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Delhi liquor excise policy: नई आबकारी नीति पर सीबीआई ने जांच क्या शुरु की सिसोदिया के सुर बदल गए

‘मई 2021 में पॉलिसी एलजी के पास भेजी थी। एलजी ने पॉलिसी के लिए सुझाव दिए। एलजी के सुझाव शामिल कर जून 2021 में पॉलिसी पास की गई थी। एक ही जगह शराब की दुकानों के अंबार थे उसे बराबर किया जाना था। हर वार्ड में 2 से 3 दुकान का प्रस्ताव था। ये बात … Read more

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Delhi liquor excise policy
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‘मई 2021 में पॉलिसी एलजी के पास भेजी थी। एलजी ने पॉलिसी के लिए सुझाव दिए। एलजी के सुझाव शामिल कर जून 2021 में पॉलिसी पास की गई थी। एक ही जगह शराब की दुकानों के अंबार थे उसे बराबर किया जाना था। हर वार्ड में 2 से 3 दुकान का प्रस्ताव था। ये बात जोर देकर रखी गयी थी एलजी ने उस वक्त कोई आपत्ति नहीं की, बल्कि ध्यान से पढ़कर मंजूरी दी गई।‘ ये बातें आज मनीष सिसोदिया ने जैसे कही उसके बाद मानों दिल्ली की राजनीति में बवाल मचना शुरु हो गया। नई आबकारी नीति एक बार फिर से सवालों के घेरे में आ गई है। सवाल भाजपा भी पूछ रही है कि आखिर सिसोदिया को अभी क्यों याद आई है सारी चीजें। सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आम आदमी पार्टी सरकार के ऊपर आबकारी नीति को लेकर सीबीआई जांच कर रही है।

दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि एक्साइज पॉलिसी पर अहम खुलासों का दावा सरकार को नुकसान और दुकानदारों को फायदा पहुंचाने जैसी बातें की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए CBI को मैंने पूरा मामला भेजा दिया है। मई 2021 में एक्साइज पॉलिसी पास हुई थी। पुरानी में 849 दुकानें थी नई में भी इससे ज्यादा दुकान खोली जानी थी। नई पॉलिसी में बराबर शराब की दुकानें रखी गयी थी। लेकिन एलजी के अवरोध से दुकानें नहीं खोली गई जिससे नुकसान हुआ है।

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उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की यही बात ना भाजपा को पची और ना ही दिल्ली की जनता को। क्योंकि सिसोदिया अभी कुछ दिन पहले ही कह रहे थे कि आबकारी नीति से करोड़ों का फायदा पहुंचा है। यहां तक कि सिसोदिया ने यह बात हाउस में भी बोली है। इसी पर भाजपा ने पलटवार किया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सांबित पात्रा ने कहा कि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के सभी आरोपों की झूठा बताया हैं। उन्होंने कहा कि जब दहलीज पर सीबीआई खड़ी है तो अब सिसोदिया सफाई दे रहे हैं। नई आबकारी नीति पर फायदा की बात करने वाली केजरीवाल सरकार अब घाटे का रोना रो रही है।

पात्रा ने कहा कि उपराज्यपाल ने नियम और संविधान के अनुसार ही उन शराब के ठेकों को खुलने से रोका जो स्कूल, मंदिरों और अन्य मुख्य बाज़ारों के बीच नहीं खोलने चाहिए। हाउस में खुद सिसोदिया कह रहे थे कि दिल्ली में 100 ऐसे वार्ड हैं जहां शराब के ठेके नहीं खुल सकते फिर 850 शराब के ठेके कैसे खुल गए। शराब के ठेके खुलने पर जब शराब माफियाओं को नुकसान हुआ तो केजरीवाल की सरकार ने उन्हें 144 करोड़ रुपये रिटर्न में दे दी जो कि भारतीय इतिहास में पहली बार हुआ है।

AK
Author: AK

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