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महंगाई की मार कर रही है आपके जेब पर वार, 7.4 फीसदी से ऊपर पहुंची महंगाई दर

साल 2014 के बाद यानी जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है तब से लेकर अब तक कई सारी चीजें बदली। कई ऐतिहासिक फैसले भी हुए, कई सारे बदलाव भी हुए। कई वायदे अभी भी अधूरे हैं तो कई फैसलों का जिस परिणाम की उम्मीद थी वैसा हुआ नहीं। बस इन आठ सालों में … Read more

Retail inflation rises to 7.41% in September due to surging
Retail inflation rises to 7.41% in September due to surging food prices
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साल 2014 के बाद यानी जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है तब से लेकर अब तक कई सारी चीजें बदली। कई ऐतिहासिक फैसले भी हुए, कई सारे बदलाव भी हुए। कई वायदे अभी भी अधूरे हैं तो कई फैसलों का जिस परिणाम की उम्मीद थी वैसा हुआ नहीं। बस इन आठ सालों में अगर कुछ नहीं बदली तो महंगाई और बेरोजगारी दर। यहां तक कि पिछली कांग्रेस सरकार की तुलना में भाजपा की मोदी सरकार महंगाई को रोकने में पूरी तरह से विफल रही है। अगर एक आम जनता के नजरिये से देखा जाए तो आज कमाई चाहे जिस रफ्तार से बढ़ी हो लेकिन महंगाई की रफ्तार बुलेट ट्रेन की तरह आगे बढ़ रही है। नौकरी के नाम पर वेकैंसी न निकलने की वजह से सबसे ज्यादा परेशान देश के युवा हैं लेकिन इन सभी बातों पर परे सरकार कभी भी महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर बात नहीं करती।

देश की मोदी सरकार आंकड़ों में ऐसे खुद को पेश करती है मानो की देश के युवाओं के पास नौकरी की कमी ही नहीं है। ये जरूर है कि मोदी सरकार के आठ सालों में रोजगार में काफी बढ़ोतरी हुई है लेकिन क्या रोजगार और सरकारी नौकरी में अंतर है इस बात को समझने की जरूरत है। यह महंगाई की बातें इसलिए भी अब हो रही है क्योंकि आने वाला समय पर्व त्यौहारों वाला है। जिसको देखते हुए अभी से ही खाद्य तेल के माफिया सक्रिय हो गए हैं। भारी मात्रा में खाद्य तेल को स्टॉक कर बाजार में माल की शॉर्टेज कर दिए जाने के कारण खाद्य तेल के दामों में 2 दिनों के अंदर लगभग 20 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। जिसके कारण आने वाले त्योहार में उपभोक्ताओं के जेब ढीली होने वाली है। उपभोक्ता तेल की बढ़ती कीमतों के जानकारी मिलने से ही परेशान में हैं।

दीपावली एवं छठ के पर्व में खासकर छठ में पूर्वांचल वासियों को भारी मात्रा में खाद्य तेल की मांग होती है। लोगों को पूजा के लिए, पकवान बनाने के लिए खाद्य तेल का काफी उपयोग करना पड़ता है। जहां कुछ दिनों तक लोग तेल के दाम कम होने पर राहत महसूस कर रहे थे। लेकिन पर्व त्योहार आते ही उनकी राहत अब परेशानी का सबब बनती जा रही है। इस समय तेल का दाम बढ़ना लोगों के समझ से परे है। सरकार के द्वारा बाहर देशों से भी भारी मात्रा में तेल का आयात भी किया जा रहा है एवं ना किसी प्रकार की तेल का कमी है। ना ही कोई दाम बढ़ने का कोई कारण है। 2 दिनों में ही इतना भारी तेलों का दाम बढ़ना कहीं ना कहीं माफियाओं का सक्रिय होने का कारण है।

सिर्फ तेल ही अगर महंगाई का मुद्दा होता तो एक बात थी पर नहीं फिलहाल देश की महंगाई दर भी तो रिटेल यानी खुदरा महंगाई दर बढ़कर 7.4 फीसदी हो गई है। यह पिछले 5 महीनों में सबसे ज्यादा है. खास बात यह है कि महंगाई दर के आंकड़े केंद्रीय बैंक (RBI) के तय दायरे से लगातार 9वीं बार ऊपर है। इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) भी अगस्त में घटकर 0.8 फीसदी रही। इसमें 18 महीने बाद गिरावट देखने को मिली। इकोनॉमी के लिहाज से दोनों ही आंकड़े अच्छे नहीं है। अब जानते हैं एक्सपर्ट्स इन कमजोर आर्थिक आंकड़ों की वजह क्या रही और इसका आने वाले दिनों में किस तरह का असर पड़ेगा।

अब इन सब के बीच लोगों का ध्यान तेल पर इसलिए भी है क्योंकि सभी को पता है तेल सबसे ज्यादा यूज किया जाने वाला खाद्य पदार्थों में से है। इसलिए तेल माफियों ने आने वाले पर्व में खाद्य तेल के भारी डिमांड को देखते हुए तेल माफियाओं के द्वारा गोदाम को भर दिया गया है एवं बाजार में इसकी कमी को महसूस करा कर दाम की बढ़ोत्तरी कर दिया गया है। सोयाबीन महाकोष तेल जो लगभग 1370 रुपया प्रति पेटी 12 लीटर का हो गया था अब बढ़कर 1570 प्रति पेटी का दाम हो गया है, जिससे लोगों में काफी नाराजगी है। सरसों तेल के दामों में भी लगभग 10 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी हो गई है। हाथी सरसों तेल की कीमत जहां 141 रुपए प्रति लीटर तक बिक रही थी अब वह बढ़कर लगभग 152 प्रति लीटर हो गया है। माना तो यह भी जा रहा है कि प्रशासन तेल की कालाबाजारी नहीं रोक पा रहा है। उसकी मिलीभगत की बात कही जा रही है। थोक विक्रेताओं के गोदामों से भर्ती पड़ी है। नकली तेलों का बाजार भी काफी जोर-शोर से चल रहा है। विक्रेताओं के द्वारा नामी-गिरामी ब्रांड के नाम पर नकली तेल बाजार में बेच कर भारी मात्रा में मुनाफाखोरी कर रहे हैं।

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Author: AK

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