का कि केजरीवाल के शासन में दिल्ली पूरी तरह बर्बाद हो गई है। बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, सड़क, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, समाज कल्याण, ग्रामीण इलाके और रोजगार के क्षेत्र में केजरीवाल ने जनता के साथ जो भी वादे किए थे, वे झूठे साबित हुए हैं। इसलिए जनता आगामी नगर निगम चुनावों में इस वादाखिलाफी के कारण केजरीवाल को सजा देगी।
आरोप पत्र के आरोपों को गिनवाते हुए बताया गया है कि 24 घंटे पानी देने का वायदा करने वाले केजरीवाल आज पानी की जो बेसिक जरुरत है उसको भी पूरा नहीं कर पाए हैं। दिल्ली में पानी की सप्लाई 900 एमजीडी है जबकि मांग 1300 एमजीडी को पार कर गई है। दिल्ली की 40 फीसदी आबादी को दिल्ली जल बोर्ड का पानी नहीं मिलता। इतना ही नहीं भाजपा द्वारा गंदा पानी होने से पेट संबंधित बिमारियां होने का भी जिक्र किया जाता है। गांवों और 83 फीसदी अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर लाइन नहीं डाली गई। बसों पर भी खूब बवाल काटा गया। 15000 बसे ये वादा है कि केजरीवाल का साल 2014 का और आज डीटीसी की बसों की संख्या आठ साल में 6500 से घटकर 3760 रह गई है।
भाजपा का कहना है कि बिजली के बिल हाफ करने के नाम पर भी जनता के साथ धोखा किया गया है। फिक्स चार्ज, पेंशन चार्ज और इलेक्ट्रिसिटी टैक्स के कारण दिल्ली में बिजली पूरे देश की तुलना में सबसे महंगी है। औसतन घरेलू बिजली 8.50 रुपए प्रति यूनिट और कमर्शियल बिजली 18 रुपए प्रति यूनिट मिल रही है। केजरीवाल ने दिल्ली में 30 हजार नए बेड देने का वादा किया था, लेकिन आठ साल में सिर्फ 2918 बेड बढ़े हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली के सरकारी अस्पतालों को बूचड़खाना कहा है।
इसके बाद भाजपा को शिक्षा की अपनी उपलब्धि बताने और उसको चुनावी हथियार बनाने वाले केजरीवाल की इस व्यवस्था में भी खामियां नज़र आई। 500 नए स्कूल खोलने का वादा किया गया था और एक भी नया स्कूल नहीं खोला गया। उल्टे 50 स्कूल बंद कर दिए। 22 हजार गेस्ट टीचर्स को वादा करके भी पक्का और नहीं किया गया। नेशनल परफॉरमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में दिल्ली आठवें नंबर पर है। 20 कॉलेज खोलने का वादा था लेकिन एक भी नहीं खोला गया।
8 लाख नौकरियों का वादा पहले किया था और 20 लाख नौकरियों का वादा पिछले बजट में किया है लेकिन दिल्ली सरकार ने स्वयं आरटीआई में जवाब दिया है कि पिछले आठ सालों में मात्र 440 लोगों को ही नौकरी दी गई। दिल्ली में 16 स्मॉग टावर लगाने का वादा किया था लेकिन सिर्फ दो लगे और वे भी चालू नहीं हैं। यमुना गंदा नाला बन चुकी है। केंद्र सरकार ने यमुना की सफाई के लिए लगभग 2500 करोड़ रुपए दिए, लेकिन वे भी पानी में बहा दिए क्योंकि उनका कोई हिसाब नहीं दिया गया। 2018 से किसी नए आवेदन पर पेंशन नहीं दी गई। 60 लाख से ज्यादा लोगों ने राशन कार्ड के लिए आवेदन किया हुआ है लेकिन एक भी राशन कार्ड नहीं बनाया। वादा किया था कि सफाई कर्मचारियों का सम्मान करेंगे लेकिन कोरोना के बाद उनका क्या हुआ पता नहीं।
श्री बिधूड़ी ने कहा कि केजरीवाल सादगी से सरकार चलाने का वादा करके सत्ता में आए थे लेकिन आठ सालों में प्रचार पर 1969 करोड़ रुपया खर्च कर दिया है जबकि 2012-13 में दिल्ली सरकार ने विज्ञापन पर सिर्फ 11.18 करोड़ रुपए खर्च किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फिजूलखर्ची पर एतराज जताया और सुप्रीम कोर्ट की समिति ने कहा कि यह राशि आम आदमी पार्टी के खाते से वसूल की जाए लेकिन ऐसा भी नहीं किया गया।



















