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Nepal Glacier Collapse Caught on Camera: कैमरे में कैद हुआ ग्लेशियर टूटने का खौफनाक मंजर, कुछ ही मिनटों में मच गई तबाही – देखें ग्लेशियर टूटने का पूरा VIDEO

नेपाल में ग्लेशियर टूटने से आई तबाही में सैकड़ों लोगों की मौत हुई। कैमरे में कैद वीडियो से हादसे की शुरुआत का खौफनाक मंजर सामने आया। Nepal Glacier Collapse Caught on Camera कैमरे में कैद हुआ ग्लेशियर टूटने का खौफनाक मंजर नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने बड़े पैमाने पर तबाही … Read more

Nepal Glacier Collapse Caught on Camera

नेपाल में ग्लेशियर टूटने से आई तबाही में सैकड़ों लोगों की मौत हुई। कैमरे में कैद वीडियो से हादसे की शुरुआत का खौफनाक मंजर सामने आया।

Nepal Glacier Collapse Caught on Camera

कैमरे में कैद हुआ ग्लेशियर टूटने का खौफनाक मंजर

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। ग्लेशियर टूटने के बाद बर्फ, चट्टानों और मलबे का तेज बहाव पहाड़ी इलाकों से नीचे आया और नेपाल-चीन सीमा के आसपास के क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में सैकड़ों लोगों की मौत की खबर है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

अब इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि वीडियो में ग्लेशियर के टूटने का वह मंजर रिकॉर्ड हुआ है, जिसके बाद यह पूरी तबाही शुरू हुई। वीडियो में ऊंचे पहाड़ी इलाके में बर्फ का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिरता दिखाई देता है।

यह वीडियो चीन के शिजैंग स्वायत्त क्षेत्र के गिरोंग काउंटी में एक पर्यटक द्वारा बनाया जा रहा था। पर्यटक पहाड़ी इलाके की वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था। इसी दौरान कैमरे में ग्लेशियर के टूटने की घटना भी कैद हो गई।

कैसे शुरू हुई पूरी तबाही?

ऊंचाई वाले इलाके में टूटा ग्लेशियर

बताया जा रहा है कि ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा करीब 5,140 मीटर की ऊंचाई पर टूटकर नीचे गिरा। ग्लेशियर के टूटने के साथ बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मिट्टी पहाड़ से नीचे की ओर बहने लगी।

पहाड़ी इलाके में नीचे आते समय इस मलबे ने अपने रास्ते में मौजूद बर्फ, पत्थर और मिट्टी को भी अपने साथ मिला लिया। धीरे-धीरे यह एक बड़े और बेहद तेज मलबे के बहाव में बदल गया।

यह बहाव इतना तेज था कि लोगों को संभलने या सुरक्षित जगह पर पहुंचने का ज्यादा समय नहीं मिला।

बताया जा रहा है कि मलबे का यह बहाव करीब 20 किलोमीटर तक आगे बढ़ा। इस दौरान करीब 3,300 मीटर की ऊंचाई का अंतर तय किया गया।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरा बहाव कुछ ही मिनटों में नीचे के इलाके तक पहुंच गया।

सात मिनट में पहुंचा मलबा

ग्लेशियर टूटने के बाद मलबे और पानी का तेज बहाव पहाड़ी घाटियों से नीचे की ओर बढ़ा। रिपोर्टों के अनुसार, इसे गिरोंग पोर्ट तक पहुंचने में करीब सात मिनट का समय लगा।

इतने कम समय में इतनी बड़ी मात्रा में मलबा नीचे पहुंचने से वहां मौजूद लोगों को बचने का बहुत कम मौका मिला।

मलबे के साथ बड़े-बड़े पत्थर, बर्फ, मिट्टी और पानी नीचे की ओर आए। इसकी चपेट में सड़कें, पुल, इमारतें और दूसरी जरूरी सुविधाएं आ गईं।

गिरोंग पोर्ट के आसपास के इलाके में कई जगह भारी नुकसान हुआ। इस घटना के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने और लापता लोगों की तलाश का काम शुरू किया गया।

सामने आया ग्लेशियर टूटने का वीडियो

Glacier Collapse Video सामने आने के बाद इस हादसे को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। वीडियो में पहाड़ी इलाके में बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटता हुआ नजर आता है।

वीडियो को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना आपदा की शुरुआत को समझने में मदद कर सकती है। वीडियो में दिखाई देने वाले स्थान की तुलना उपग्रह तस्वीरों और दूसरे उपलब्ध आंकड़ों से की जा रही है।

अगर वीडियो में दिखाई देने वाली जगह की पुष्टि होती है, तो इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि ग्लेशियर किस स्थान पर टूटा और उसके बाद मलबा किस रास्ते से नीचे आया।

नेपाल में भारी तबाही

ग्लेशियर टूटने के बाद आई इस आपदा का असर नेपाल के कई इलाकों में देखने को मिला। भारी मलबे और पानी के बहाव ने लोगों के घरों और दूसरी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया।

कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए। कुछ जगहों पर संपर्क पूरी तरह टूट गया। पहाड़ी इलाकों में सड़क और पुल टूटने से राहत और बचाव दलों के लिए प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया।

इस हादसे के बाद बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार के सदस्यों को खोज रहे हैं। कई परिवारों को अभी तक अपने लोगों के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है।

चीन की तरफ भी पहुंचा असर

नेपाल में शुरू हुई इस प्राकृतिक आपदा का असर चीन की तरफ भी देखने को मिला। मलबे का तेज बहाव सीमा पार गिरोंग पोर्ट के इलाके तक पहुंच गया।

Gyirong Port चीन और नेपाल के बीच महत्वपूर्ण सीमा व्यापार केंद्रों में से एक है। आपदा के कारण यहां भी सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा।

मलबे और पानी ने कई इलाकों को पूरी तरह ढक दिया। अचानक आए इस बहाव के कारण स्थानीय लोगों और अधिकारियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई।

राहत और बचाव अभियान जारी

हादसे के बाद नेपाल और चीन दोनों तरफ राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। बचाव दल लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं।

हालांकि पहाड़ी इलाकों में राहत कार्य आसान नहीं है। कई स्थानों पर सड़कें टूट गई हैं और रास्तों पर भारी मात्रा में मलबा जमा है।

इसके अलावा लगातार बदलता मौसम भी बचाव अभियान के लिए चुनौती बना हुआ है। अधिकारियों को डर है कि कुछ अन्य कमजोर पहाड़ी हिस्सों में भी भूस्खलन या अचानक मलबे का बहाव हो सकता है।

बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का काम कर रहे हैं। साथ ही लापता लोगों की तलाश भी जारी है।

क्यों खतरनाक होते हैं हिमालयी ग्लेशियर?

तेजी से बदल रहा है पहाड़ी वातावरण

हिमालयी क्षेत्र में हजारों ग्लेशियर मौजूद हैं। इन ग्लेशियरों से निकलने वाला पानी कई बड़ी नदियों का स्रोत है।

ग्लेशियर के टूटने या उसके आसपास जमा पानी अचानक नीचे आने पर बाढ़ और मलबे का तेज बहाव पैदा हो सकता है। पहाड़ों की ढलान और संकरी घाटियों के कारण ऐसे बहाव की गति बहुत ज्यादा हो सकती है।

इसी वजह से हिमालयी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए ग्लेशियर और अचानक आने वाली बाढ़ बड़ा खतरा बन सकते हैं।

Climate Change को लेकर भी चिंता

नेपाल Glacier Collapse की घटना के बाद हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

पिछले कुछ वर्षों में हिमालय के कई ग्लेशियरों में बदलाव देखने को मिला है। तापमान बढ़ने के कारण ग्लेशियरों के पिघलने की गति और उनके आसपास बनने वाली झीलों को लेकर वैज्ञानिक लगातार चिंता जताते रहे हैं।

हालांकि किसी एक घटना को केवल जलवायु परिवर्तन से जोड़ना सही नहीं होगा। ग्लेशियर टूटने के पीछे कई प्राकृतिक कारण हो सकते हैं। इनमें बर्फ की स्थिति, पहाड़ों की मजबूती, बारिश, तापमान और भूगर्भीय गतिविधियां शामिल हैं।

फिर भी इस तरह की घटनाएं हिमालयी क्षेत्रों में बेहतर निगरानी और आपदा तैयारी की जरूरत को जरूर सामने लाती हैं।

लोगों के लिए बड़ी चेतावनी

नेपाल में हुई इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक आपदा कितनी तेजी से बड़ी तबाही में बदल सकती है।

एक ग्लेशियर के टूटने से शुरू हुई घटना कुछ ही मिनटों में कई किलोमीटर दूर तक पहुंच गई। लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए बहुत कम समय मिला।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे इलाकों में समय रहते चेतावनी देने की व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है। ग्लेशियरों और पहाड़ी झीलों की लगातार निगरानी से खतरे का पहले पता लगाया जा सकता है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल राहत और बचाव अभियान सबसे बड़ी प्राथमिकता है। लापता लोगों की तलाश की जा रही है और प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने की कोशिश जारी है।

इसके साथ ही वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि ग्लेशियर किस वजह से टूटा और इतनी बड़ी मात्रा में मलबा इतनी तेजी से नीचे कैसे पहुंचा।

सामने आया वीडियो इस जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे आपदा की शुरुआत और उसके बाद मलबे के बहाव को समझने में मदद मिल सकती है।

नेपाल और चीन के लिए यह घटना एक बड़ी प्राकृतिक आपदा है, लेकिन इसके साथ ही यह हिमालयी क्षेत्रों में बेहतर आपदा प्रबंधन और निगरानी की जरूरत की भी याद दिलाती है।

फिलहाल लोगों की नजर राहत और बचाव अभियान पर है। लापता लोगों की तलाश जारी है और आने वाले दिनों में इस आपदा से जुड़े नुकसान और प्रभावित लोगों की संख्या की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

AK
Author: AK

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