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बीसीसीआई का ‘मुफ्त के चंदन घिस रघुनंदन’ वाला नियम आखिर कब तक चलेगा

बीसीसीआई बोले तो क्रिकेट की दुनिया का सबसे पावरफुल बोर्ड। कहा तो ये भी जाता है कि आईसीसी में अगर किसी की हुकूमत चलती है तो वह सिर्फ बीसीसीआई की। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन आज अगर बीसीसीआई इतना पावरफूल है तो उसकी वजह है खिलाड़ियों का बेहतरीन प्रदर्शन जिसके कारण भारत … Read more

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बीसीसीआई बोले तो क्रिकेट की दुनिया का सबसे पावरफुल बोर्ड। कहा तो ये भी जाता है कि आईसीसी में अगर किसी की हुकूमत चलती है तो वह सिर्फ बीसीसीआई की। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन आज अगर बीसीसीआई इतना पावरफूल है तो उसकी वजह है खिलाड़ियों का बेहतरीन प्रदर्शन जिसके कारण भारत में क्रिकेट को पूजा जाता है। लेकिन सवाल यहां ये है कि क्या बीसीसीआई उस तरह से अपने खिलाड़ियों का ध्यान रखती है जिस हिसाब से खिलाड़ियों ने बीसीसीआई को सवारने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है?

आज भारतीय क्रिकेट टीम की स्थिति यह है एक साल भर का तंग अंतराष्ट्रीय कैलेंडर, ओवपलैपिंग टूर और क्रिकेट के तीनों प्रारुप में लगभग पूरी तरह से व्यस्त कार्यक्रम। स्थिति ये है कि भारत ऐसा देश बन चुका है जो एक साथ दो-दो अंतरराष्ट्रीय टीमों के साथ क्रिकेट खेल रहा है। मतलब खिलाड़ियों की पूरी तरह से भरमार। इसको इसी से समझा जा सकता है कि अक्टूबर 2021 से अब तक 43 पुरुष क्रिकेटर टीम इंडिया के लिए खेल चुके हैं। आंकड़ों की बात करें तो हर दूसरे मैच में एक खिलाड़ी की डेब्यू भारतीय क्रिकेट टीम में होती है जो भारत की प्रतीभा और क्रिकेट के प्रति युवाओं के रुझान को दर्शाता है, लेकिन क्या उस प्रतीभा की कदर सही मायनों में हो रही है या सिर्फ इंडियन टीम की डेब्यू कैप पहना देना मात्र ही खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ा सम्मान है।

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ये बात इसलिए भी जरुरी है क्योंकि वार्षिक अनुबंध घोषिण होने में केवल ढाई महीने शेष हैं, बोर्ड ने अभी तक वार्षिक अनुबंधों की घोषणा नहीं की है, जो परंपरागत रूप से प्रत्येक वर्ष मार्च तक जारी किए जाते हैं और अक्टूबर से सितंबर तक चलते हैं। बीसीसीआई ने आखिरी बार 2021 के अप्रैल में अनुबंधों की घोषणा की थी।

अप्रैल 2021 से जिन 43 क्रिकेटर भारतीय टीम का हिस्सा बनें उनमें से 27 बोर्ड के वार्षिक अनुबंध से कमा रहे हैं जबकि 16 खिलाड़ियों को केवल मैच फीस ही मिलता है। यहां जान लेना जरुरी है कि भारत के केंद्रीय अनुबंधों को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। जिसमें सबसे अधिक भुगतान करने वाले खिलाड़ी सालाना 7 करोड़ रुपये फिरर फिर 5 करोड़ रुपये, तीसरी श्रेणी वाले खिलाड़ी तीन करोड़ रुपये और अंतिमि श्रेणी वाले एक करोड़ रुपये कमाते हैं। बात अगर मैच फीस की करें तो एक टेस्ट के लिए मैच फीस 15 लाख रुपये, एक वनडे के लिए 6 लाख रुपये और टी-20 के लिए तीन लाख रुपये होने का अनुमान है।

अगर बात गैर-अनुबंधित क्रिकेटरों की करें यानि वे16 खिलाड़ी जो सिर्फ मैच फीस ही ले पा रहे हैं तो उनमें से 6 ने एक बार एकदिवसीय मैच में जगह बनाई, 14 ने एक टी-20 में भाग लिया। हालांकि एक ने भी टेस्ट मैच नहीं खेला। दूसरी ओर जो 27 खिलाड़ी कंट्रैक्ट के अंतर्गत आते हैं और जो इस सीजन खेल रहे हैं उनमें से जो 20 ने कम से कम एक टेस्ट मैच खेला है, 15 ने एक वनडे और 17 ने क्रमशः एक टी-20 में खेला है। अब अगर पैसों की तुलनात्मक रुप देखें तो कंट्रैक्ट और नॉन कंट्रैक्ट खिलाड़ियों में काफी मेहनत हैं जबकि सबकी मेहनत, लक्ष्य और लगन एक ही है।

बीसीसीआई के इस दोहरी नीति का शिकार कई खिलाड़ी हो रहे हैं लेकिन इनमें कई नाम ऐसे भी हैं जिनके बारे में खुद को विश्वास नहीं होगा और ऐसा ही नाम स्काई यानि सूर्यकुमार यादव का है। स्काई नॉन कंट्रैक्ट खिलाड़ी होने के बावजूद इस समय भारतीय बैटिंग लाइन अप की रीढ़ की हड्डी बने हुए हैं। सूर्यकुमार ने 15 टी 20 आई से 398 रन बनाए हैं, जिसमें हाल ही में ट्रेंट ब्रिज में इंग्लैंड के खिलाफ शानदार 117 रन शामिल हैं।31 वर्षीय सूर्यकुमार ने इस साल की शुरुआत में वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों में 64 के शीर्ष स्कोर के साथ 143 रन बनाकर एकदिवसीय मैचों में भी प्रभावित किया है।

सूर्यकुमार यादव के अलावा, युवा बल्लेबाज ईशान किशन और सीमर हर्षल पटेल ने भी अक्टूबर 2021 से भारत के लिए काफी क्रिकेट खेला है। दोनों का बीसीसीआई से कोई अनुबंध भी नहीं है। ईशान ने टीम इंडिया के लिए पिछले नौ महीनों में 16 मैच (एक वनडे और 15 टी-20) खेले हैं। हर्षल पटेल भी इस समय टीम इंडिया के अहम हिस्सा हैं जो अब तक 17 टी-20 में 23 विकेट झटका चुके हैं।

बीसीसीआई सचिव जय शाह ने तो यह स्पष्ट कर दिया है कि वे एक ही समय में दो टीम तैयार कर रहे हैं और इसके लिए वे एक रोस्टर बना रहे हैं जिसमें 50 खिलाड़ी शामिल होंगे लेकिन अभी की परिस्थितियों को देखते हुए क्या उन खिलाड़ियों के साथ सही हो रहा है जो टीम इंडिया के अहम हिस्सा हैं और नॉन-कंट्रैक्ट लिस्ट में हैं। जय शाह की बात पर यकीन करें जो कहते हैं कि सत्ता में बैठे लोगों ने भारतीय टीम के लिए एक विशेष योजना बनाई है तो क्या अब ये मान लिया जाए कि क्रिकेट भी राजनीतिक से प्रेरित होगा। अब यहां भी प्रतीभा की जगह सोर्स-पैरबी हावी हो रही है। क्या यह उचित है कि ईशान, सूर्या, हर्षल, अवेश खान, रुतुराज गायकवाड़ जैसे मैच विजेता केवल मैच फीस के लिए खेलते हैं?

AK
Author: AK

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