मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ महागठबंधन का बिहार बंद, जहानाबाद में ट्रेन रोकी गई और कई जिलों में सड़कें जाम रहीं।
Bihar Bandh: Grand Alliance Blocks Train in Jehanabad
मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ बिहार में महागठबंधन का जोरदार प्रदर्शन
बिहार में एक बार फिर राजनीति गर्मा गई है। वजह है भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा चलाया जा रहा विशेष मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण अभियान, जिसे लेकर विपक्षी महागठबंधन ने बुधवार 9 जुलाई 2025 को राज्यव्यापी चक्का जाम का एलान किया। इस आंदोलन की सबसे प्रमुख और प्रतीकात्मक तस्वीर जहानाबाद से सामने आई, जहां राजद समर्थकों ने एक पैसेंजर ट्रेन को रोक दिया।
इस विरोध प्रदर्शन ने बिहार के कई जिलों में जनजीवन को प्रभावित किया, वहीं विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई करार दिया।
जहानाबाद में ट्रेन रोकी, कई जगह सड़कों पर प्रदर्शन
जहानाबाद जिले में प्रदर्शनकारियों ने रेलवे ट्रैक पर उतरकर एक पैसेंजर ट्रेन को रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में झंडे-बैनर लेकर सरकार विरोधी नारे लगाए और कहा कि यह चक्का जाम गरीबों के मताधिकार की रक्षा के लिए किया गया है।
राजधानी पटना सहित मनेर, हाजीपुर, समस्तीपुर, और मुजफ्फरपुर जैसे प्रमुख शहरों में भी महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने टायर जलाकर सड़कें जाम कर दीं। कई जगहों पर यातायात पूरी तरह ठप रहा और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शन के केंद्र में मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान
भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा 30 जून 2025 से बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है, जिसकी अंतिम तिथि 25 जुलाई 2025 रखी गई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस अभियान के माध्यम से एनडीए सरकार विशेष रूप से दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाता नामों को सूची से बाहर करने की साजिश कर रही है।
राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि यह प्रक्रिया मताधिकार छीनने का प्रयास है और बिहार की लोकतांत्रिक परंपराओं पर हमला है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को कमजोर करने वाली हर साजिश का हम पुरजोर विरोध करेंगे।
पटना से लेकर जिलों तक प्रदर्शन का व्यापक असर
पटना के वीरचंद पटेल पथ स्थित राजद कार्यालय से सुबह 9 बजे महागठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बिहार बंद के तहत चक्का जाम की शुरुआत की। इसके बाद जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गांधी मैदान, डाकबंगला चौराहा और अशोक राजपथ की ओर बढ़ा।
मुजफ्फरपुर, भागलपुर, दरभंगा, गया, सीवान और छपरा जैसे जिलों में भी भारी संख्या में कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और प्रशासन से टकराव की स्थिति बनी रही।
नेताओं की मौजूदगी ने दिया आंदोलन को बल
इस विरोध प्रदर्शन में महागठबंधन के प्रमुख नेता भी सक्रिय रूप से शामिल रहे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी चक्का जाम में हिस्सा लेने के लिए विशेष विमान से पटना पहुंचे। उनके साथ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, भाकपा माले के दीपंकर भट्टाचार्य, सीपीएम के एमए बेबी और सीपीआई के डी राजा भी मौजूद थे। इन नेताओं ने राजद कार्यालय से लेकर प्रदर्शन स्थलों तक पैदल मार्च कर जनता से संवाद किया।
राहुल गांधी ने केंद्र और राज्य सरकार पर साधा निशाना
प्रदर्शन में शामिल होते हुए राहुल गांधी ने केंद्र और बिहार सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “देश में चुनावी मशीनरी का दुरुपयोग हो रहा है। बिहार में जो हो रहा है, वह गरीबों, दलितों और पिछड़ों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर करने का सुनियोजित प्रयास है। यह सिर्फ बिहार का मामला नहीं है, पूरे देश का भविष्य दांव पर है।”
प्रशासन की ओर से सख्त सुरक्षा व्यवस्था
बिहार पुलिस और प्रशासन ने इस राज्यव्यापी प्रदर्शन को लेकर पहले से ही अलर्ट जारी किया था। पटना सहित सभी जिलों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए। रेल और सड़क यातायात की निगरानी के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का भी सहारा लिया गया।
जहानाबाद में ट्रेन रोकने की घटना के बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को सक्रिय किया गया और रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई।
ट्रेड यूनियनों की भी हड़ताल से बढ़ा असर
इस बिहार बंद की खास बात यह रही कि यह प्रदर्शन सिर्फ महागठबंधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि केंद्रीय श्रमिक संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने भी इस दिन राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था।
ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों, निजीकरण, और मजदूरों के अधिकारों में कटौती के खिलाफ 25 करोड़ श्रमिकों को भारत बंद में शामिल करने की बात कही। बैंक, बीमा, कोयला और रेलवे क्षेत्रों में भी इसका असर दिखा।
सत्ता पक्ष ने बताया राजनीति से प्रेरित आंदोलन
एनडीए सरकार ने महागठबंधन के इस प्रदर्शन को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया है। जेडीयू और भाजपा के नेताओं ने कहा कि यह एक हताश विपक्ष की साजिश है, जो चुनावों में हार के डर से लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आरोप लगा रहा है।
भाजपा नेता संजय जायसवाल ने कहा कि “चुनाव आयोग पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्था है। गहन पुनरीक्षण अभियान एक नियमित प्रक्रिया है, जिसे राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण है।”
निष्कर्ष: मतदाता अधिकारों की सुरक्षा या राजनीति का हथियार?
बिहार में हुए इस चक्का जाम ने एक बार फिर दिखा दिया कि राज्य की राजनीति में मुद्दों की संवेदनशीलता कितनी तेज़ी से उबाल ले सकती है। एक ओर महागठबंधन इसे लोकतंत्र की रक्षा का कदम बता रहा है, तो दूसरी ओर सरकार इसे साजिश करार दे रही है।
जहानाबाद में ट्रेन रोकने से लेकर सड़कों पर बेतहाशा प्रदर्शन तक, यह आंदोलन कई स्तरों पर बहस छेड़ता है—क्या यह वास्तव में गरीबों और वंचितों की आवाज़ है, या फिर आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी का एक ट्रायल रन?
जो भी हो, यह साफ है कि बिहार की सियासत अब फिर गर्म होने वाली है।
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Author: AK
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