PM मोदी ने 7.8% GDP ग्रोथ के बाद स्वदेशी पर जोर देते हुए गैर-जरूरी सोना, विदेश यात्रा और विदेश में शादी से बचने की अपील की।
Why PM Modi Said Avoid Gold, Foreign Weddings

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर भारत वासियों से ‘स्वदेशी’ अपनाने की जोरदार अपील की है।
पीएम मोदी ने अपने इंस्टाग्राम पर एक सेल्फी-स्टाइल रील शेयर करते हुए लोगों को भारत की 7.8 प्रतिशत की शानदार GDP (आर्थिक विकास दर) हासिल करने पर बधाई दी है। लेकिन साथ हीं पीएम ने इसी रील में दो ऐसी बातें कहीं जिन्होंने सबका ध्यान खींच लिया- ‘जरूरत न हो तो सोना न खरीदें’ और ‘विदेशों में शादी न करें’।
बता दें कि बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान रिकॉर्ड की गई इस वीडियो में पीएम मोदी ने देश के पुरुषार्थ और संकल्प शक्ति की तारीफ की। उन्होंने कहा कि रेट ग्रोथ दर वैश्विक अस्थिरता, युद्धों, संकटों और सप्लाई चैन में रुकावटों के बावजूद हासिल की गई है। लेकिन सवाल यह है कि जब देश इतनी तेज गति से आगे बढ़ रहा है, तो पीएम को सोना और विदेशी दौरों पर अंकुश लगाने की अपील क्यों करनी पड़ी? आइए समझते हैं इस ‘स्वदेशी’ दांव के पीछे की वजहें।
7.8% GDP Growth के बाद पीएम मोदी का संदेश क्या है?
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच भारत की वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी है। इसी अवधि में जीडीपी ग्रोथ 10.3 प्रतिशत रही। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9 प्रतिशत थी। यानी इस बार अर्थव्यवस्था ने ज्यादा तेज रफ्तार दिखाई है। पीएम मोदी ने इस आंकड़े को भारत की सामूहिक ताकत से जोड़ा। उन्होंने कहा,
“7.8 प्रतिशत की विकास दर देश के लोगों के संकल्प और मेहनत का नतीजा है। दुनिया में युद्ध, संकट और आपूर्ति व्यवस्था में रुकावट के बावजूद भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है।”
उनका इशारा सिर्फ आर्थिक आंकड़े की तरफ नहीं था। संदेश यह था कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत रखने के लिए सरकार के साथ आम लोगों की खरीदारी और खर्च की आदतें भी मायने रखती हैं।
आखिर Gold खरीदने से क्यों बचने को कहा पीएम ने?
पीएम मोदी ने स्वदेशी और वोकल फॉर लोकल पर जोर देते हुए कहा कि जरूरत न हो तो सोना खरीदने से बचना चाहिए। उन्होंने विदेश यात्राओं को कम करने और विदेश में शादी करने की जगह भारत में ही शादी करने की अपील भी की।
उन्होंने कहा,
“हमें स्वदेशी को बढ़ावा देना है। जरूरत न हो तो सोना न खरीदें। विदेश घूमने के बजाय देश में घूमिए और अगर शादी करनी है तो विदेश में करने के बजाय भारत में ही कीजिए।”
7.8% growth.
— Narendra Modi (@narendramodi) September 1, 2026
Strong numbers.
Even stronger confidence. pic.twitter.com/ZVPpnAXrVU
इसका सीधा मतलब यह है कि देश के भीतर होने वाला खर्च भारतीय कारोबार, पर्यटन, सेवा क्षेत्र और स्थानीय रोजगार तक पहुंचे। यानी पैसा देश की अर्थव्यवस्था के अंदर ज्यादा घूमे।
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना आयात करता है, जिसके लिए हमें बड़ी मात्रा में डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। यह ‘करंट अकाउंट डेफिसिट’ (CAD) को बढ़ाता है और रुपये को कमजोर करता है। पीएम की अपील का उद्देश्य सोने के आयात को कम करके इस दबाव को कम करना है।
विदेश यात्रा और डेस्टिनेशन वेडिंग पर क्यों फोकस?
जब भारतीय विदेश में शादी करते हैं, तो वे विदेशी मुद्रा में भारी खर्च करते हैं। यह पैसा भारत के बाहर चला जाता है। पीएम मोदी चाहते हैं कि यह पैसा देश के भीतर ही खर्च हो, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
पीएम मोदी की अपील का एक बड़ा हिस्सा देश के भीतर खर्च बढ़ाने से जुड़ा है। विदेश यात्रा पर खर्च होने वाला पैसा देश के बाहर जाता है। इसी तरह विदेश में होने वाली बड़ी शादियों में भी बड़ी रकम दूसरे देशों की होटल, पर्यटन और सेवा अर्थव्यवस्था में खर्च होती है।
इसके उलट अगर यही खर्च भारत में हो तो होटल, कैटरिंग, परिवहन, सजावट, कपड़े, पर्यटन और दूसरे स्थानीय कारोबारों को फायदा मिल सकता है। यही वजह है कि पीएम मोदी ने आर्थिक विकास के साथ रोजमर्रा के खर्च और उपभोक्ता व्यवहार को भी जोड़कर देखा।
‘स्वदेशी’ के पीछे पीएम मोदी की बड़ी सोच क्या है?
पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि भारत को अपनी आर्थिक ताकत और घरेलू मांग को लगातार मजबूत करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश के भीतर कुछ लोग निराशा फैलाने के लिए झूठ का सहारा ले रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच भारत ने 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की है।
पीएम मोदी ने कहा
“हमें इसी रफ्तार को बनाए रखना है। देश को आगे बढ़ना है तो आत्मनिर्भर भारत जरूरी है। हमारी नीति सही है और नीयत साफ है। 140 करोड़ देशवासियों की ताकत भारत को नई ऊंचाई तक ले जा सकती है।”
पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता, तेल की कीमतों के झटकों और आपूर्ति व्यवस्था के दिक्कतों के बीच भी भारत ने यह रफ्तार कायम रखी है। सरकारी आंकड़े भी बताते हैं कि पहली तिमाही में वास्तविक जीवीए 8.2 प्रतिशत बढ़ा है।
आखिर में पीएम मोदी ने इसी आर्थिक रफ्तार को आगे ले जाने का आह्वान किया। उनका संदेश साफ था-देश में उत्पादन बढ़े, स्थानीय कारोबार को ताकत मिले और लोगों का खर्च भारतीय अर्थव्यवस्था के भीतर ज्यादा घूमे। उनका दावा है कि अगर यही सोच और रफ्तार बनी रही तो 2047 तक भारत की युवा पीढ़ी को विकसित भारत सौंपने का लक्ष्य मजबूत होगा।
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !



















