बुध, अप्रैल 15, 2026

Uttarakhand Panchayat Elections: उत्तराखंड पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट की रोक, आरक्षण विवाद बना कारण

Bihar Election 2025: Who Are Bhumihars' Political Rivals?

हाईकोर्ट ने आरक्षण विवाद के चलते उत्तराखंड पंचायत चुनाव पर रोक लगाई, सरकार को बड़ा झटका, चुनावी प्रक्रिया पर रोक का आदेश।

Uttarakhand Panchayat Elections Stayed by High Court Over Reservation Dispute


उत्तराखंड में पंचायत चुनाव पर लगी रोक: हाईकोर्ट से सरकार को झटका

उत्तराखंड में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नैनीताल हाईकोर्ट ने सोमवार को दिए एक ऐतिहासिक आदेश में आरक्षण से जुड़ी विसंगतियों को ध्यान में रखते हुए पंचायत चुनावों पर रोक लगा दी है। यह फैसला राज्य सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर तब जब चुनाव की तारीखें घोषित हो चुकी थीं और नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी।


आरक्षण विवाद बना चुनावी प्रक्रिया में रोड़ा

रोटेशन प्रणाली को दी गई थी चुनौती

उत्तराखंड में पंचायत चुनावों के तहत आरक्षण की जो रोटेशन नीति अपनाई गई थी, उसे लेकर कई याचिकाएं दायर की गई थीं। इन याचिकाओं में यह आरोप लगाया गया कि आरक्षण की अधिसूचना उचित प्रक्रिया के तहत नहीं लाई गई है और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

बागेश्वर निवासी गणेश दत्त कांडपाल और अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस प्रक्रिया को चुनौती दी थी। कोर्ट ने 23 जून को अगली सुनवाई तय की है, लेकिन तब तक के लिए चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है।


क्या कहा कोर्ट ने?

चुनावी प्रक्रिया पर पूर्ण रोक

नैनीताल हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने आरक्षण अधिसूचना की अनुपस्थिति और पारदर्शिता की कमी को गंभीरता से लेते हुए यह स्पष्ट किया कि जब तक आरक्षण से जुड़ा विवाद सुलझाया नहीं जाता, तब तक कोई भी चुनावी प्रक्रिया नहीं चलेगी। इसका मतलब है कि न तो नामांकन दाखिल होंगे और न ही चुनाव प्रचार की अनुमति दी जाएगी।


पहले घोषित की गई थी चुनावी तारीखें

10 जुलाई को होने थे चुनाव

राज्य निर्वाचन आयोग ने कुछ दिन पहले ही पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी की थी। इसमें 10 जुलाई को मतदान और 19 जुलाई को मतगणना की तिथि तय की गई थी। नामांकन की प्रक्रिया 25 जून से शुरू होनी थी और 28 जून अंतिम तिथि तय की गई थी।

चुनाव चिह्न 3 जुलाई को आवंटित होने थे

निर्वाचन आयोग के अनुसार, नामांकन पत्रों की जांच 29 जून से 1 जुलाई के बीच होनी थी। इसके बाद 3 जुलाई को प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न दिया जाना था।


राजनीतिक प्रतिक्रिया

कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

हाईकोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि अदालत ने हमारी आशंकाओं को सही ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से लागू नहीं करना चाहती थी।

वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि पार्टी कोर्ट के फैसले का सम्मान करती है और राज्य सरकार का उद्देश्य शुरू से ही चुनाव कराना था।


आदर्श आचार संहिता लागू थी

चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई थी। इसका असर पूरे प्रशासनिक तंत्र पर पड़ा था, लेकिन अब कोर्ट के आदेश से यह भी निरस्त हो गई है जब तक कि मामला सुलझ नहीं जाता।


किन जिलों में होने थे चुनाव?

उत्तराखंड के कुल 13 में से 12 जिलों में पंचायत चुनाव की योजना बनाई गई थी। इसमें देहरादून, पौड़ी, अल्मोड़ा, टिहरी, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, हरिद्वार और रुद्रप्रयाग शामिल थे।


आगे क्या?

चुनावी तैयारियों पर ब्रेक

इस फैसले के बाद निर्वाचन आयोग की पूरी चुनावी योजना पर ब्रेक लग गया है। चुनाव से जुड़े अधिकारियों, मतदाता सूचियों की समीक्षा, पोलिंग बूथ की तैयारी जैसी तमाम गतिविधियां ठप हो गई हैं।

अब सरकार को या तो हाईकोर्ट में आरक्षण अधिसूचना को वैध ठहराने के लिए सशक्त दलीलें पेश करनी होंगी या फिर नई अधिसूचना जारी करनी होगी।

उत्तराखंड पंचायत चुनाव, हाईकोर्ट फैसला, आरक्षण विवाद, चुनाव पर रोक, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव


AK
Author: AK

! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !

Relates News