शुक्र, अप्रैल 17, 2026

स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप: अस्पताल में 24 घंटे में 24 मरीजों की मौत, जान गंवाने वालों में 12 बच्चे भी शामिल, कांग्रेस ने महाराष्ट्र सरकार पर किया हमला

12 babies among 24 dead at Nanded hospital

महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में स्थित शंकरराव चव्हाण सरकारी अस्पताल में 24 घंटे के अंदर 24 मरीजों की मौत होने पर पूरे राज्य भर में हड़कंप मचा हुआ है। मरने वाले 24 मरीजों में 12 बच्चे भी शामिल हैं। उनमें से 6-7 नवजात और कुछ गर्भवती महिलाएं थीं। इन मौतों के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया। अस्पताल में 500 बेड की व्यवस्था है, लेकिन 1200 मरीज भर्ती हैं। इनमें 70 मरीजों की हालत अभी भी गंभीर है। वहीं अधिकारियों का कहना है दवाइयों की कमी के कारण सरकारी अस्पताल में मौतें हुई हैं। समय पर दवाओं की आपूर्ति नहीं होने से मरीजों की जान जा रही है। विपक्ष कांग्रेस में तमाम पार्टी के नेताओं ने महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने ‘एक्स’ के अपने आधिकारिक हैंडल के माध्यम से कहा कि मरीजों की मौत की एक वजह जरूरी दवाइयों की कमी है। यह बेहद गंभीर विषय है। इस मामले में लापरवाही बरतने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कांग्रेस ने मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

12 babies among 24 dead at Nanded hospital

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की नजर में गरीबों के जीवन की कोई कीमत नहीं है। भाजपा सरकार हजारों करोड़ रुपये अपने प्रचार पर खर्च कर देती है, मगर बच्चों की दवाइयों के लिए पैसे नहीं हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस विषय पर बोलना चाहिए। एनसीपी प्रमुख शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने इस घटना के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने एक्स पर लिखा- नांदेड़ के एक सरकारी अस्पताल में हुई मौतें कोई संयोग नहीं है। इनकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या महाराष्ट्र के लोगों की जान इतनी सस्ती हो गई है। यह देरी और लापरवाही का मामला है। इस मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। राज्य के संबंधित मंत्री का इस्तीफा भी लिया जाना चाहिए।

साथ ही सभी मृतकों के परिजनों को मुआवजा भी दिया जाना चाहिए। वहीं चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुसरिफ ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच होगी। व श्रद्धा अस्पताल के डीन एस. वाकोडे ने मीडियाकर्मियों को बताया कि छह बालक और छह बालिका शिशुओं की अलग-अलग कारणों से मौत हो गई। जबकि अन्य 12 वयस्कों की मौत हुई है, जिनमें से ज्यादातर सांप के काटने से मारे गए। उन्होंने दावा किया कि कई मरीज दूर-दूर से आए थे। अस्पताल को बजट की कमी और अन्य मुद्दों के बीच समय पर उनके लिए सही दवाएं खरीदने की समस्याओं का सामना करना पड़ा। पूर्व सीएम और नांदेड़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने कहा कि इन मौतों के अलावा, जिले के अन्य निजी अस्पतालों से रेफर किए गए अन्य 70 मरीज ‘गंभीर’ बताए गए हैं। अब आइए जानते हैं महाराष्ट्र का नांदेड जिला कहां पर स्थित है और क्यों प्रसिद्ध है।

मुंबई से नांदेड 650 किलोमीटर दूर है, सिखों का पवित्र स्थल है, गुरु गोबिंद सिंह ने आखिरी सांस यहीं ली:

1956 तक नांदेड हैदराबाद राज्य के अंतर्गत रहा, जिसके बाद यह बंबई प्रेसीडेंसी के अधीन आया और अंत में इसे महाराष्ट्र(1960) राज्य का एक स्वतंत्र जिला बनाया गया। महाराष्ट्र स्थित नांदेड राज्य का एक महत्वपूर्ण स्थल है, जो ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक रूप से काफी ज्यादा प्रसिद्ध है। नांदेड सिख धर्म के एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल भी है। गोदावरी नदी के तट पर स्थित यह शहर महाराष्ट्र के ऐतिहासिक स्थानों में भी गिना जाता है। माना जाता है कि प्राचीन समय में यहां नंद राजवंश का शासम चला करता था। तीसरी शताब्दी के दौरान नांदेड सम्राट अशोक के अंतर्गत मौर्य साम्राज्य का हिस्सा बना। गोदावरी नदी के पश्चिमी हिस्से में स्थित नांदेड़ सिखों का पवित्र स्थल भी माना जाता है, यहां तखत सचखंड तखत सचखंड श्री हजुर अबचल साहिब को समर्पित एक गुरुद्वार स्थित है, जहां देश भर से श्रद्धालुओं का आगमन होता है। यह वही स्थान है जहां महाराजा रणजीत सिंह ने वर्ष 1830 में तखत साहिब का निर्माण करवाया था। तख्त साहिब काफी बड़े हिस्से में बनवाया गया है, परिसर में दो अन्य पवित्र स्थान मौजूद हैं। यह गुरुद्वारा उस स्थान पर बनाया गया है जहां सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी आखरी सांस ली थी। यह गुरुद्वारा 1832-37 के मध्य बनवाया गया था। महाराष्ट्र का नांदेड़ शहर प्रगतिशील वर्तमान के साथ आध्यात्मिक और दार्शनिक प्राचीनता के सम्मिश्रण की एक सटीक मिसाल है। यहां आने वाले लोग इस शहर की बनावट में सिक्खों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की कृपा को सहज ही महसूस कर सकते हैं और इसीलिए यहां उनके अनुयायियों का समुंदर आ जुटता है जो इस अनुभव को पाने के लिए यहां आते हैं। इस जगह को देख कर कोई अचरज नहीं होता कि क्यों गुरु गोबिंद सिंह जी ने गोदावरी नदी के तट पर स्थित इस जगह को अपनी आखिरी संगत के लिए चुना था। नांदेड़ में ऐसे बहुत सारे गुरुद्वारे हैं जहां पूरे साल श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। मुंबई से नांदेड की 650 किलोमीटर और हैदराबाद से ढाई सौ किलोमीटर दूर है। वहीं नांदेड़ से करीबी हवाई अड्डा औरंगाबाद में है जो 253 किलोमीटर दूर है।

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Author: AK

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