रवि, अप्रैल 12, 2026

बांग्ला भाषा और बंगालियों के समर्थन में सीएम ममता बनर्जी ने कोलकाता में सड़क पर उतरकर किया विरोध

CM Mamata Banerjee took to the streets in Kolkata to protest in support of Bengali language and Bengalis

महाराष्ट्र में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे मराठी भाषा को लेकर कई दिनों से उत्तर भारतीयों को परेशान किए हुए हैं। महाराष्ट्र के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी बांग्ला भाषा के समर्थन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज सड़क पर उतरी। ममता बनर्जी ने बुधवार को भाजपा शासित राज्यों में बंगाली बोलने वाले लोगों के साथ हो रहे कथित उत्पीड़न के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। बंगाल के 22 लाख प्रवासी श्रमिक देश के अन्य हिस्सों में काम कर रहे हैं, उनके पास वैध पहचान दस्तावेज हैं। ममता ने कहा कि बंगालियों के प्रति भाजपा के रवैये से मैं शर्मिंदा और निराश हूं। अब से मैंने तय किया है कि मैं बांग्ला में ज्यादा बोलूंगी। अगर आप मुझे डिटेंशन कैंप में रखना चाहते हैं तो रखें। यह रैली कोलकाता के कॉलेज स्क्वायर से धर्मतला के दोरीना क्रॉसिंग तक निकाली गई। इसमें अभिषेक बनर्जी समेत पार्टी के कई बड़े नेता इस रैली में शामिल हुए। कोलकाता के अलावा पार्टी ने राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में भी इसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया। यह ऐसे समय पर हो रहा है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य के दौरे पर आने वाले हैं।

CM Mamata Banerjee took to the streets in Kolkata to protest in support of Bengali language and Bengalis

सीएम ममता ने कहा कि मैं बंगालियों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं करूंगी। भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी लोगों को बांग्लादेशी और विदेशी कहकर प्रताड़ित और जेल और डिटेंशन कैंप में भेजा जा रहा है। क्या बंगाल देश का हिस्सा नहीं है। ‘दूसरे राज्यों में बैठकर बंगाल के वोटर का नाम काटा जा रहा है। भाजपा ऐसा कर महाराष्ट्र में चुनाव जीती। अब बिहार में ऐसा कर रही है।’ उन्होंने चुनाव आयोग पर भाजपा की दलाली करने का आरोप लगाया। वहीं ममता की रैली के बाद भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा, ‘बंगाली अस्मिता’ की बात सिर्फ अवैध घुसपैठियों को बचाने की कोशिश है। जब हजारों बंगाली शिक्षक सरकारी घोटालों के चलते नौकरी से निकाले गए, तब ममता ने उनकी आवाज क्यों नहीं सुनी। अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि ममता बनर्जी खुद बंगाली अफसरों की अनदेखी करती हैं। उन्होंने पूछा कि वरिष्ठ अफसर अत्री भट्टाचार्य और सुब्रत गुप्ता को मुख्य सचिव क्यों नहीं बनाया गया? और क्यों बंगाली आईपीएस संजय मुखोपाध्याय को डीजीपी पद से वंचित कर बाहर के अफसर को नियुक्त किया गया।

यह भी पढ़ेTRAI ने जारी किए नए सिम कार्ड Rule, अब नहीं करवाना पड़ेगा महंगा रिचार्ज, यहां देखें पूरी डिटेल्स

यह भी पढ़ेBAFTA Awards 2025:ऑल वी इमेजिन एज लाइट’ समेत 4 भारतीय फिल्मों का देखेगा BAFTA 2025 में जलवा , यहां देखें फिल्मों की लिस्ट

AK
Author: AK

! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !

Relates News