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पुण्यतिथि पर याद आए पूर्व राष्ट्रपति: डॉक्टर कलाम की सादगी और महान विचार युवा पीढ़ी के लिए हमेशा आदर्श रहेंगे

दो दिन पहले यानी 25 जुलाई को आदिवासी द्रौपदी मुर्मू ने देश की 15वीं राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली है। अगले महीने 6 अगस्त को उपराष्ट्रपति के भी चुनाव होने जा रहे हैं। पिछले कई दिनों से देश में राष्ट्रपति को लेकर पक्ष और विपक्ष में खूब चर्चा हुई। ‌चर्चाओं के बीच आज की … Read more

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APJ Abdul Kalam Death Anniversary: Remembering ‘Missile Man Of India’
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दो दिन पहले यानी 25 जुलाई को आदिवासी द्रौपदी मुर्मू ने देश की 15वीं राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली है। अगले महीने 6 अगस्त को उपराष्ट्रपति के भी चुनाव होने जा रहे हैं। पिछले कई दिनों से देश में राष्ट्रपति को लेकर पक्ष और विपक्ष में खूब चर्चा हुई। ‌चर्चाओं के बीच आज की तारीख भी एक ऐसे महान शख्स से जुड़ी हुई है जो देश के राष्ट्रपति के साथ जिन्हें मिसाइल मैन भी कहा जाता है। इसके साथ वह देश के लाखों युवाओं के हमेशा आदर्श रहेंगे। आज 27 जुलाई है । आज से 7 साल पहले इसी दिन देश के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। डॉक्टर कलाम का सादगी पूर्ण जीवन लोग भुला नहीं पाए हैं। आज सातवीं पुण्यतिथि पर सुबह से ही सोशल मीडिया पर देशवासी पूर्व राष्ट्रपति कलाम को याद करते हुए श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

APJ Abdul Kalam Death Anniversary: Remembering ‘Missile Man Of India’

बता दें कि एपीजे अब्दुल कलाम देश के 11वें राष्ट्रपति थे। उनका कार्यकाल 25 जुलाई 2002 से 25 जुलाई 2007 तक रहा था। अब्दुल कलाम ऐसे राष्ट्रपति थे जो सभी राजनीतिक दलों में लोकप्रिय थे। डॉक्टर कलाम के महान विचार, ‘सपने वो नहीं हैं जो आप नींद में देखते हैं, सपने वो हैं जो आपको नींद नहीं आने देते’, आज भी युवा पीढ़ी में अमर है। उनके विचारों ने पूरे देश को एक नई ऊर्जा प्रदान की। बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम में हुआ था। इनका पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था। उन्होंने अपनी पढ़ाई सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से की थी। कलाम ने अर्श से फर्श तक का सफर तय करने के लिए काफी मेहनत की और कई मुश्किलों का डटकर सामना भी किया । ‘उन्हें जनता का राष्ट्रपति कहा जाता था’। जनवादी राष्ट्रपति, जिन्होंने विज्ञान से लेकर राजनीति तक कई क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़ी’ । कलाम न सिर्फ एक राजनेता, एयरोस्पेस साइंटिस्ट थे, बल्कि एक शिक्षक भी थे। वो चाहते थे कि दुनिया उन्हें एक शिक्षक के तौर पर याद करे।

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बता दें कि 1992 से 1999 तक कलाम रक्षामंत्री के रक्षा सलाहकार भी रहे। इस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने पोखरण में दूसरी बार न्यूक्लियर टेस्ट भी किए और भारत परमाणु हथियार बनाने वाले देशों में शामिल हो गया। यही वजह है कि उन्हें ‘मिसाइल मैन’ कहा जाता है. पोखरण परमाणु परिक्षण में डॉ. कलाम ने अहम भूमिका निभाई थी। डॉ कलाम भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे। कलाम को 1981 में भारत सरकार ने पद्म भूषण और फिर, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया। भारत के सर्वोच्च पद पर नियुक्ति से पहले भारत रत्न पाने वाले कलाम देश के केवल तीसरे राष्ट्रपति हैं। उनसे पहले यह मुकाम सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन ने हासिल किया था। ‘डॉ कलाम सभी पार्टियों सब धर्मों में लोकप्रिय रहे’। वह अग्नि और पृथ्वी मिसाइल के विकास और संचालन के प्रमुख थे।

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को जनता का राष्ट्रपति कहा जाता था

मिसाइल मैन डॉ एपीजे अब्दुल कलाम अपनी सादगी पूर्ण जीवन के लिए जाने जाते थे। वे बेहद साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते थे और जमीन और जड़ों से जुड़े रहकर उन्होंने ‘जनता के राष्ट्रपति’ के रूप में लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई । ‘राष्ट्रपति रहते हुए भी उन्होंने अपने जीवन में बदलाव नहीं किया, यही उनको महान बनाता था । समाज के सभी वर्गों और विशेषकर युवाओं के बीच प्रेरणा स्रोत बने डॉ. कलाम ने राष्ट्राध्यक्ष रहते हुए राष्ट्रपति भवन के दरवाजे आम जन के लिए खोल दिए जहां बच्चे उनके विशेष अतिथि होते थे।

वह भारत के पहले राष्ट्रपति थे जो अविवाहित और शाकाहारी थे। ‘कलाम को सूट पहनना पसंद नहीं था, इसलिए वो औपचारिक कार्यक्रमों में जाने से बचते थे’। उन्हें जनता का राष्ट्रपति कहा जाता था। उन्हें ऐसे कपड़े नहीं पसंद थे, जिसमें खुद को सहज नहीं पाते थे। पूर्व राष्ट्रपति डॉ कलाम को भारत और विदेश के 48 विश्वविद्यालयों और संस्थानों से मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया था। पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम अपने आखिरी समय तक देश के लिए सोचते रहे। अब्दुल कलाम का 27 जुलाई, 2015 को शिलॉन्ग में निधन हो गया, वे आईआईएम में लेक्चर देने गए थे। यहां हम आपको बता दें कि उनकी अंतिम यात्रा (जनाजे) में मुस्लिमों से अधिक हिंदुओं की संख्या थी ।

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Author: AK

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