मगही भाषा के मूर्धन्य कवि राम विनय शर्मा का 90 वर्ष की आयु में निधन। उनकी कविताएं गांव, किसान और प्रकृति की सजीव अभिव्यक्ति थीं।
Magahi Poet Ram Vinay Sharma Passes Away at 90
मगही साहित्य के शिखर पुरुष: कविवर राम विनय शर्मा का जीवन और योगदान
एक संवेदनशील शुरुआत
जहानाबाद, बिहार – मगही भाषा और लोकसंस्कृति के जाने-माने कवि, शिक्षाविद् और समाजसेवी श्री राम विनय शर्मा का आज उनके पैतृक गांव अलगना में 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने अपने जीवन का हर क्षण मगही भाषा, गांव के जीवन और लोकसंस्कृति को समर्पित किया।
वे विगत कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे, परंतु उनका मन साहित्य और समाजसेवा में हमेशा सक्रिय रहा। उनके निधन की खबर मिलते ही साहित्यिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई।
जीवन परिचय: शिक्षा से साहित्य तक का सफर
एक आदर्श शिक्षक
राम विनय शर्मा का जन्म सादगी और संस्कारों से भरपूर एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा शिक्षक के रूप में समाज को दिया। विद्यालय में अध्यापन कार्य करते हुए भी वे अपने छात्रों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखते थे, बल्कि उनमें जीवन मूल्यों और लोकसंस्कृति के बीज भी बोते थे।
साहित्य में गहरी पैठ
शिक्षक के रूप में सेवा निवृत्त होने के बाद उन्होंने अपना पूरा समय मगही कविता, लोकगीत, नाटक और सामाजिक लेखन को दिया। उनकी रचनाएं किसानों की व्यथा, गांव की आत्मा और प्रकृति के सौंदर्य को सरल मगर मार्मिक भाषा में उकेरती थीं।
साहित्यिक यात्रा: मगही कविता को नई पहचान
कविता: जन-जन की आवाज़
उनकी कविताएं केवल साहित्य का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की व्याख्या थीं। उन्होंने मगही भाषा को केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मा का विस्तार माना। वे लिखा करते थे:
“धनमा के बलिया निहुकी झुकी झाँकई,
अरिया पर विहसे किसान …… “
इस एक पंक्ति में गांव, खेत, किसान और उम्मीद का पूरा संसार सिमटा होता था।
प्रमुख विषय:
- कृषि और किसान
- लोकपरंपराएं
- ग्राम्य जीवन
- सामाजिक विषमता
उनकी कविताएं समय के दस्तावेज बन गईं, जिनमें गांव का दर्द, प्रकृति की पुकार और समाज की नब्ज स्पष्ट सुनाई देती है।
साहित्यिक और सामाजिक योगदान
भाषाई चेतना का प्रसार
राम विनय शर्मा ने मगही भाषा के प्रचार-प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाई। वे मानते थे कि क्षेत्रीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं और इन्हें बचाए रखना ही हमारी असली जिम्मेदारी है।
समाजसेवा और संस्कृति
वे केवल लेखक नहीं, एक कर्मठ समाजसेवी भी थे। ग्राम सभा हो या विद्यालय समारोह, वे सदैव उपस्थित रहते थे। उन्होंने युवाओं को लोकभाषा और संस्कृति से जोड़ने के कई प्रयास किए।
श्रद्धांजलि: भावनाओं की बाढ़
साहित्य जगत में शोक
राम विनय शर्मा के निधन पर बिहार के तमाम साहित्यकार, पत्रकार और सांस्कृतिक संगठनों ने गहरी शोक-संवेदना व्यक्त की।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विनोद चौधरी ने कहा:
“राम विनय जी न केवल कवि थे, बल्कि मगही आत्मा की आवाज़ थे। उनका जाना एक युग का अंत है।”
ग्रामवासियों की श्रद्धांजलि
गांव के लोगों के लिए वे एक मार्गदर्शक, अभिभावक और प्रेरणा-स्रोत थे। गांव की चौपालें, जहां वे कविता सुनाया करते थे, आज सूनी हो गई हैं।
निष्कर्ष: उनकी विरासत अमर रहेगी
राम विनय शर्मा भले ही हमारे बीच नहीं रहे, पर उनकी कविताएं, विचार और लोकभाषा के प्रति उनका समर्पण हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने सिद्ध कर दिया कि सच्चा साहित्य वही है जो जनमानस से जुड़कर उसकी पीड़ा और उम्मीद को आवाज दे।
मगही साहित्य में उनका योगदान अमिट है, और वे हमेशा ‘बाबा राम विनय’ के नाम से जन-जन के हृदय में जीवित रहेंगे।
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Author: AK
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