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‘रेवड़ी’ अब लोहड़ी में नहीं बल्कि आज से राजनीतिक गलियारों में बंटनी शुरु हो गई है

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को 296 किलोमीटर लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन कर रहे थे उस दौरान उन्होंने रेवड़ी संस्कृति यानि सरकारों द्वारा मुफ्त सुविधाएं देने को लेकर निशाना साधा था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि कुछ विपक्षी पार्टी मुफ्त की रेवड़ी बांटकर वोट बटोरने की कल्चर लाने की कोशिश हो रही है। यह रेवड़ी … Read more

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को 296 किलोमीटर लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन कर रहे थे उस दौरान उन्होंने रेवड़ी संस्कृति यानि सरकारों द्वारा मुफ्त सुविधाएं देने को लेकर निशाना साधा था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि कुछ विपक्षी पार्टी मुफ्त की रेवड़ी बांटकर वोट बटोरने की कल्चर लाने की कोशिश हो रही है। यह रेवड़ी संस्कृति देश के लिए घातक है इससे खासकर युवाओं को बचकर रहने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री का इतना कहना था कि विपक्षी पार्टियों के नेताओं का एक पूरा समूह बयान बाजी करने लगा। हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में किसी राजनैतिक दल का नाम नहीं लिया लेकिन बिना लोहड़ी के रेवड़ी बांटने का काम जो उन्होंने अपने भाषण में शुरू किया वह देखते ही देखते अखबारों और चैनलों की सुर्खियों में जगह बनाते चला गया। इसपर कई विपक्षी नेताओं ने कटाक्ष किया लेकिन शुक्रवार को सबसे बड़ा विस्फोट हुआ अरविंद केजरीवाल के भाषण के रूप में।


राजनीतिक गलियारों की कहासुनी पर धयान दें और उसको सत्य माने तो जाहिर सी बात है अगर इस वक्त कोई सरकार अपने मुफ्त की राजनीति को लेकर चर्चा में है तो वह केजरीवाल हैं। जिन्होंने दिल्ली और पंजाब में बिजली फ्री किया लेकिन दिल्ली में पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा को बिल्कुल मुफ्त का दावा करते रहें हैं और अक्सर देखा गया है कि यही उनकी यूएसपी भी रही है जो दूसरे राज्यों में जाकर बोलते रहे हैं और अब तो यही उनका अन्य राज्यों में सरकारों को घेरने के लिए प्रयोगस्त्र बन चुका है। देश में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली पार्टी आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल दूसरे राज्यों की सरकारों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हैं और फिर उस सरकार को अपने द्वारा दिल्ली में जो विकास करने का दावा करते हैं उसका आईना दिखाते हैं।


केजरीवाल को रेवड़ी का बांटना बर्दाश्त नहीं हुआ और वे एक-एक कर केंद्र सरकार पर कई आरोप लगाते चले गए। केजरीवाल ने कहा कि अगर दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 18 लाख बच्चों को अच्छी और फ्री शिक्षा का मिलना रेवड़ी बांटना है तो हम रेवड़ी बांट रहे हैं। लेकिन यही रेवड़ी का परिणाम है कि इतिहास में पहली बार किसी सरकार बोर्ड का 99 फीसदी का रिजल्ट आया है। पिछले कुछ साल में चार लाख के करीब बच्चे प्राइवेट स्कूलों से सरकारी स्कूलों में आए हैं।


केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के सरकारी अस्पताल खासकर मोहल्ला क्लीनिक की चर्चा पूरी दुनिया में हैं। अगर इन अस्पतालों में इलाज कराने वाली आम जनता को मुफ्त में 50 लाख रुपये तक इलाज मिलना केंद्र सरकार को रेवड़ी बांटना लगता है तो हाँ हम रेवड़ी बांट रहे हैं।केजरीवाल का कहना है हम अगर 200 यूनिट बिजली फ्री दे रहे हैं, बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा करवा रहे हैं, तीर्थस्थानों पर बुजुर्गों को भेज रहे हैं, तो इसमें गलत क्या है। रेवड़ियां तो वो लोग बांट रहे हैं, जो अपने लिए हजारों करोड़ रुपये का विमान खरीद रहे हैं। अगर मंत्रियों के घर 3-4 हजार यूनिट मुफ्त बिजली दे रहे हैं और अगर केजरीवाल यह सुविधा आम जनता को दे रहा है तो गलत क्या कर रहा है।

पहले तो यहां जान लेना बेहतर हैं कि करोड़ों रुपये का विमान खरीदने से केजरीवाल ने किसके ओर संकेत दिया। दरअसल गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने हाल ही में एक विमान खरीदा जिसकी कीमत बताई गई पूरे 191 करोड़ रुपये। गुजरात में चुनाव होने को है इसलिए केजरीवाल एंड कम्पनी कोई भी मुद्दा छोड़ना नहीं चाहती तो उन्होंने उस वक़्त कहा था कि यहां के मुख्यमंत्री विमान खरीद रहे हैं और हमने महिलाओं की बस टिकट दिल्ली में फ्री कर दी जिसमें 150 करोड़ रुपये का खर्च आता है।

केजरीवाल ने कहा कि जब आप विदेश यात्रा पर जाने के बहाने अपने चंद दोस्तों के के ठेके लेते हैं विदेशी सरकारों से यह होती है मुफ्त रेवड़ी। केजरीवाल का यह इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विदेश यात्रा को लेकर था और ठेके लेने का मामला श्रीलंका की ओर से था। अब मामला यहां समझिए कि केजरीवाल का बयान देने से क्या अभिप्राय था। सीलोन बिजली बोर्ड के प्रमुख हैं एमसीसी फर्डिनेंडो। उन्होंने एक संसदीय पैनल के सामने गवाही दी थी कि उन्हें राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने बताया था कि पीएम मोदी ने अडानी ग्रुप को 500 मेगावाट की विंड एनर्जी प्रोजेक्ट देने पर जोर दिया था। वो शुक्रवार को संसद में सार्वजनिक उद्यम समिति की सुनवाई में पेश हुए थे। इस आरोप के बाद पूरी तरह से खलबली मची हुई थी। जिसको कुरेदने का काम केजरीवाल ने कर दिया।


लोन लेकर भागने और बैंक के दिवालिया निकलने वाले केजरीवाल के बयान के कई उदाहरण जब से मोदी सरकार आई है तब से मिल जाएंगे। भाजपा पर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि जितने लोग करोड़ो रूपये लेकर देश से फरार हो गए, वे राजनीतिक पार्टी को चंदा देते हैं। एक बार इसे दोहराने का काम केजरीवाल ने किया हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। हालांकि केजरीवाल ने जिस रूप से मोदी के बयान का पलटवार किया है उससे साफ है कि यह उनकी एक सोची समझी राजनैतिक स्टंट भी बताया जा रहा है जो सही समय पर आया है।


राजनैतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस वक़्त देश की जो पक्ष और विपक्ष की स्थिति है उसके अनुसार कांग्रेस जरूर मुख्य विपक्ष बनी हुई है बावजूद इसके केजरीवाल खुद को मुख्य विपक्ष के रूप में मानने लगे हैं और यह सही मौका था जब पूरे देश को इस बात की ओर इंगित कराना कि प्रधानमंत्री सिर्फ मेरे बारे में बात कर रहे हैं। उन्होंने रेवड़ी वाली बात को अपने ऊपर लेकर पलटवार किया ताकि आने वाले समय का एक मजबूत पार्टी के रूप में खुद को साबित कर सके। हालांकि बिन लोहड़ी बट रही इस रेवड़ी का स्वाद चखने से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी पीछे नहीं हटे उन्होंने ट्वीट कर कहा कि

रेवड़ी बांटकर ‘थैंक्यू’ का अभियान चलवाने वाले सत्ताधारी अगर युवाओं को रोजगार दें, तो वो दोषारोपण संस्कृति से बच सकते हैं। रेवड़ी शब्द असंसदीय तो नहीं?

अखिलेश यादव का यह कटाक्ष करना चर्चा का विषय बना हुआ है। खैर, राजनीति का यह अहम और सबसे आसान तरीका है कि अगर काम नहीं कर पाओ तो दूसरे के कामों में खामियां निकाल दो। दूसरे की खामियों पर लोगों का ध्यान जाएगा तो आपने काम किया है या नहीं इसके बारे में कोई नहीं पूछेगा। आज के समय में तो नेताओं को संसदीय भाषा के मर्यादा का ख्याल तक नहीं रहा तो दूसरों में खामियों को अगर कोई ढूंढता है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

AK
Author: AK

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