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Jehanabad News: उफनाती नदियों के बीच पानी को तरस रहा 82 बीघे का ऐतिहासिक पनिहास तालाब, सिस्टम की अनदेखी से सूखने की कगार पर काको

Jehanabad News: उफनाती नदियों के बीच पानी को तरस रहा 82 बीघे का ऐतिहासिक पनिहास तालाब, सिस्टम की अनदेखी से सूखने की कगार पर काको
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जहानाबाद/काको। एक ओर जहानाबाद जिले में दरधा, जमुने, मोरहर और फल्गु जैसी नदियां इन दिनों उफान पर हैं। खेत-बधार पानी से लबालब हैं और कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। वहीं दूसरी ओर काको बाजार का ऐतिहासिक पनिहास तालाब बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है। करीब 82 बीघे में फैला यह विशाल तालाब आज लगभग सूखा पड़ा है। यह स्थिति सरकारी योजनाओं, जल संरक्षण के दावों और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है।कभी काको क्षेत्र की जल-संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाने वाला पनिहास आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। तालाब के अधिकांश हिस्से में पानी नहीं है। जहां थोड़ी नमी दिखाई देती है, वहां भी जलकुंभी और गंदगी की मोटी परत जमा है। वर्षों से समुचित सफाई और गाद की उड़ाही नहीं होने के कारण तालाब की जलधारण क्षमता लगातार प्रभावित होने की बात स्थानीय लोग कहते हैं।

नाले का रास्ता बंद होने से पनिहास तक नहीं पहुंच रहा पानी

स्थानीय बुजुर्गों और ग्रामीणों के अनुसार, कभी छरियारी की ओर से आने वाले करड़वा नाले के माध्यम से बरसात का पानी पनिहास तालाब तक पहुंचता था। बारिश के मौसम में नाले का पानी तालाब में जमा होता था, जिससे पूरे इलाके के जलस्तर को बनाए रखने के साथ-साथ कृषि कार्यों में भी मदद मिलती थी।लेकिन समय के साथ नाले के कई हिस्सों में अतिक्रमण, गाद और कचरे का जमाव होने से प्राकृतिक जलप्रवाह बाधित हो गया। ग्रामीणों का आरोप है कि नाले की नियमित उड़ाही और अतिक्रमण हटाने की दिशा में पर्याप्त कार्रवाई नहीं होने के कारण बरसात का पानी पनिहास तक नहीं पहुंच पा रहा है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जब आसपास की नदियों में पानी का तेज बहाव है और बाढ़ का पानी खेतों तक पहुंच रहा है, तब उसी क्षेत्र का ऐतिहासिक तालाब सूखा पड़ा है। यदि प्राकृतिक जलप्रवाह को बहाल कर दिया जाए तो बरसात के अतिरिक्त पानी को तालाब में संग्रहित किया जा सकता है।

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किसानों की चिंता बढ़ी, सिंचाई पर मंडराया संकट

पनिहास केवल एक ऐतिहासिक तालाब नहीं है, बल्कि काको और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि व्यवस्था से भी जुड़ा जलस्रोत रहा है। स्थानीय किसानों के अनुसार, तालाब में पानी रहने से आसपास की कृषि भूमि को सिंचाई में सुविधा मिलती थी और भूजल स्तर भी संतुलित रहता था। तालाब के सूखे रहने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पनिहास में पानी नहीं पहुंचा और इसके जलस्रोत को पुनर्जीवित नहीं किया गया, तो आने वाले समय में सिंचाई के साथ-साथ भूजल संकट भी गहरा सकता है।

जलकुंभी और गाद ने भी बिगाड़ी स्थिति

तालाब के कई हिस्सों में जलकुंभी का व्यापक फैलाव है। इसके अलावा लंबे समय से गाद जमा होने के कारण तालाब की गहराई और पानी संग्रह करने की क्षमता प्रभावित हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बड़े स्तर पर मशीनों के माध्यम से जलकुंभी हटाने और तालाब की गहरी उड़ाही का काम कराया जाए तो इसमें बड़ी मात्रा में वर्षा जल का संचयन किया जा सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की

स्थानीय किसान सत्येंद्र कुमार ने कहा कि काको के आसपास से कई नदियां बहती हैं और इस समय उनमें पानी भी है, लेकिन पनिहास सूखा पड़ा है। उनका कहना है कि यदि करड़वा नाले की समय रहते सफाई और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती, तो बरसात का पानी सीधे पनिहास में पहुंच सकता था। इससे एक तरफ अतिरिक्त पानी का संरक्षण होता और दूसरी तरफ किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलता। वहीं स्थानीय निवासी संजय कुमार ने कहा कि पनिहास का सूखा रहना केवल किसानों की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे काको क्षेत्र के भूजल स्तर के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि तालाब में जलकुंभी और गाद का जमाव इसकी स्थिति को और खराब कर रहा है। सरकार की ओर से जल संरक्षण और जल-जीवन-हरियाली जैसे अभियानों पर जोर दिया जाता है, ऐसे में इस ऐतिहासिक जलस्रोत के जीर्णोद्धार की जरूरत है।

समाधान के लिए उठाने होंगे ठोस कदम

स्थानीय लोगों का कहना है कि पनिहास को बचाने के लिए प्रशासन को तत्काल ठोस पहल करनी चाहिए। इसके तहत—

  • छरियारी से आने वाले करड़वा नाले की मापी और जांच कराकर अतिक्रमण हटाया जाए।
  • नाले की व्यापक उड़ाही और सफाई कराकर प्राकृतिक जलप्रवाह बहाल किया जाए।
  • करीब 82 बीघे में फैले पनिहास तालाब की गहरी उड़ाही कराई जाए।
  • तालाब में फैली जलकुंभी और कचरे को मशीनों के माध्यम से हटाया जाए।
  • बरसात के पानी को नाले के माध्यम से पनिहास तक पहुंचाने की स्थायी व्यवस्था की जाए।
  • तालाब के संरक्षण के लिए दीर्घकालिक योजना बनाकर नियमित निगरानी की जाए।

काको के लोगों के लिए पनिहास महज एक तालाब नहीं, बल्कि उनकी कृषि, जल और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण जलस्रोत है। विडंबना यह है कि जिस समय आसपास की नदियां उफान पर हैं और अतिरिक्त पानी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है, उसी समय पनिहास पानी के लिए तरस रहा है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस ऐतिहासिक जलस्रोत की बदहाली दूर कर करड़वा नाले का रास्ता साफ करेगा, या फिर 82 बीघे का यह पनिहास आने वाले वर्षों में सिर्फ इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह जाएगा?

Jehanabad News: Amidst the overflowing rivers, the historic 82-bigha Panihas pond is thirsty for water, Kako is on the verge of drying up due to the neglect of the system.

Barun Kumar
Author: Barun Kumar

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