सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष तेज हो गया है। रियाद में हवाई हमले का अलर्ट जारी हुआ, जबकि ईरान ने अमेरिका के सामने 7 शर्तें रखी हैं।
Saudi-Houthi Conflict Escalates

सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है. 19 सितंबर को सऊदी राजधानी रियाद में हवाई हमले का अलर्ट जारी किया गया. लोगों ने धमाकों की आवाज सुनी और किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास धुएं का गुबार भी देखा गया. सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि हूतियों की ओर से रियाद की तरफ दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को रोक दिया गया.
इस हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है. पहले से ही ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे सैन्य टकराव के बीच सऊदी-हूती संघर्ष ने एक नया मोर्चा खोल दिया है. इसका असर तेल बाजार और लाल सागर में समुद्री व्यापार पर भी पड़ने की आशंका है.
रियाद में पहली बार जारी हुआ बड़ा अलर्ट
सऊदी सिविल डिफेंस ने 19 सितंबर की सुबह रियाद और आसपास के इलाकों में हवाई हमले की चेतावनी जारी की. यह मौजूदा तनाव के दौरान राजधानी में जारी किया गया पहला बड़ा अलर्ट बताया गया.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास काले धुएं का गुबार देखा गया. कुछ इलाकों में आग लगने की भी सूचना सामने आई. हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों में नुकसान की पूरी जानकारी स्पष्ट नहीं थी.
सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने कहा कि हूतियों ने रियाद की ओर बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी, जिसे सऊदी वायु रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया.
सऊदी अधिकारियों ने दावा किया कि हूतियों ने यानबू, ताइफ, बीशा और फरासन समेत कई इलाकों में भी हमले की कोशिश की. सऊदी पक्ष के मुताबिक, इन हमलों को नाकाम कर दिया गया.
हूतियों ने क्या कहा?
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया कि संगठन ने रियाद और यानबू में कई संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाया. हूतियों के मुताबिक, इन हमलों में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया.
हूतियों ने इन हमलों को यमन में सऊदी कार्रवाई का जवाब बताया है. संगठन का कहना है कि जब तक लाल सागर में उसके खिलाफ लगाए गए प्रतिबंध और सैन्य कार्रवाई खत्म नहीं होती, तब तक वह जवाबी हमले जारी रखेगा.
हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से किए गए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
यमन में भी तेज हुई लड़ाई
सऊदी अरब और हूतियों के बीच पिछले कुछ दिनों से हवाई हमले और जवाबी कार्रवाई तेज हुई है. हूतियों ने दावा किया है कि सऊदी अरब ने यमन के उनके नियंत्रण वाले इलाकों में बड़ी संख्या में हवाई हमले किए.
हूती अधिकारियों के मुताबिक, 18 सितंबर को 24 घंटे के दौरान 26 हवाई हमले किए गए. संगठन ने पिछले एक सप्ताह में सऊदी हमलों की संख्या 300 तक पहुंचने का दावा किया है.
दूसरी ओर, सऊदी समर्थित यमनी सरकार की सेनाओं ने भी हूती लड़ाकों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी है. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर नागरिक इलाकों को निशाना बनाने का आरोप लगा रहे हैं.
बाब-अल-मंदेब पर बढ़ी चिंता
इस संघर्ष का असर केवल जमीन तक सीमित नहीं है. लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है.
बाब-अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. यूरोप और एशिया के बीच होने वाले व्यापार के लिए यह रास्ता बेहद अहम है.
अगर यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो तेल, गैस और अन्य सामान की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई पर असर पड़ सकता है. जहाजों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ सकता है, जिससे परिवहन लागत भी बढ़ सकती है.
यही वजह है कि Saudi Arabia Houthi Conflict का असर अब वैश्विक बाजारों पर भी देखा जा रहा है.
तेल की कीमतों पर भी असर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच तेल बाजार पर भी नजर बनी हुई है. क्षेत्र में एक साथ कई रणनीतिक समुद्री रास्तों पर दबाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है.
ब्रेंट क्रूड की कीमतें हाल के दिनों में 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुकी हैं. बाजार में आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान-अमेरिका तनाव, लाल सागर की स्थिति और क्षेत्रीय सैन्य कार्रवाई किस तरह आगे बढ़ती है.
तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने पर इसका असर पेट्रोल-डीजल से लेकर परिवहन और महंगाई तक पर पड़ सकता है.
ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 7 शर्तें
इसी बीच ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए सात शर्तें रखी हैं. ईरान के सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रजाई के मुताबिक, इन शर्तों को मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है.
ईरान ने जिन प्रमुख मांगों का जिक्र किया है, उनमें युद्ध को सभी मोर्चों पर खत्म करना, अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना और ईरान की फ्रीज की गई धनराशि जारी करना शामिल है.
ईरान की ओर से कहा गया है कि इन मुद्दों पर समाधान के बिना बातचीत आगे बढ़ाना मुश्किल होगा.
हालांकि, ईरान की ओर से सभी सात शर्तों की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की गई है.
۷ شرط ایران برای آغاز هر مذاکرهای به دولت آمریکا اعلام شده است. پیام تهران روشن و بدون ابهام است؛ اگر واشنگتن میخواهد از مخمصهای که خود ساخته خارج شود و بیش از این در آن گرفتار نشود، راهی جز پذیرش حقوق و شروط ایران ندارد.
— محسن رضایی (@ir_rezaee) September 19, 2026
अमेरिका की भूमिका पर नजर
सऊदी-हूती संघर्ष के बीच अमेरिका की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है. अमेरिका लंबे समय से सऊदी अरब का सुरक्षा साझेदार रहा है.
हाल के घटनाक्रम के बाद अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और निगरानी बढ़ाई है. अमेरिकी अधिकारियों ने सऊदी नेतृत्व के साथ सुरक्षा सहयोग को लेकर भी बातचीत की है.
अमेरिका के सामने एक तरफ सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताएं हैं, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ चल रही बातचीत की संभावना भी है. ऐसे में वॉशिंगटन के अगले कदम पर क्षेत्र के कई देशों की नजर है.
चीन ने भी ईरान से की अपील
इस बीच चीन ने भी ईरान से हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने और क्षेत्र में तनाव कम करने की अपील की है.
क्षेत्रीय देशों की कोशिश है कि संघर्ष सऊदी अरब और यमन की सीमा से आगे न फैले. लेकिन लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है.
यमन में बढ़ रहा मानवीय संकट
इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ रहा है. यमन पहले से ही लंबे समय से युद्ध और मानवीय संकट से जूझ रहा है.
नई लड़ाई के कारण बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापित होने की खबरें हैं. कई इलाकों में लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है.
संयुक्त राष्ट्र लगातार दोनों पक्षों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और मानवीय सहायता पहुंचाने का रास्ता खुला रखने की अपील कर रहा है.
आगे क्या होगा?
फिलहाल सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा है. रियाद में हवाई हमले का अलर्ट और यमन में लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है.
दूसरी ओर, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की संभावनाएं भी बनी हुई हैं. अगर दोनों देशों के बीच कोई समझौता होता है तो इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है.
लेकिन अगर सैन्य कार्रवाई बढ़ती है और लाल सागर या बाब-अल-मंदेब में समुद्री यातायात प्रभावित होता है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा.
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर रियाद, सना और तेहरान पर है. आने वाले दिनों में सऊदी अरब की जवाबी कार्रवाई, हूतियों की अगली रणनीति और ईरान-अमेरिका के बीच बातचीत यह तय करेगी कि यह संघर्ष कितना आगे बढ़ता है.
Author: AK
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