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Jehanabad Bribery Case: जहानाबाद में 20 हजार की रिश्वत लेते JE गिरफ्तार

जहानाबाद में मनरेगा के कनीय अभियंता अमन कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते निगरानी टीम ने गिरफ्तार किया। पहले 35 हजार की मांग का आरोप है। Jehanabad Bribery Case: JE Arrested जहानाबाद में रिश्वतखोरी के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई से हड़कंप मच गया है। मनरेगा से जुड़े एक मामले में निगरानी टीम ने … Read more

Jehanabad Bribery Case: JE Arrested

जहानाबाद में मनरेगा के कनीय अभियंता अमन कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते निगरानी टीम ने गिरफ्तार किया। पहले 35 हजार की मांग का आरोप है।

Jehanabad Bribery Case: JE Arrested

जहानाबाद में रिश्वतखोरी के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई से हड़कंप मच गया है। मनरेगा से जुड़े एक मामले में निगरानी टीम ने कनीय अभियंता अमन कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते कथित तौर पर रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। कार्रवाई अम्बेडकर चौक के पास स्थित एक होटल में की गई, जहां शिकायतकर्ता से रकम लेने के दौरान निगरानी टीम ने कनीय अभियंता को पकड़ लिया।

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मामला मनरेगा के तहत कराए गए मिट्टी से जुड़े तीन कार्यों के सत्यापन और भुगतान से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि संबंधित कार्यों का सत्यापन करने के बदले कनीय अभियंता ने पहले 35 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में कथित तौर पर बातचीत और मोलभाव के बाद रकम 20 हजार रुपये तय हुई।

शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मामले की जांच की और प्रारंभिक स्तर पर आरोपों की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई की योजना बनाई। इसके बाद टीम ने जाल बिछाकर कथित रिश्वत की रकम लेते समय आरोपी कनीय अभियंता को गिरफ्तार कर लिया।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार मामला जहानाबाद जिले की जामुक पंचायत से जुड़ा है। यहां मनरेगा के तहत मिट्टी से संबंधित तीन कार्य कराए गए थे। इन कार्यों से जुड़े सत्यापन और आगे की प्रक्रिया को लेकर पंचायत रोजगार सेवक अशोक कुमार और मनरेगा के कनीय अभियंता अमन कुमार के बीच बातचीत हुई।

आरोप है कि कार्यों के सत्यापन के एवज में कनीय अभियंता ने पंचायत रोजगार सेवक से 35 हजार रुपये की मांग की।

बताया गया कि रिश्वत की मांग से परेशान होकर रोजगार सेवक ने 20 अगस्त को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और आरोपों की प्रारंभिक जांच शुरू की।

Jehanabad Bribery Case में आगे की कार्रवाई इसी जांच के आधार पर की गई।

पहले 35 हजार रुपये की मांग, फिर 20 हजार पर बनी बात

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात रिश्वत की रकम को लेकर हुआ कथित मोलभाव है।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि शुरुआत में 35 हजार रुपये की मांग की गई थी। बाद में बातचीत के बाद कनीय अभियंता कथित तौर पर 20 हजार रुपये लेने के लिए तैयार हो गए।

यानी शिकायत में जिस रकम की मांग का आरोप लगाया गया था, वह बातचीत के बाद कम होकर 20 हजार रुपये हो गई। इसके बाद निगरानी टीम ने कथित तौर पर रिश्वत की रकम लेते हुए आरोपी अधिकारी को पकड़ने की योजना बनाई।

ऐसे मामलों में निगरानी विभाग आमतौर पर शिकायत की जांच के बाद कार्रवाई करता है। इस मामले में भी शिकायतकर्ता की जानकारी के आधार पर आगे की प्रक्रिया शुरू की गई।

20 अगस्त को दर्ज कराई गई थी शिकायत

मामले की शुरुआत शिकायत से हुई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पंचायत रोजगार सेवक अशोक कुमार ने 20 अगस्त को पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में कथित तौर पर बताया गया कि मनरेगा के तहत कराए गए मिट्टी से संबंधित तीन कार्यों के सत्यापन के बदले उनसे रिश्वत मांगी जा रही है।

शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने सीधे गिरफ्तारी करने के बजाय पहले आरोपों की प्रारंभिक जांच की। जांच में रिश्वत मांगने के आरोप की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

मामले में कांड संख्या 105/26 दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

होटल में बिछाया गया जाल

शिकायत की जांच के बाद निगरानी टीम ने आरोपी कनीय अभियंता को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।

मंगलवार को शिकायतकर्ता के साथ निगरानी टीम जहानाबाद पहुंची। इसके बाद अम्बेडकर चौक के पास स्थित एक होटल में कथित रिश्वत की रकम लेने की व्यवस्था की गई।

बताया गया कि इसी दौरान अमन कुमार कथित तौर पर 20 हजार रुपये लेने के लिए वहां पहुंचे। जैसे ही रकम का लेनदेन हुआ, निगरानी टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें पकड़ लिया।

इस कार्रवाई का नेतृत्व डीएसपी आशिफ इकबाल मेहंदी ने किया।

गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम आरोपी कनीय अभियंता को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए पटना लेकर गई।

निगरानी की कार्रवाई से मचा हड़कंप

मनरेगा से जुड़े कनीय अभियंता की गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद विभाग से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच हलचल तेज हो गई।

मनरेगा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण सरकारी योजना है। इसके तहत गांवों में सड़क, जल संरक्षण, मिट्टी का काम और अन्य सार्वजनिक उपयोग के कार्य कराए जाते हैं।

ऐसे में योजना से जुड़े किसी कर्मचारी या अधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप लगना प्रशासनिक स्तर पर गंभीर मामला माना जाता है।

Bihar Vigilance की इस कार्रवाई से यह संदेश भी जाता है कि सरकारी काम में रिश्वत मांगने या लेने की शिकायतों पर निगरानी एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं।

डीएसपी ने क्या कहा?

कार्रवाई के बाद डीएसपी आशिफ इकबाल मेहंदी ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है। निगरानी टीम यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे प्रकरण में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं।

डीएसपी के अनुसार अगर जांच के दौरान किसी अन्य अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

इस बयान से साफ है कि जांच को केवल गिरफ्तार किए गए कनीय अभियंता तक सीमित नहीं रखा गया है। एजेंसी पूरे मामले के संभावित नेटवर्क या अन्य संलिप्त लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

मनरेगा के काम में JE की क्या भूमिका होती है?

मामले को समझने के लिए यह जानना भी जरूरी है कि मनरेगा से जुड़े काम में कनीय अभियंता की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण होती है।

किसी भी विकास कार्य में तकनीकी स्तर पर जांच और सत्यापन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। कनीय अभियंता जैसे तकनीकी अधिकारी किसी कार्य की स्थिति, गुणवत्ता और निर्धारित मानकों से जुड़े पहलुओं की जांच में भूमिका निभा सकते हैं।

इसी कारण किसी काम के सत्यापन से जुड़ी प्रक्रिया में अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि किसी विशेष मामले में अधिकारी की वास्तविक जिम्मेदारी और अधिकार संबंधित विभागीय नियमों और कार्य आवंटन पर निर्भर करते हैं।

जहानाबाद के इस मामले में भी आरोप सत्यापन से जुड़े काम को लेकर रिश्वत मांगने का है।

रिश्वतखोरी की शिकायत पर कैसे होती है कार्रवाई?

रिश्वत से जुड़े मामलों में शिकायत मिलने के बाद संबंधित निगरानी एजेंसी शिकायत की प्राथमिक जांच कर सकती है। यदि शिकायत में प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार मिलता है, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाती है।

ट्रैप कार्रवाई का उद्देश्य कथित रिश्वत लेते समय आरोपी को पकड़ना होता है। इसके लिए शिकायतकर्ता और निगरानी टीम के बीच समन्वय किया जाता है।

जहानाबाद के इस मामले में भी शिकायत मिलने के बाद जांच की गई और उसके बाद कथित रिश्वत की रकम के लेनदेन के दौरान कार्रवाई की गई।

यहां यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि गिरफ्तारी या ट्रैप कार्रवाई के बाद मामला कानूनी प्रक्रिया से गुजरता है। अंतिम दोषसिद्धि का फैसला न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होता है।

इस कार्रवाई का क्या असर हो सकता है?

सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। मनरेगा जैसी योजनाओं का सीधा संबंध ग्रामीण परिवारों, रोजगार और स्थानीय विकास से होता है।

अगर किसी सरकारी काम को आगे बढ़ाने, सत्यापन करने या भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया में अवैध रकम मांगे जाने की शिकायत आती है, तो इससे योजना की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।

ऐसे मामलों में निगरानी विभाग की कार्रवाई से सरकारी कर्मचारियों में कानून के प्रति जवाबदेही का संदेश जाता है। साथ ही शिकायतकर्ताओं को भी यह भरोसा मिल सकता है कि रिश्वत मांगने की शिकायत उचित माध्यम से दर्ज कराई जा सकती है।

हालांकि किसी भी आरोप को अंतिम सत्य मानने से पहले न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

क्या अन्य अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार निगरानी टीम यह जांच कर रही है कि गिरफ्तार कनीय अभियंता के अलावा इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।

डीएसपी ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी अन्य अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

इसलिए आने वाले समय में इस मामले में और लोगों के नाम सामने आते हैं या नहीं, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल मुख्य कार्रवाई कनीय अभियंता अमन कुमार की गिरफ्तारी को लेकर हुई है।

जहानाबाद का यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

Jehanabad News में सामने आया यह मामला केवल एक अधिकारी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। यह सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और निगरानी की जरूरत को भी सामने लाता है।

मनरेगा के काम गांवों के स्तर पर होते हैं और इनमें पंचायत प्रतिनिधियों, रोजगार सेवकों, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य अधिकारियों की भूमिका रहती है। इसलिए किसी भी स्तर पर अनियमितता की शिकायत आने पर उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी होती है।

इस मामले में शिकायत से लेकर प्रारंभिक जांच और फिर ट्रैप कार्रवाई तक की प्रक्रिया ने यह दिखाया कि रिश्वत के आरोपों की शिकायत मिलने के बाद निगरानी एजेंसी किस तरह कार्रवाई कर सकती है।

फिलहाल कनीय अभियंता अमन कुमार को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पटना ले जाया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना जताई गई है।

इस पूरे प्रकरण में अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा। तब तक सामने आए आरोपों और निगरानी विभाग की कार्रवाई को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

AK
Author: AK

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