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Weather Update: गर्मी के कहर के बीच राहत – 2025 में सामान्य से अधिक मानसून का पूर्वानुमान, किसानों को बड़ी उम्मीद

IMD Forecasts Above-Normal Monsoon for 2025, Bringing Major Relief to Farmers Amid Rising Heat

मौसम विभाग ने 2025 में 105% बारिश का अनुमान जताया है, जो भीषण गर्मी के बीच किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए राहत की खबर है।

IMD Forecasts Above-Normal Monsoon for 2025, Bringing Major Relief to Farmers Amid Rising Heat

मौसम विभाग का अनुमान: सामान्य से बेहतर रहेगा मानसून
देश में गर्मी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। अप्रैल से जून के बीच कई हिस्सों में हीटवेव की स्थिति बन रही है। इस बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मानसून को लेकर राहत भरी खबर दी है।
आईएमडी के अनुसार, इस साल जून से सितंबर के बीच देशभर में 105% बारिश होने की संभावना है। 87 सेंटीमीटर वर्षा को सामान्य माना जाता है, और 104% से 110% के बीच की वर्षा को सामान्य से अधिक श्रेणी में रखा जाता है।

खेती के लिए वरदान साबित होगा अच्छा मानसून
भारत की लगभग 70% खेती मानसूनी बारिश पर निर्भर है। फसल उत्पादन, सिंचाई और किसानों की आय मानसून की स्थिति से प्रभावित होती है। अच्छी बारिश का सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है, जिससे खाद्य आपूर्ति बनी रहती है और महंगाई पर नियंत्रण रहता है।
भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 20% है। साथ ही, देश की 42.3% आबादी की आजीविका भी कृषि पर निर्भर करती है।

जलवायु संकेत कर रहे हैं सकारात्मक इशारा
मौसम विभाग ने बताया कि फिलहाल प्रशांत महासागर में ENSO (एल नीनो-संबंधित) स्थितियां सामान्य हैं, लेकिन वातावरण में ला-नीना जैसी प्रवृत्तियां दिखाई दे रही हैं।
हिंद महासागर में भी इंडियन ओशन डाइपोल की स्थिति संतुलित बनी हुई है, जिससे मानसून को समर्थन मिल सकता है।

उत्तराखंड समेत पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश की आशंका
आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तराखंड में इस बार सामान्य से अधिक वर्षा की संभावना है। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश के कई दौर हो सकते हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
हालांकि, मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि मई के अंत में मानसून की अधिक सटीक जानकारी दी जाएगी।

मानसून में बदलाव की चेतावनी भी
जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश की प्रकृति बदल रही है। अब बारिश के दिन कम हो रहे हैं, लेकिन कम समय में अधिक वर्षा यानी ‘एक्सट्रीम रेनफॉल’ की घटनाएं बढ़ रही हैं।
इससे कई बार सूखे और बाढ़ दोनों की स्थिति बन जाती है। यही कारण है कि समय रहते जलवायु के अनुसार कृषि योजनाएं बनाना जरूरी हो गया है।

निष्कर्ष
2025 में मानसून के सामान्य से बेहतर रहने का अनुमान भारत के किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए सुखद संकेत है। अच्छी बारिश जहां खेती को संबल देगी, वहीं जल संकट और बिजली की मांग को संतुलित करने में भी मददगार साबित हो सकती है।

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AK
Author: AK

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