
Post-Delhi Defeat, Kejriwal’s Meeting with Punjab MLAs, Ministers, and CM Today Signals New Developments
कुछ दिन पहले आम आदमी पार्टी के पास दो राज्यों पंजाब और दिल्ली में शासन हुआ करता था। लेकिन दिल्ली हार के बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल आप पूरा ध्यान पंजाब में लगाए हुए हैं। हालांकि राजनीतिक गलियारों में कई प्रकार की खबरें हैं, लेकिन अभी कहना जल्दबाजी होगी। फिलहाल पंजाब को संभाल कर रखना चाहते हैं। अरविंद केजरीवाल आज दिल्ली में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, राज्य के मंत्रियों और पार्टी विधायकों से मुलाकात करेंगे।
यह बैठक दिल्ली विधानसभा चुनावों में आप की करारी हार और पार्टी की पंजाब इकाई में बढ़ते असंतोष की अटकलों के बीच हो रही है। दिल्ली चुनाव नतीजों के तीन दिन बाद अचानक पंजाब से पार्टी के सभी विधायकों, मंत्री और मुख्यमंत्री को दिल्ली बुलाना केजरीवाल कुछ बड़ी रणनीति करने जा रहे हैं। पंजाब कांग्रेस ने दावा किया कि 35 विधायक आप छोड़ने को तैयार हैं। 30 विधायक उनके संपर्क में भी हैं। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने दावा किया था कि दिल्ली विधानसभा चुनाव हारने के बाद आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल अब पंजाब का रुख कर सकते हैं।
बाजवा ने कहा था कि आप के कई विधायक पार्टी छोड़ने को तैयार हैं। ऐसे में आप में आने वाले दिनों में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। यहां तक की प्रदेश में आप मध्यावधि चुनाव कराने के लिए भी रणनीति तैयार कर सकती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केजरीवाल लुधियाना से उपचुनाव लड़ सकते हैं। आप के एक विधायक के निधन होने से यह सीट खाली पड़ी है। नेता प्रतिपक्ष बाजवा ने कहा कि कांग्रेस एक मजबूत विपक्ष के तौर पर प्रदेश के लोगों के बीच जाकर जनाधार जुटाने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश को आज एक टिकाऊ और अच्छी सरकार की जरूरत है, जो प्रदेश के मुद्दों को केंद्र के समक्ष मजबूती से उठा सके।
बाजवा ने यहां तक कहा कि केंद्र और मान सरकार के बीच खराब रिश्तों के कारण प्रदेश को उसके हक से वंचित होना पड़ रहा है। पंजाब कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि केजरीवाल जल्द पंजाब के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। इसका संकेत पंजाब आप के प्रधान अमन अरोड़ा के किसी हिंदू के भी पंजाब का मुख्यमंत्री बनने के बयान से मिलता है। हालांकि पंजाब के आप नेताओं ने इसे संगठन की रूटीन मीटिंग करार दिया है। आप प्रवक्ता नील गर्ग ने कहा कि पार्टी की मर्जी है कि मीटिंग चंडीगढ़ में करें या फिर दिल्ली में रखें। 2027 में होने वाले पंजाब चुनावों के लिए रणनीति बनाने पर केंद्रित होगी। एक दशक तक दिल्ली की सत्ता में रही ‘आप’ को पांच फरवरी के चुनावों में बड़ा झटका लगा। ‘आप’ दिल्ली विधानसभा की 70 सीट में से केवल 22 सीट ही जीत पाई। भाजपा ने 48 सीट हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की सत्ता से ‘आप’ को बाहर कर दिया है।
ऐसे में ‘आप’ के लिए अन्य राज्यों में चुनावी संभावनाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। आप’ ने 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव में 117 में से 92 सीट जीतकर शानदार जीत हासिल की थी। हालांकि, हाल के घटनाक्रमों ने आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, कुछ लोगों का मानना है दिल्ली में पार्टी के नेतृत्व का पंजाब की सरकार पर प्रभाव बना हुआ है।
यह भी पढ़े: TRAI ने जारी किए नए सिम कार्ड Rule, अब नहीं करवाना पड़ेगा महंगा रिचार्ज, यहां देखें पूरी डिटेल्स
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !

















