DW Samachar – Header
BREAKING

Ganesh Chaturthi 2026: 14 सितंबर को विराजेंगे बप्पा, जानें गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त

गणेश चतुर्थी 2026 में बप्पा की स्थापना 14 सितंबर को होगी। जानिए दिल्ली, मुंबई समेत प्रमुख शहरों का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सामग्री। Ganesh Chaturthi 2026: Puja Muhurat & Vidhi गणेश चतुर्थी 2026 कब है? गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। घरों से लेकर सार्वजनिक पंडालों तक भगवान गणेश की … Read more

Ganesh Chaturthi 2026: Puja Muhurat & Vidhi

गणेश चतुर्थी 2026 में बप्पा की स्थापना 14 सितंबर को होगी। जानिए दिल्ली, मुंबई समेत प्रमुख शहरों का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सामग्री।

Ganesh Chaturthi 2026: Puja Muhurat & Vidhi

गणेश चतुर्थी 2026 कब है?

गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। घरों से लेकर सार्वजनिक पंडालों तक भगवान गणेश की स्थापना को लेकर भक्तों में खास उत्साह देखने को मिलता है। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी का स्मरण करने की परंपरा है, क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता यानी बाधाओं को दूर करने वाला देवता माना जाता है।

Digital Women Trust

इस साल Ganesh Chaturthi 2026 का पर्व 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जाएगा। यह दिन भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ रहा है। गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा को शुभ मुहूर्त में घर या पूजा स्थल पर स्थापित किया जाता है।

गणेश उत्सव केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं है। यह परिवार, समाज और समुदाय को एक साथ जोड़ने वाला उत्सव भी है। महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात समेत देश के कई हिस्सों में गणेश चतुर्थी बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाई जाती है।

गणेश चतुर्थी 2026 की तिथि और चतुर्थी तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से गणेश चतुर्थी का पर्व शुरू होता है। इस वर्ष चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी और 15 सितंबर 2026 की सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी।

चूंकि गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना के लिए दोपहर का समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है, इसलिए प्रतिमा स्थापना के लिए सूर्योदय के बजाय मध्याह्न के शुभ समय को महत्व दिया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का जन्म दोपहर के समय हुआ था। इसलिए Ganesh Sthapana Muhurat में मध्याह्न पूजा और स्थापना का विशेष महत्व माना जाता है।

गणेश चतुर्थी 2026 की मुख्य तारीखें

  • गणेश चतुर्थी: 14 सितंबर 2026, सोमवार
  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर, सुबह 7:06 बजे
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर, सुबह 7:44 बजे
  • मुख्य गणेश विसर्जन: 25 सितंबर 2026, शुक्रवार

अलग-अलग शहरों में गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त

गणेश स्थापना का समय सभी शहरों में एक जैसा नहीं होता। सूर्योदय और स्थानीय पंचांग की गणना के आधार पर मुहूर्त में कुछ अंतर हो सकता है। दिए गए पंचांग के अनुसार प्रमुख शहरों में स्थापना का शुभ समय इस प्रकार है।

नई दिल्ली में गणेश स्थापना मुहूर्त

नई दिल्ली में 14 सितंबर 2026 को सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक भगवान गणेश की स्थापना का शुभ समय रहेगा।

मुंबई में गणेश स्थापना मुहूर्त

मुंबई में गणेश स्थापना के लिए सुबह 11:20 बजे से दोपहर 1:48 बजे तक का समय शुभ माना गया है। मुंबई में गणेश उत्सव का विशेष महत्व है और यहां हजारों सार्वजनिक मंडलों के साथ बड़ी संख्या में घरों में भी बप्पा की स्थापना होती है।

पुणे में स्थापना मुहूर्त

पुणे में गणेश स्थापना के लिए सुबह 11:16 बजे से दोपहर 1:44 बजे तक का समय दिया गया है।

कोलकाता में स्थापना मुहूर्त

कोलकाता में भक्त सुबह 10:18 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक के शुभ समय में गणेश जी की स्थापना कर सकते हैं।

स्थानीय स्तर पर मुहूर्त में अंतर संभव होने के कारण पूजा करने वाले लोग अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि भी कर सकते हैं।

गणेश जी की स्थापना से पहले क्या करें?

गणेश चतुर्थी की पूजा केवल प्रतिमा स्थापित करने तक सीमित नहीं है। स्थापना से पहले पूजा स्थल को तैयार करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल या उस स्थान की अच्छी तरह सफाई करें, जहां भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जानी है।

इसके बाद लकड़ी की चौकी रखें। चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं। पूजा स्थल पर स्वास्तिक बनाकर उसके केंद्र में अक्षत रखें।

परंपरा के अनुसार भगवान गणेश की प्रतिमा को शुभ मुहूर्त में इसी स्थान पर स्थापित किया जाता है।

गणेश स्थापना और पूजा की पूरी विधि

1. पूजा और संकल्प से शुरुआत

पूजा शुरू करने से पहले भगवान गणेश का ध्यान करें। दाहिने हाथ में थोड़ा जल, अक्षत और फूल लेकर अपने मन में व्रत और पूजा का संकल्प लें। संकल्प के बाद जल को छोड़ दें।

यह संकल्प पूजा करने वाले व्यक्ति की श्रद्धा और उद्देश्य को दर्शाता है।

2. शुभ मुहूर्त में प्रतिमा स्थापित करें

निर्धारित Ganesh Sthapana Muhurat में भगवान गणेश की प्रतिमा को चौकी पर रखे अक्षत के ऊपर स्थापित करें। इसके बाद प्रतिमा पर गंगाजल का छिड़काव करें।

भगवान गणेश का ध्यान करते हुए “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप किया जा सकता है।

3. कलश की स्थापना करें

गणेश प्रतिमा के पास तांबे का कलश रखें। कलश में जल भरकर उसमें सिक्का और सुपारी रखी जा सकती है। इसके बाद आम के पत्ते और नारियल रखकर कलश की स्थापना करें।

कलश को शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। इसलिए गणेश पूजा में कलश स्थापना की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

4. भगवान गणेश का श्रृंगार करें

भगवान गणेश को चंदन, रोली और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद मौली धागा, फूल और दूर्वा चढ़ाएं।

गणेश पूजा में 21 दूर्वा अर्पित करने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। यदि उपलब्ध हो तो लाल गुड़हल के फूल भी भगवान गणेश को अर्पित किए जा सकते हैं।

दूर्वा को गणेश जी की प्रिय वस्तुओं में माना जाता है। इसलिए पूजा के दौरान इसका विशेष महत्व रहता है।

5. दीपक और धूप जलाएं

इसके बाद घी का दीपक जलाएं और धूप अर्पित करें। पूजा स्थल पर दीपक रखने से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान गणेश को फूल और अन्य पूजा सामग्री भी अर्पित कर सकते हैं।

गणेश जी को क्या भोग लगाएं?

भगवान गणेश को मोदक विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। इसलिए गणेश चतुर्थी की पूजा में मोदक का भोग लगाने की परंपरा है।

पूजा में 21 मोदक या लड्डू का भोग लगाया जा सकता है। इसके साथ पंचमेवा, मिश्री और फल भी अर्पित किए जाते हैं।

भोग लगाते समय भगवान गणेश से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें।

भोग के बाद गणेश चतुर्थी की कथा और स्यामंतक मणि की कथा का पाठ या श्रवण किया जाता है। कथा के बाद भगवान गणेश की आरती करें।

गणेश चतुर्थी की पूजा सामग्री की पूरी सूची

Ganesh Chaturthi Puja Vidhi को पूरा करने के लिए पूजा सामग्री पहले से तैयार कर लेना बेहतर रहता है। इससे पूजा के समय किसी चीज की कमी नहीं होती।

गणेश पूजा के लिए सामान्य तौर पर इन वस्तुओं की आवश्यकता पड़ सकती है:

  • भगवान गणेश की प्रतिमा
  • गंगाजल
  • तांबे का कलश
  • नारियल
  • आम के पत्ते
  • सिक्का
  • सुपारी
  • हल्दी की गांठ
  • रोली और कुमकुम
  • चंदन
  • अक्षत
  • मौली धागा
  • फूल
  • दूर्वा घास
  • लाल गुड़हल
  • देसी घी
  • भीमसेनी कपूर
  • धूप
  • दीपक
  • पंचमेवा
  • मिश्री
  • फल
  • मोदक या लड्डू
  • आरती की थाली

पूजा सामग्री की सूची परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है।

गणेश उत्सव के दौरान कितनी बार आरती करें?

जिस दिन भगवान गणेश की स्थापना की जाती है, उसके बाद से विसर्जन तक नियमित रूप से पूजा और आरती करने की परंपरा है। घर में भगवान गणेश जितने दिन विराजमान रहें, भक्तों को सुबह और शाम दो बार आरती करने की परंपरा निभानी चाहिए।

सुबह की आरती दिन की शुरुआत भगवान के स्मरण के साथ करने का अवसर देती है, जबकि शाम की आरती पूरे परिवार को एक साथ पूजा में शामिल होने का अवसर देती है।

गणेश जी को घर का अतिथि मानकर उनकी सेवा और पूजा करने की धार्मिक भावना इस उत्सव को और विशेष बनाती है।

गणेश विसर्जन 2026 कब होगा?

गणेश चतुर्थी के बाद भगवान गणेश की प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक विदाई दी जाती है। इसे Ganesh Visarjan 2026 कहा जाता है।

इस वर्ष मुख्य विसर्जन की तिथि 25 सितंबर 2026, शुक्रवार बताई गई है। हालांकि कई परिवार अपनी परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन, सात दिन या दसवें दिन गणेश प्रतिमा का विसर्जन करते हैं।

विसर्जन के समय भगवान गणेश की आरती की जाती है और उन्हें श्रद्धापूर्वक विदाई दी जाती है। भक्त उनसे अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करते हैं।

गणेश चतुर्थी का धार्मिक और सामाजिक महत्व

गणेश चतुर्थी का महत्व केवल भगवान गणेश की पूजा तक सीमित नहीं है। यह पर्व लोगों को एक साथ आने और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर देता है।

भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक, शुभता और सफलता का देवता माना जाता है। किसी नए काम से पहले गणेश जी का स्मरण करने की परंपरा इसी विश्वास से जुड़ी है कि उनके आशीर्वाद से कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

घर में गणेश स्थापना के दौरान परिवार के सभी सदस्य पूजा में शामिल होते हैं। बच्चे भी गणेश जी की आरती, भोग और सजावट में हिस्सा लेते हैं। इस तरह यह पर्व धार्मिक संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी बनता है।

इस गणेश चतुर्थी पर इन बातों का रखें ध्यान

गणेश चतुर्थी पर पूजा करते समय सबसे जरूरी बात श्रद्धा और स्वच्छता है। पूजा स्थल को साफ रखें और पूजा सामग्री पहले से तैयार कर लें। प्रतिमा को स्थापित करते समय शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें।

यदि घर में गणेश जी की स्थापना की जा रही है तो परिवार के सदस्य अपनी सुविधा के अनुसार पूजा और आरती का समय तय कर सकते हैं। प्रतिमा की देखभाल और विसर्जन की प्रक्रिया भी सम्मानपूर्वक पूरी करनी चाहिए।

गणेश चतुर्थी का पर्व हमें यह संदेश देता है कि जीवन में किसी भी नए काम की शुरुआत सकारात्मक सोच, बुद्धि और धैर्य के साथ करनी चाहिए। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता मानकर की जाने वाली पूजा इसी भावना का प्रतीक है।

14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के अवसर पर यदि आप घर में बप्पा की स्थापना करने जा रहे हैं, तो पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें और अपने शहर के अनुसार शुभ स्थापना मुहूर्त का ध्यान रखें। विधि चाहे सरल हो या विस्तृत, सबसे महत्वपूर्ण बात भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा और विश्वास है।

AK
Author: AK

! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !

Relates News

Advertisement

Rudra enterprises - Devanshu Deepak Jehanabad
⚡ लाइव अपडेट
खबरें लोड हो रही हैं…

लेटेस्ट न्यूज़