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Kargil Vijay Diwas 2025:कारगिल विजय दिवस, बिहार रेजिमेंट के शहीदों की गाथा

Kargil Vijay Diwas The Bravery of Bihar Regiment Martyrs

कारगिल विजय दिवस पर बिहार रेजिमेंट के 18 वीरों के बलिदान को देश कर रहा नमन, नई पीढ़ी के लिए है यह देशभक्ति की प्रेरणा।

Kargil Vijay Diwas: The Bravery of Bihar Regiment Martyrs


कारगिल की बर्फीली चोटियों पर बिहार के वीरों की अमर गाथा

1999 की गर्मियों में जब देशवासी सामान्य जीवन जी रहे थे, पाकिस्तान ने गुप्त रूप से कारगिल सेक्टर में घुसपैठ कर भारत की संप्रभुता को चुनौती दी। इसके जवाब में भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय की शुरुआत की। इस अभियान में बिहार रेजिमेंट की भूमिका सबसे निर्णायक रही।


कारगिल युद्ध की पृष्ठभूमि

पाकिस्तानी घुसपैठ और युद्ध की शुरुआत

मई 1999 में पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकियों ने मिलकर कारगिल के बटालिक, टोलोलिंग, द्रास और टाइगर हिल क्षेत्रों में कब्जा कर लिया। इस युद्ध में भारतीय सेना ने लगभग 60 दिन तक भारी बर्फ और कठिन परिस्थितियों में मोर्चा संभाला।


बिहार रेजिमेंट की वीरता

बटालिक सेक्टर में पहला बलिदान

28 मई को मेजर एम. सर्वानन, जो कि बिहार रेजिमेंट की पहली बटालियन से थे, पेट्रोलिंग के दौरान दुश्मनों से भिड़ गए। भारी गोलीबारी में उन्होंने अदम्य साहस दिखाया और दो घुसपैठियों को ढेर किया, लेकिन खुद वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी शहादत ने युद्ध का बिगुल बजाया।

टाइगर हिल पर फहराया गया तिरंगा

बिहार रेजिमेंट ने बर्फीले टाइगर हिल को दुश्मनों से मुक्त कराया और 26 जुलाई 1999 को वहाँ तिरंगा फहराया गया। यह दिन इतिहास में कारगिल विजय दिवस के रूप में अमर हो गया।


बिहार के 18 वीर सपूतों की सूची

इस युद्ध में बिहार के 18 वीरों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके नाम और जिलों की सूची इस प्रकार है:

शहीद सैनिकजिला
नायक गणेश प्रसाद यादवपटना
सिपाही अरविंद कुमार पांडेयमुजफ्फरपुर
सिपाही शिवशंकर प्रसाद गुप्ताऔरंगाबाद
लांस नायक विद्यानंद सिंहभोजपुर
सिपाही हरदेव प्रसाद सिंहनालंदा
नायक बिशुनी रायसारण
सूबेदार नागेश्वर महतोरांची
सिपाही रम्बू सिंहसिवान
गनर युगंबर दीक्षितपलामू
मेजर चंद्रभूषण द्विवेदीशिवहर
हवलदार रतन कुमार सिंहभागलपुर
सिपाही रमण कुमार झासहरसा
सिपाही हरिकृष्ण रामसिवान
गनर प्रभाकर कुमार सिंहभागलपुर
नायक सुनील कुमार सिंहमुजफ्फरपुर
नायक नीरज कुमारलखीसराय
लांस नायक रामवचन रायवैशाली
सिपाही अरविंद पांडेयपूर्वी चंपारण

वीरता की प्रेरणादायक कहानियाँ

शत्रुघ्न सिंह का अद्भुत साहस

दुश्मनों से लड़ते हुए घायल होने के बावजूद, नायक शत्रुघ्न सिंह 11 दिन तक रेंगकर अपनी चौकी पर लौटे। उन्हें वीर चक्र से नवाजा गया।

नायक दिलीप सिंह की 28 दिन की लड़ाई

समस्तीपुर के नायक दिलीप सिंह ने 28 दिनों तक जंग लड़ी और शहीद हो गए। उन्हें मरणोपरांत सूबेदार के पद पर पदोन्नति मिली।


पटना का कारगिल चौक: शौर्य का प्रतीक

कारगिल युद्ध के बाद पटना के गांधी मैदान के पास स्थित कारगिल चौक का निर्माण किया गया। यह स्मारक न केवल शहीदों को सम्मान देने का केंद्र है, बल्कि नई पीढ़ी को देशभक्ति की भावना से जोड़ता है।

हर साल 26 जुलाई को यहाँ श्रद्धांजलि सभा आयोजित होती है, जिसमें सेना, प्रशासन और आमजन शहीदों को नमन करते हैं।


बिहार रेजिमेंट की रणनीति और नेतृत्व

तत्कालीन कर्नल ओपी यादव के नेतृत्व में बिहार रेजिमेंट ने दुश्मनों की कई चौकियों को मुक्त कराया। उनका नेतृत्व टाइगर हिल की विजय में निर्णायक सिद्ध हुआ।


कारगिल विजय दिवस: क्यों है यह महत्वपूर्ण

कारगिल विजय दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि यह उस शौर्य, बलिदान और देशभक्ति का प्रतीक है जो भारतीय सैनिकों ने दिखाया। विशेषकर बिहार रेजिमेंट ने इस जंग में जो भूमिका निभाई, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।


निष्कर्ष: याद रखें वो बलिदान

कारगिल विजय दिवस पर बिहार के उन 18 वीर सपूतों को याद करना हमारा कर्तव्य है। यह दिन हमें बताता है कि देश की रक्षा के लिए हमारे जवानों ने कितनी कठिनाइयाँ झेली और जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया। पटना का कारगिल चौक इस शौर्यगाथा का जीवंत प्रमाण है।


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Author: AK

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