रवि, अप्रैल 12, 2026

Bihar News: पटना में कचरे से बनेगी बिजली और खाद, 515 करोड़ की परियोजना को मंजूरी

Patna to Produce Power & Fertilizer from Waste, ₹515 Cr Project Approved

पटना के रामाचक बैरिया में 515 करोड़ की लागत से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना शुरू होगी, जिसमें कचरे से बिजली और खाद का उत्पादन किया जाएगा।

Patna to Produce Power & Fertilizer from Waste, ₹515 Cr Project Approved


पटना में कचरे से बिजली और खाद: 515 करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी

पटना शहर और आसपास के क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड में 515 करोड़ रुपये की एक महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना के तहत पटना के रामाचक बैरिया में एक अत्याधुनिक प्लांट स्थापित किया जाएगा, जहां वैज्ञानिक तरीकों से कचरे का निस्तारण कर बिजली, बायो-मिथेन गैस और खाद का उत्पादन किया जाएगा।


परियोजना का उद्देश्य और महत्व

शहरीकरण के तेज़ी से बढ़ते प्रभाव के कारण पटना और इसके आसपास के 13 नगर निकायों में प्रतिदिन भारी मात्रा में कचरा उत्पन्न होता है। यह कचरा न केवल पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। इस परियोजना का उद्देश्य—

  • कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा करना
  • पर्यावरण प्रदूषण को कम करना
  • ऊर्जा और खाद का उत्पादन करना
  • शहर को स्वच्छ और कचरा-मुक्त बनाना

किन क्षेत्रों से आएगा कचरा?

इस प्लांट में प्रतिदिन लगभग 1600 टन कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा, जो इन 13 नगर निकायों से एकत्रित होगा:

  • पटना
  • दानापुर
  • फतुहा
  • खगौल
  • फुलवारीशरीफ
  • संपतचक
  • मनेर
  • मसौढ़ी
  • बिहटा
  • बख्तियारपुर
  • नौबतपुर
  • पुनपुन
  • खुसरूपुर

प्लांट की विशेषताएं और संयंत्रों की क्षमता

1. बिजली उत्पादन

कचरे से ऊर्जा उत्पादन के तहत 15 मेगावाट क्षमता का पावर प्लांट लगाया जाएगा। यह बिजली न केवल प्लांट के संचालन में, बल्कि राज्य के पावर ग्रिड में भी योगदान देगी।

2. बायो-मिथनेशन संयंत्र

प्रतिदिन 100 टन क्षमता का बायो-मिथनेशन संयंत्र लगाया जाएगा, जिसमें जैविक कचरे से बायोगैस तैयार होगी। इस गैस का उपयोग बिजली उत्पादन और अन्य औद्योगिक कार्यों में किया जाएगा।

3. कंपोस्ट प्लांट

700 टन प्रतिदिन क्षमता का कंपोस्ट प्लांट किसानों के लिए ऑर्गेनिक खाद तैयार करेगा, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी।

4. एमआरएफ (मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी)

  • 50 टन प्रतिदिन क्षमता का एक एमआरएफ संयंत्र
  • 250 टन प्रतिदिन क्षमता का एमआरएफ सह आरडीएफ (Refuse Derived Fuel) संयंत्र

ये संयंत्र प्लास्टिक, धातु और अन्य पुनर्नवीनीकरण योग्य सामग्रियों को अलग करेंगे।

5. सैनिटरी लैंडफिल

325 टन क्षमता का सैनिटरी लैंडफिल संयंत्र लगाया जाएगा, जहां बचा हुआ गैर-पुनर्चक्रण योग्य कचरा सुरक्षित रूप से डंप किया जाएगा।


पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ

पर्यावरणीय लाभ

  • कचरा जलाने या खुले में फेंकने की प्रथा कम होगी।
  • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी।
  • शहर में बदबू और गंदगी से राहत मिलेगी।

आर्थिक लाभ

  • स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
  • किसानों को सस्ती और प्राकृतिक खाद उपलब्ध होगी।
  • राज्य को बिजली और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री से आय होगी।

केंद्र सरकार से विशेष वित्तीय सहायता

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि देश में पहली बार केंद्र सरकार ने किसी राज्य को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए वायाविलिटी गैप फंडिंग (VGF) के तहत 154 करोड़ रुपये का अनुदान दिया है।

यदि 30% से अधिक वीजीएफ की आवश्यकता होगी, तो शेष राशि राज्य सरकार अपने विशेष ‘रिंगफेंस खाता’ से वहन करेगी। इससे परियोजना का वित्तीय बोझ राज्य पर कम होगा और कार्यान्वयन में तेजी आएगी।


स्वच्छ शहर और सतत विकास की ओर कदम

यह परियोजना सिर्फ एक कचरा निपटान योजना नहीं है, बल्कि यह स्वच्छ भारत मिशन और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके जरिए:

  • स्वच्छता में सुधार
  • पर्यावरण संरक्षण
  • ऊर्जा सुरक्षा
  • ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था में संतुलन

चुनौतियां और समाधान

हालांकि परियोजना महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं:

  • समय पर कचरा संग्रहण और परिवहन
  • प्लांट के लिए तकनीकी विशेषज्ञता
  • स्थानीय लोगों की भागीदारी और सहयोग

इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने PPP मोड को अपनाया है, जिससे निजी क्षेत्र की दक्षता और सरकारी निगरानी का संतुलन बना रहेगा।


निष्कर्ष

रामाचक बैरिया में लगने वाला यह ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट न केवल पटना और आसपास के 13 नगर निकायों की स्वच्छता में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा, बल्कि बिजली, गैस और खाद उत्पादन के जरिए इसे आत्मनिर्भर भी बनाएगा। 515 करोड़ रुपये की इस परियोजना से पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और जनता तीनों को ही लाभ मिलेगा।

यह योजना एक उदाहरण बनेगी कि कैसे सही नीति, आधुनिक तकनीक और जनसहभागिता के माध्यम से कचरे को संसाधन में बदला जा सकता है


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Author: AK

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