अयोध्या चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, छह आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी, दस्तावेज, नकदी और निवेश की जांच तेज।
Ayodhya Donation Theft Case: Raids on Accused

अयोध्या चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा एक्शन, छह आरोपियों के ठिकानों पर पुलिस की छापेमारी
अयोध्या, जिसे भगवान श्रीराम की नगरी के रूप में जाना जाता है, वहां सामने आए चढ़ावा चोरी मामले ने धार्मिक संस्थानों की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मंदिरों में आने वाला चढ़ावा श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा होता है। ऐसे में अगर किसी भी स्तर पर इस धन के दुरुपयोग या चोरी की आशंका सामने आती है तो यह गंभीर विषय बन जाता है।
इसी मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों के सात अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की है। पुलिस टीमों ने आरोपियों के घरों पर पहुंचकर परिवार के सदस्यों से पूछताछ की और वित्तीय लेन-देन, संपत्ति खरीद, निवेश तथा अन्य दस्तावेजों की जांच की।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर चढ़ावे से जुड़े धन का कहीं गलत इस्तेमाल तो नहीं हुआ और आरोपियों ने अपनी नियुक्ति के दौरान कोई अवैध आर्थिक लाभ तो हासिल नहीं किया।
Ayodhya Temple Donation Theft Case | Police Intensify Probe
— Atulkrishan (@iAtulKrishan1) June 28, 2026
Police in Ayodhya on Sunday conducted searches and inquiries at the residences of all eight accused arrested in the alleged Shri Ram Janmabhoomi Temple donation theft case.
According to information, investigators are… pic.twitter.com/aN5POIW3Ps
छह आरोपियों के ठिकानों पर हुई छापेमारी
पुलिस ने खंगाले दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड
अयोध्या पुलिस की अलग-अलग टीमों ने रविवार को आरोपियों के घरों पर कार्रवाई की। यह छापेमारी क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष त्रिपाठी के निर्देशन में की गई।
पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। इनमें संपत्ति खरीद से जुड़े कागजात, निवेश संबंधी रिकॉर्ड, बैंक पासबुक, क्रेडिट और डेबिट कार्ड समेत अन्य वित्तीय दस्तावेज शामिल हैं।
हालांकि पुलिस ने अभी तक बरामद नकदी और आभूषण की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। जांच अधिकारी इन सभी दस्तावेजों का विश्लेषण कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपियों की आर्थिक गतिविधियां उनकी आय के अनुरूप थीं या नहीं।
यह कार्रवाई Ayodhya Donation Theft Case की जांच को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
VIDEO | Ayodhya: Police raid homes of eight accused in the Ram Temple donation embezzlement case.
— Press Trust of India (@PTI_News) June 28, 2026
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/oriDW37ul2
आरोपियों के वित्तीय लेन-देन की जांच
बैंक खाते और कॉल डिटेल भी खंगाली जा रही
पुलिस अब केवल बरामद दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि आरोपियों के पुराने वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ट्रस्ट में तैनाती के दौरान आरोपियों ने किन-किन क्षेत्रों में निवेश किया। इसके लिए बैंक खातों की जानकारी, संपत्ति खरीद के रिकॉर्ड और मोबाइल कॉल डिटेल की जांच की जा रही है।
पुलिस का मानना है कि वित्तीय गतिविधियों की जांच से मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध लेन-देन मिलता है तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रामशंकर यादव टिन्नू के घर पहुंची पुलिस टीम
घर से मिले निवेश और खरीद संबंधी दस्तावेज
पुलिस की एक टीम सबसे पहले अयोध्या के स्वर्गद्वार मोहल्ले में पहुंची, जहां आरोपी रामशंकर यादव टिन्नू और उसके भतीजे मनीष यादव के घरों पर तलाशी ली गई।
दोनों घर आसपास स्थित हैं। पुलिस ने परिवार के सदस्यों से पूछताछ की और घर में मौजूद दस्तावेजों की जांच की।
बताया जा रहा है कि तलाशी के दौरान निवेश और संपत्ति खरीद से संबंधित कुछ कागजात मिले हैं। पुलिस ने इन्हें जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया है।
इसके अलावा कुछ नकदी और आभूषण मिलने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
अन्य आरोपियों के घरों पर भी कार्रवाई
रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और अनुकल्प मिश्र के ठिकानों पर छापे
पुलिस ने नयाघाट स्थित रमाशंकर मिश्र के घर पर भी छापेमारी की। यहां मौजूद परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों से पूछताछ की गई।
इसके बाद कौशलपुरी कॉलोनी में पुलिस की दो अलग-अलग टीमों ने आरोपी अविनाश शुक्ल और अनुकल्प मिश्र के आवासों पर कार्रवाई की।
अनुकल्प मिश्र के घर पर मिली उसकी बहन और अन्य रिश्तेदारों से पूछताछ की गई। पुलिस ने कई दस्तावेजों को जांच के लिए जब्त किया।
वहीं, अविनाश शुक्ल के घर पर मिले उसके भाई अभिषेक शुक्ल से लंबे समय तक पूछताछ की गई। अभिषेक ने कहा कि उसे अपने भाई की गतिविधियों के बारे में जानकारी नहीं थी। उसने यह भी कहा कि यदि कोई गलत काम हुआ है तो कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।
लवकुश मिश्र के घर भी पहुंची पुलिस
परिवार से जुटाई गई जानकारी
पुलिस टीम ने एक अन्य आरोपी लवकुश मिश्र के रुदौली क्षेत्र स्थित घर पर भी छापेमारी की।
यहां पुलिस ने उसके परिवार के सदस्यों से पूछताछ की और उसकी संपत्ति से संबंधित जानकारी जुटाई।
लवकुश मिश्र के परिवार ने उसके बचाव में दावा किया कि वह निर्दोष है। परिवार का कहना है कि मामले में वास्तविक दोषियों को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है।
हालांकि पुलिस जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
अनुकल्प मिश्र के पैतृक घर की भी जांच
मिल्कीपुर स्थित घर पर हुई कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले के कथित मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्र के मिल्कीपुर क्षेत्र के बसावां गांव स्थित पैतृक घर पर भी छापेमारी की।
जब पुलिस टीम वहां पहुंची तो घर में उसके बुजुर्ग बाबा और दादी मौजूद थे। परिवार के अन्य सदस्य वहां नहीं मिले।
पुलिस ने घर की तलाशी ली और परिवार से घटना से संबंधित जानकारी ली। हालांकि तलाशी के दौरान कोई बड़ी बरामदगी होने की सूचना नहीं मिली।
पड़ोसियों से भी पूछताछ की गई ताकि आरोपी की गतिविधियों और संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।
रिटायर्ड बैंक कर्मचारी के घर पहले हो चुकी कार्रवाई
सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के घर की जांच
इस मामले में शामिल एक अन्य व्यक्ति और गणना प्रभारी रहे रिटायर्ड बैंक कर्मचारी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के घर पर पुलिस पहले ही छापेमारी कर चुकी है।
शुक्रवार को हुई इस कार्रवाई में पुलिस ने उनके देवकॉल स्थित आवास की जांच की थी। हालांकि वहां से नकदी, आभूषण या अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने नहीं आई है।
पुलिस अब सभी आरोपियों की भूमिका को अलग-अलग स्तर पर जांच रही है।
मंदिरों में चढ़ावे की सुरक्षा क्यों जरूरी?
आस्था और विश्वास से जुड़ा होता है दान
भारत में मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया चढ़ावा केवल आर्थिक संसाधन नहीं होता, बल्कि यह लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक होता है।
इसी कारण धार्मिक संस्थानों में आर्थिक पारदर्शिता बेहद जरूरी मानी जाती है। दान और चढ़ावे की राशि का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था होनी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, धार्मिक ट्रस्टों में नियमित ऑडिट, डिजिटल रिकॉर्ड और स्पष्ट जवाबदेही व्यवस्था होने से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
जांच आगे बढ़ने पर खुल सकते हैं कई राज
पुलिस की नजर वित्तीय नेटवर्क पर
Ayodhya Temple Scam से जुड़े इस मामले में पुलिस अब केवल आरोपियों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस मामले में और लोग शामिल हैं या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कथित अनियमितताओं से कितना आर्थिक लाभ प्राप्त किया गया।
आने वाले दिनों में बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति दस्तावेज और डिजिटल जानकारी के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।
निष्कर्ष
अयोध्या चढ़ावा चोरी मामला धार्मिक आस्था से जुड़े संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को सामने लाता है। पुलिस की छापेमारी और वित्तीय जांच से उम्मीद है कि मामले की वास्तविक सच्चाई सामने आएगी।
फिलहाल जांच जारी है और आरोपियों की भूमिका का पता लगाने के लिए पुलिस हर संभव जानकारी जुटा रही है। यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला केवल चोरी या आर्थिक अनियमितता का नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास से जुड़ा विषय है। इसलिए निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण है।
Author: AK
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