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China Military Parade: दो दिन बाद चीन ने फिर दिखाई सैन्य परेड से ताकत, अमेरिका को दिया कड़ा संदेश, एससीओ में भाग लेने वाले सभी नेता रुके रहे, पीएम मोदी उपस्थित नहीं हुए

China Military Parade: Strong Message to US, Modi’s Absence Sparks Debate

चीन ने बीजिंग में भव्य सैन्य परेड कर अमेरिका को संदेश दिया। एससीओ नेताओं ने भाग लिया, लेकिन पीएम मोदी की अनुपस्थिति से कूटनीतिक अटकलें तेज़।

China Military Parade: Strong Message to US, Modi’s Absence Sparks Debate

दो दिन पहले चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के उच्च स्तरीय शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए। इस सम्मेलन में चीन ने सीधे अमेरिका को एकजुटता की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद चीन ने एक बार फिर अमेरिका समेत दुनिया भर को अपनी सैन्य ताकत दिखाई है। बुधवार को चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित सैन्य परेड के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिखाई नहीं दिए। जबकि शंघाई सहयोग संगठन में शामिल होने वाले सभी नेता चीन के इस आयोजन में शामिल हुए। शंघाई शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले नेता इस परेड के लिए दो दिन चीन में रुके रहे। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी स्वदेश लौट आए। पीएम मोदी की गैर मौजूदगी से अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। चीन ने पहली बार अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए जेट लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और नवीनतम इलेक्ट्रॉनिक युद्ध हार्डवेयर सहित अपने कुछ आधुनिक हथियारों का अनावरण किया। इस मौके पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भाषण दिया। जिनपिंग ने कहा कि चीन किसी की धमकियों से नहीं डरता और हमेशा आगे बढ़ता रहता है।

उन्होंने लोगों से इतिहास को याद रखने और जापान के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले सैनिकों को सम्मान देने की अपील की। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन और ईरान, मलेशिया, म्यांमार, मंगोलिया, इंडोनेशिया, जिम्बाब्वे और मध्य एशियाई देशों के नेताओं सहित 26 विदेशी नेताओं ने इसमें भाग लिया। भारत के पड़ोसी देशों से, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू परेड में शामिल हो रहे हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन ने विदेशी मेहमानों का स्वागत किया।बीजिंग में शी, पुतिन और किम की एक साथ उपस्थिति, विशेष रूप से एक सैन्य परेड में, चीन द्वारा अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक कड़ा संदेश भेजने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है। अपने हथियारों को लेकर अक्सर गोपनीयता बरतने वाली चीनी सेना पहली बार अपने अत्याधुनिक हथियारों का भी सार्वजनिक प्रदर्शन कर रही है, जिनके बारे में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का दावा है कि वे अमेरिकी सेना के हथियारों से मेल खाते हैं। चीन और विश्व भर से बड़ी संख्या में पत्रकारों को भारी सुरक्षा के बीच आयोजित होने वाली इस परेड में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।

द्वितीय विश्व युद्ध में ‘जापानी आक्रमण’ के खिलाफ चीन की जीत की 80वीं वर्षगांठ पर आयोजित की गई परेड

द्वितीय विश्व युद्ध में ‘जापानी आक्रमण’ के खिलाफ चीन की जीत की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित परेड में सैकड़ों सैनिकों ने हिस्सा लिया। किम अपनी बेटी किम जू ए के साथ कल रात ट्रेन से बीजिंग पहुंचे। 2019 के बाद से यह उनकी दूसरी चीन यात्रा है और दोनों करीबी सहयोगियों के बीच दरार की अफवाहों के बाद यह पहली यात्रा है। बीजिंग में शी, पुतिन और किम की एक साथ उपस्थिति, विशेष रूप से एक सैन्य परेड में, चीन द्वारा अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक कड़ा संदेश भेजने के प्रयास के रूप में देखा गया।बीजिंग में उनकी बैठक तियानजिन में 10 सदस्यीय शंघाई सहयोग संगठन के उच्च स्तरीय शिखर सम्मेलन के बाद हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शी और पुतिन के साथ बैठकों का बोलबाला रहा। यह बैठक ट्रंप द्वारा रूसी तेल खरीदने पर भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की पृष्ठभूमि में हुई थी।

भारत जापान को नाराज नहीं करना चाहता था, पीएम मोदी ने दिखाई कूटनीति !

चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित भव्य परेड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिखाई नहीं दिए, जबकि शंघाई सहयोग संगठन से जुड़े अन्य सभी देशों के शीर्ष नेता इस आयोजन में शामिल हुए। मोदी की गैरमौजूदगी ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में अटकलों को जन्म दिया है।सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, पीएम मोदी ने इस परेड में हिस्सा न लेने का फैसला कूटनीतिक कारणों से लिया। माना जा रहा है कि भारत जापान जैसे अपने अहम आर्थिक और रणनीतिक साझेदार को नाराज नहीं करना चाहता था। जापान भारत के साथ रक्षा, प्रौद्योगिकी और निवेश के क्षेत्र में मजबूत साझेदार है। अगर मोदी बीजिंग में शामिल होते तो यह संदेश जा सकता था कि भारत चीन की ताकत के प्रदर्शन में उसके साथ खड़ा है, जिससे जापान के साथ संबंधों में खटास आ सकती थी।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि पीएम मोदी का यह कदम भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है। वह क्षेत्रीय संतुलन साधते हुए चीन से दूरी बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन संगठन से जुड़े सहयोग को जारी भी रखना चाहते हैं। यही वजह है कि भारत ने एससीओ की अन्य गतिविधियों में अपनी भागीदारी जारी रखी है। बीजिंग परेड में मोदी की अनुपस्थिति को चीन की शक्ति प्रदर्शन की कूटनीतिक चुनौती के संदर्भ में देखा जा रहा है।

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Author: AK

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