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Vice Presidential Election Announced for 9 September: चुनाव आयोग ने किया एलान, 9 सितंबर को होगा उपराष्ट्रपति का चुनाव

Vice Presidential Election Announced for 9 September

चुनाव आयोग ने उपराष्ट्रपति पद के लिए 9 सितंबर को चुनाव की घोषणा की है। जानें प्रक्रिया, नियम और नामांकन की पूरी जानकारी।

Vice Presidential Election Announced for 9 September


भूमिका: क्यों अहम है उपराष्ट्रपति पद का चुनाव

भारत का उपराष्ट्रपति पद संवैधानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति होने के साथ-साथ राष्ट्रपति के अनुपस्थित रहने की स्थिति में कार्यवाहक राष्ट्रपति का दायित्व निभाते हैं। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के हालिया इस्तीफे के बाद यह पद खाली हो गया है, और अब चुनाव आयोग ने 9 सितंबर 2025 को इस पद के लिए चुनाव कराने की घोषणा की है। इस लेख में हम समझेंगे कि उपराष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है, इसके लिए कौन पात्र होता है, और इस प्रक्रिया से जुड़े नियम क्या हैं।


उपराष्ट्रपति पद रिक्त होने का कारण

22 जुलाई 2025 को जगदीप धनखड़ ने निजी कारणों से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद यह पद रिक्त हो गया, और संविधान के अनुसार, रिक्ति के छह महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है। इसीलिए चुनाव आयोग ने 9 सितंबर की तारीख तय की है।


चुनाव कार्यक्रम की रूपरेखा

चुनाव आयोग की घोषणा

चुनाव आयोग ने शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उपराष्ट्रपति चुनाव की तिथि घोषित की।

मुख्य तिथियाँ इस प्रकार हैं:

  • अधिसूचना जारी होने की तिथि: 7 अगस्त 2025
  • नामांकन की अंतिम तिथि: 21 अगस्त 2025
  • मतदान एवं परिणाम की तिथि: 9 सितंबर 2025

मतदान संसद भवन परिसर में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होगा और उसी दिन शाम को मतगणना के बाद परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।


उपराष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है?

संविधानिक आधार

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66(1) के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है जिसमें केवल संसद के सदस्य ही शामिल होते हैं। यह चुनाव गुप्त मतपत्र द्वारा अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation by Single Transferable Vote) के माध्यम से संपन्न होता है।

निर्वाचक मंडल में शामिल होते हैं:

  • लोकसभा के निर्वाचित सदस्य
  • राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य
  • राज्यसभा के मनोनीत सदस्य

इसमें राज्य विधानसभाओं की कोई भूमिका नहीं होती।


नामांकन की प्रक्रिया और शर्तें

कौन बन सकता है उपराष्ट्रपति?

उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को कुछ आवश्यक योग्यताओं को पूरा करना होता है:

  1. भारत का नागरिक होना चाहिए
  2. आयु कम से कम 35 वर्ष होनी चाहिए
  3. राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए पात्र होना चाहिए
  4. लाभ के किसी पद पर कार्यरत न हो (सरकारी नौकरी आदि में नहीं होना चाहिए)

नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया

  • उम्मीदवार को अपने नामांकन पत्र के साथ कम से कम 20 प्रस्तावकों और 20 अनुमोदकों के हस्ताक्षर देने होते हैं।
  • इसके अलावा ₹15,000 की सुरक्षा जमा राशि भी निर्वाचन आयोग में जमा करनी होती है।
  • आयोग द्वारा नामांकन पत्रों की जांच 22 अगस्त को की जाएगी, और वैध नामांकनों की अंतिम सूची प्रकाशित होगी।

चुनाव की निगरानी और निष्पक्षता

निर्वाचन आयोग की भूमिका

चुनाव आयोग भारत सरकार से स्वतंत्र एक संवैधानिक संस्था है। अनुच्छेद 324 के अंतर्गत यह चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए उत्तरदायी होता है। उपराष्ट्रपति चुनाव की व्यवस्था और संचालन चुनाव आयोग की निगरानी में होता है।

2025 के चुनाव को लेकर आयोग ने बताया कि निर्वाचक मंडल की सूची को अंतिम रूप दे दिया गया है। यह सूची अल्फाबेटिकल क्रम में तैयार की गई है, जिसमें सभी संसद सदस्यों के नाम, सदन और राज्य के अनुसार शामिल किए गए हैं।


पिछले उपराष्ट्रपति चुनावों पर एक दृष्टि

भारत में उपराष्ट्रपति का चुनाव हर पांच साल में होता है या जब भी यह पद रिक्त हो जाए। उदाहरण के तौर पर:

  • 2017: एम. वेंकैया नायडू निर्वाचित हुए थे
  • 2022: जगदीप धनखड़ ने भारी मतों से जीत दर्ज की थी

इन चुनावों में आम तौर पर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक पार्टियों की ताकत का भी परोक्ष रूप से आकलन होता है क्योंकि सांसदों के समर्थन का महत्व होता है।


संभावित उम्मीदवार और सियासी समीकरण

हालांकि अभी तक किसी दल ने औपचारिक रूप से अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों दोनों ओर से प्रभावशाली नाम सामने आ सकते हैं। चूंकि संसद में संख्या बल का सीधा असर चुनाव पर होता है, इसलिए यह देखना रोचक होगा कि कौन-सा गुट एकजुट होकर मजबूत उम्मीदवार को आगे करता है।


निष्कर्ष: लोकतंत्र की गरिमा का प्रतीक है यह चुनाव

उपराष्ट्रपति का चुनाव केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और पारदर्शिता को दर्शाता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से न केवल योग्य व्यक्तियों को उच्च संवैधानिक पदों पर नियुक्त किया जाता है, बल्कि संसद के सदस्यों की नैतिक जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों की पुष्टि भी होती है।

9 सितंबर को होने वाला यह चुनाव न सिर्फ एक पद भरने की कवायद है, बल्कि यह भारत के लोकतंत्र की एक और परीक्षा है, जिसमें निष्पक्षता, पारदर्शिता और संस्थागत विश्वसनीयता की पुष्टि होनी है।


मुख्य बातें (संक्षेप में):

  • उपराष्ट्रपति पद के लिए 9 सितंबर को होगा चुनाव
  • अधिसूचना 7 अगस्त को जारी होगी, नामांकन की अंतिम तिथि 21 अगस्त है
  • केवल संसद के सदस्य ही वोट देंगे
  • चुनाव आयोग ने प्रक्रिया और नियम जारी किए
  • उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकतांत्रिक मूल्यों की अभिव्यक्ति है

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Author: AK

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