गुरु, अप्रैल 16, 2026

Jehanabad News: जहानाबाद में जर्जर स्कूल भवन, क्या किसी हादसे का इंतजार है

Crumbling School Buildings in Jehanabad Waiting for Disaster

जहानाबाद के स्कूल भवन जर्जर हालत में हैं, बच्चों की जान खतरे में है। सरकार अब तक चुप है। क्या हादसे के बाद ही होगी कार्रवाई?

Crumbling School Buildings in Jehanabad: Waiting for Disaster?


भूमिका: जहानाबाद में शिक्षा या खतरे की छांव?

राजस्थान के झालावाड़ जिले में एक स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत के बाद पूरे देश में सरकारी स्कूलों की स्थिति पर सवाल उठे हैं। इसी कड़ी में बिहार के जहानाबाद जिले का मामला भी सामने आया है, जहां एक स्कूल खंडहर बन चुका है लेकिन फिर भी पढ़ाई उसी में जारी है। यह स्थिति किसी भी समय एक बड़े हादसे को जन्म दे सकती है।


जहानाबाद का कनौली स्कूल: खंडहर में भविष्य की तलाश

छत गिरने का डर बना रहता है

जहानाबाद के मखदुमपुर प्रखंड के कनौली गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर है। छत से प्लास्टर गिरना, बारिश में पानी टपकना और दीवारों का मलबा गिरना यहां आम बात है। इसके बावजूद कक्षाएं बरामदे में चलाई जा रही हैं।

बच्चों की पढ़ाई बाधित, जान जोखिम में

स्कूल में संसाधनों की भारी कमी है। एक ही कमरे में दफ्तर, किचन और कक्षा संचालित हो रही है। शिक्षक और छात्र दोनों डर के साए में काम करने को मजबूर हैं। कई छात्रों ने बताया कि प्लास्टर गिरने से वे घायल भी हो चुके हैं।


जहानाबाद के ग्रामीणों की चेतावनी

प्रशासन को कई बार सूचित किया गया

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से कई बार शिकायत की है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि हर साल बारिश में यह डर बना रहता है कि कहीं कोई बच्चा मलबे में न दब जाए।

क्या बिहार सरकार भी हादसे का इंतजार कर रही है?

राजस्थान सरकार ने हादसे के बाद 7500 स्कूलों की मरम्मत का आदेश दिया। लेकिन बिहार सरकार अब तक चुप है। क्या यह संवेदनहीनता नहीं है?


यह सिर्फ जहानाबाद की बात नहीं

बिहार के कई अन्य जिलों में भी ऐसी ही स्थिति है। सैकड़ों सरकारी स्कूल जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं। यह बच्चों के शिक्षा के अधिकार और जीवन के अधिकार दोनों का उल्लंघन है।


समाधान क्या हो?

1. भवनों की त्वरित मरम्मत या पुनर्निर्माण

खतरनाक स्कूल भवनों की सूची बनाकर प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत शुरू की जाए।

2. वैकल्पिक स्थान पर शिक्षा व्यवस्था

मरम्मत होने तक अस्थायी कक्षाएं किसी सुरक्षित भवन या सामुदायिक केंद्र में चलाई जाएं।

3. संसाधनों की तत्काल पूर्ति

शौचालय, पीने का पानी, फर्नीचर जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

4. जिम्मेदारी तय हो

जिन अधिकारियों ने बार-बार की गई शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं की, उन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।


निष्कर्ष: जहानाबाद की आवाज कब सुनेगी सरकार?

जहानाबाद का कनौली स्कूल सिर्फ एक उदाहरण है, लेकिन यह एक बड़े सिस्टम फेलियर की निशानी है। शिक्षा केवल कागजों में नहीं, ज़मीन पर सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए। अब समय है कि बिहार सरकार हादसे के इंतजार में न रहे, बल्कि समय रहते ठोस कदम उठाए।


अगर आप चाहते हैं कि बच्चों को सुरक्षित शिक्षा मिले, तो इस मुद्दे को ज्यादा से ज्यादा साझा करें और जनप्रतिनिधियों तक आवाज पहुंचाएं।


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Author: AK

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