भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में मिली फांसी की सजा रद्द। धर्मगुरुओं की मीटिंग और बेटी की अपील के बाद पलटा गया फैसला।
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यमन में भारतीय नर्स निमिषा को नहीं होगी मौत की सजा
भावनात्मक अपील और धार्मिक संवाद ने पलटा फैसला
यमन में वर्ष 2018 से जेल में बंद भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को मिली मौत की सजा अब रद्द कर दी गई है। यह फैसला यमन की राजधानी सना में हुई एक उच्च स्तरीय धार्मिक बैठक के बाद सामने आया है।
भारत की ओर से ग्रैंड मुफ्ती कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार के नेतृत्व में हुई पहल और निमिषा की बेटी मिशेल की भावुक अपील ने इस मामले में बड़ा मोड़ ला दिया है। हालांकि भारत सरकार या यमन सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक घोषणा अब तक नहीं हुई है, फिर भी धर्मगुरुओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, अब निमिषा की जान बच गई है।
कौन हैं निमिषा प्रिया?
रोजगार की तलाश में यमन गई थीं
केरल की रहने वाली निमिषा प्रिया एक प्रशिक्षित नर्स हैं जो बेहतर रोजगार के अवसरों की तलाश में यमन गई थीं। यमन पहुंचने के बाद उन्होंने एक स्थानीय नागरिक के साथ मिलकर मेडिकल क्लिनिक शुरू किया।
कुछ समय बाद निमिषा ने शिकायत की कि उस स्थानीय व्यक्ति ने धोखे से उनके क्लिनिक और कमाई पर कब्जा कर लिया। इसी दौरान एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी, जिसमें उस नागरिक की मौत हो गई।
हत्या का आरोप और सजा
2018 में शुरू हुआ था कानूनी संघर्ष
जून 2018 में यमन की अदालत ने निमिषा प्रिया को हत्या के आरोप में दोषी ठहराया। उन पर आरोप लगा कि उन्होंने अपने साझेदार को बेहोश करने के लिए इंजेक्शन दिया, लेकिन ओवरडोज के कारण उसकी मृत्यु हो गई।
यमन की कानून प्रणाली में हत्या के लिए फांसी की सजा दी जाती है और निमिषा को भी ऐसा ही दंड सुनाया गया। 16 जुलाई 2025 को फांसी होनी थी, लेकिन 15 जुलाई को सजा अस्थाई रूप से टाल दी गई थी।
बेटी मिशेल की अपील ने बदली कहानी
भावनात्मक वीडियो ने दिलों को छुआ
निमिषा की 13 वर्षीय बेटी मिशेल, अपने पिता और एक शांति दूत के साथ यमन पहुंची थी। मिशेल ने वहां के अधिकारियों से अपनी मां की रिहाई की भावुक अपील की।
उसका एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वह मलयालम और अंग्रेजी में कहती है,
“मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं मम्मी। कृपया मेरी मां को घर वापस लाने में मदद करें, मैं उनसे मिलना चाहती हूं। आई मिस यू मम्मी।”
इस वीडियो ने न केवल सोशल मीडिया पर सहानुभूति बटोरी, बल्कि यमन में भी उच्च अधिकारियों और धार्मिक संस्थाओं का ध्यान खींचा।
धर्मगुरुओं की पहल से मिला समाधान
भारतीय ग्रैंड मुफ्ती की अहम भूमिका
भारत के ग्रैंड मुफ्ती कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार और यमन के प्रमुख धार्मिक नेताओं के बीच सना में हुई एक हाई लेवल मीटिंग में यह मुद्दा उठाया गया।
सूत्रों के मुताबिक, इस मीटिंग में आपसी संवाद, धार्मिक सहानुभूति और बेटी की अपील को ध्यान में रखते हुए निमिषा की मौत की सजा रद्द करने का निर्णय लिया गया।
यह निर्णय आधिकारिक तौर पर भले ही अभी सार्वजनिक न हो, लेकिन अबूबकर मुसलियार के कार्यालय ने इसकी पुष्टि कर दी है।
अब आगे क्या?
कानूनी प्रक्रिया और संभावित रिहाई
हालांकि सजा रद्द कर दी गई है, निमिषा को यमन की जेल से रिहा किए जाने में अभी समय लग सकता है। इस बीच भारत सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, जो अब निमिषा की वापसी और कानूनी औपचारिकताओं में मदद कर सकती है।
वहीं, यह उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही भारत सरकार और यमन सरकार की ओर से इस मामले में औपचारिक बयान जारी किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुआ था प्रयास
ईसाई प्रचारक, मानवाधिकार संगठनों की कोशिशें
इस मामले को लेकर ईसाई प्रचारक केए पॉल, मानवाधिकार कार्यकर्ता और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी लगातार यमन सरकार पर दबाव बनाया।
पॉल ने मिशेल की अपील वाला वीडियो जारी कर यह संदेश दिया कि एक निर्दोष बच्ची अपनी मां से मिलने के लिए तरस रही है। यह भावनात्मक अपील कई मंचों पर उठी और अंततः यमन की संवेदनशीलता को झकझोर गई।
सामाजिक संदेश और सीख
कूटनीति और करुणा से बदल सकते हैं फैसले
निमिषा प्रिया का मामला यह दर्शाता है कि मानवता, भावनात्मक अपील और धार्मिक संवाद से किसी भी गंभीर स्थिति में भी समाधान खोजा जा सकता है।
यह एक दृष्टांत है भारतीय सामाजिक चेतना का, जहां एक मां की जिंदगी बचाने के लिए धर्म, समाज, परिवार और बेटी सभी ने मिलकर प्रयास किया।
निष्कर्ष
निमिषा प्रिया की कहानी केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि एक मां और बेटी के रिश्ते, एक सामाजिक प्रयास और धार्मिक समन्वय की मिसाल है।
जहां एक ओर कानून ने अपने अनुसार सजा दी, वहीं दूसरी ओर करुणा, संवाद और प्रेम ने उसे टाल दिया। अब सभी की नजरें निमिषा की रिहाई और सुरक्षित वापसी पर टिकी हैं।
यह घटना दर्शाती है कि सजा से बड़ा होता है क्षमा और समझ, और सही वक्त पर की गई पहल किसी की जिंदगी बचा सकती है।
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Author: AK
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