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ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के आक्रमक तेवर के सामने भारतीय गेंदबाजी फीकी पड़ी, 208 रन बनाकर भी हारा भारत

भारत के टीम कॉम्बिनेशन की पिछले कई महीनों से लगातार चर्चा होती आ रही है। ऑप्शन ज्यादा है इसलिए आज तक टीम में सिर्फ टेस्ट ही चल रहा है खिलाड़ियों का। और इसी टेस्ट के चक्कर में हम एशिया कप भी हारे, आयरलैंड के सामने 200 से ज्यादा रन बनाकर भी हम सुरक्षित होने दिखे … Read more

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Australia beats India in first T20
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भारत के टीम कॉम्बिनेशन की पिछले कई महीनों से लगातार चर्चा होती आ रही है। ऑप्शन ज्यादा है इसलिए आज तक टीम में सिर्फ टेस्ट ही चल रहा है खिलाड़ियों का। और इसी टेस्ट के चक्कर में हम एशिया कप भी हारे, आयरलैंड के सामने 200 से ज्यादा रन बनाकर भी हम सुरक्षित होने दिखे सिर्फ तीन रन से जीत सके, श्रीलंका जैसी नई नवेली टीम हरा दी और पाकिस्तान भी हमें हरा देता है। बाकी रही सही कसर आज के मैच में निकल गया। अगर कोई टीम 208 रन बनाने के बाद भी इसी जदोजहद में रहे कि वह इस स्कोर को बचा सकती है या नहीं तो फिर आप उस स्थिति को समझ सकते हैं कि आखिर गेंदबाजी किस लचर स्तर पर है।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहला टी20 मैच मोहाली में हुआ जो कि हमेशा से एक हाई स्कोरिंग पिच रहा है। हुआ भी यही। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ पहले बैटिंग करते हुए 20 ओवर की मैच में 208 रन बना डाले। तीसरे ओवर में ही रोहित शर्मा 11 रन बनाकर आउट हो गए और उनका लचर प्रदर्शन एक बार फिर से लगातार जारी है। पिछले 45 इनिंग में सिर्फ 2 अर्धशतक है और बात सभी विराट कोहली की ही होती है। पांचवे ओवर में कोहली भी 2 रन बनाकर चलते बने। के एल राहुल के साथ सूर्यकुमार यादव ने मोर्चा संभाला और शुरुवाती झटकों से उभरते हुए 12 ओवर में 100 के पार ले गए। राहुल ने आउट होने से पहले तीन छक्कों और 4 चौकों की मदद से 35 गेंदों पर 55 रनों की एक शानदार नोक खेलकर पवेलियन पहुँचे।


इसके बाद क्रीज पर कदम रखे हार्दिक पांड्या ने ग़दर मचाना शुरू किया। सूर्यकुमार हालांकि तुरंत आउट हुए लेकिन तब तक उन्होंने 4 छक्के और 2 चौकों की मदद से 25 गेंदों पर 46 रन बनाकर एक बेहतर और बड़े स्कोर की नींव रख दी थी। लेकिन फिर शुरू हुआ हार्दिक पांड्या शो। यह शो नहीं बल्कि ऑस्ट्रेलिया पर एक आंधी आई जो सिर्फ 30 गेंदों में ही पांच छक्के और 7 चौकों की मदद से 71 रन बना डाले। जिंसमें कैमरोन ग्रीन की अंतिम ओवर में लगातार तीन छक्के भी शामिल है। भारत ने 209 रनों का एक अच्छा टारगेट ऑस्ट्रेलिया को दिया।


209 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की टीम के कप्तान ने पहली ही भुवनेश्वर की गेंद पर छक्का जड़ा कर बता दिया कि उनका इरादा क्या है। उनके साथ ऑस्ट्रेलिया के नए ओपनर आये ग्रीन ने अपने अंतिम ओवर में लगे हैट्रिक छक्के का सिर्फ बदला ही नहीं लिया बल्कि ऑस्ट्रेलिया की झोली में जीत लगभग डालकर आउट हुए। 30 गेंदों में 4 छक्के और 8 चौकों की मदद से 61 रन बनाकर ग्रीन आउट हुए। स्मिथ ने जरूर क्रीज पर रुकने की कोशिश की इसलिए उन्होंने 24 गेंदों पर 35 रन बनाये।

इसके बाद ऑस्ट्रेलिया की जीत पर पक्का मोहर लगाया मैथ्यू वेड ने। सिर्फ 21 गेंदों में 2छक्कों और 4 चौकों की मदद नॉट आउट 45 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से जीत दिला दी। इस मैच में कोई दो राय नहीं कि ऑस्ट्रेलिया की टीम ने बेहतर बैटिंग की लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने भी अपनी कमियों को जमकर उजागर किया। भारत की ओर से रोहित शर्मा ने 6 गेंदबाजों का इस्तेमाल किया जिसमें सिर्फ अक्षर पटेल को छोड़कर सबने 10 रन प्रति ओवर के ऊपर ही रन लुटाए।


गेंदबाजी में जिसका जितना नाम उसकी उतनी फीकी पकवान साबित हुई भारतीय टीम। इन सब में अक्षर पटेल ने शानदार गेंदबाजी करते हुए अपने चार ओवर में सिर्फ17 रन देकर 3 विकेट झटके। उमेश यादव काफी दिन के बाद टीम में वापसी कर रहे थे उन्होंने जरूर 2 विकेट लिए लेकिन उसके लिए 2 ओवर में 27 रन खर्च कर डाले। सबसे बड़ी बात मुख्य बॉलर होने के बावजूद सिर्फ दो ओवर ही डाला। भुवनेश्वर कुमार सबसे बड़ी उम्मीद थे कि शायद पिछले दो मैचों में जो गलतियां उन्होंने की वह इस मैच में नहीं दोहराएंगे। लेकिन 4 ओवर बिना किसी सफलता के 52 रन खर्च कर डाले।

हर्षल पटेल के बारे मेंकहा जा रहा था कि उनके आने से टीम की बॉलिंग अटैक को मजबूती मिलेगी क्योंकि डेथ ओवर स्पेसलिस्ट थे और हुआ क्या बिल्कुल ठीक इसके उलट। जब टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी तब उन्होंने एक ओवर में 22 रन लुटा दिए। या यह कहे कि ऑस्ट्रेलिया को यह न्योता दे दिया कि अब आपके इस मैच में जितने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं। हर्षल पटेल अपने 4 ओवर के कोटे में बिना विकेट लिए 49 रन खर्च कर डाले। इसके बाद बेचतर बैटिंग करने वाले हार्दिक पांड्या ने 2 ओवर में 22 रन खर्च किये।


यह मैच भारतीय टीम के लिए साफ संकेत था कि अब सिर्फ नाम से ही नहीं काम से रिजल्ट मिलने वाला है और जरूरत है अपनी गेंदबाजी सेक्टर को और मजबूत और धारदार करने की। नहीं तो यह तो द्विपक्षीय सीरीज है, कही ऐसा न हो कि हम ट्राय के चक्कर में टी20 वर्ल्ड कप में कोई बड़ी गलती न कर दें जिसका पछतावा फिर हमेशा के लिए रहे। बाकी एक नई शुरुआत और नई उम्मीद के साथ बेहतर परफॉर्मेंस की उम्मीद 23 सितंबर को होने वाले दूसरे टी20 मैच में है।


अमन पांडेय

AK
Author: AK

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