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राष्ट्रपति जैसी गरिमामयी पद को भी भाजपा ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए किया शर्मसार

नई दिल्ली, 21 जुलाई। राष्ट्रपति, देश और विशेष रूप से भारत जैसे लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए एक बेहद गरिमामयी पद। भारत को आजाद हुए 75 साल हो चुके हैं और पूरा देश इस वक्त अमृत महोत्सव मना रहा है लेकिन यह सब ऐसा लग रहा है कि सिर्फ कागजों में ही लिखकर सिमट चुका है। … Read more

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नई दिल्ली, 21 जुलाई। राष्ट्रपति, देश और विशेष रूप से भारत जैसे लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए एक बेहद गरिमामयी पद। भारत को आजाद हुए 75 साल हो चुके हैं और पूरा देश इस वक्त अमृत महोत्सव मना रहा है लेकिन यह सब ऐसा लग रहा है कि सिर्फ कागजों में ही लिखकर सिमट चुका है। कारण कि जब इसे धरातल पर ढूंढने की कोशिश की जाती है तो राष्ट्रपति जैसे गरिमामयी पद पर राजनीति कर इसे सड़को पर शर्मसार किया जा रहा है जो कि इतिहास में पहली बार ही देखने को मिला और वह भी देश की राजधानी दिल्ली में।

देश के 15वें राष्ट्रपति के रूप में आज द्रौपदी मुर्मू के नाम पर मुहर लग गई। यशवंत सिन्हा को हार का सामना करना पड़ा लेकिन भाजपा को शायद यह समझने में देरी हो गई कि राष्ट्रपति किसी पार्टी का नहीं बल्कि राजननीति से परे और बढ़कर होता है जिसपर राजनीति करना ठीक वैसा ही है जैसे सोडियम के ऊपर पानी डालना और भाजपा ने आज वही काम किया है जिससे दिल्ली की राजनीतिक गलियारों में आग सी लग चुकी है। क्योंकि राष्ट्रपति पद के लिए प्रत्याशी का चुनाव होने तक एनडीए या यूपीए का कहना एक समझ हो सकती है लेकिन राष्ट्रपति देश का होता है पार्टी विशेष का नहीं।

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आज की राजनीतिक परिस्थितियां भी कुछ ऐसी ही है कि कब संविधान राजनीति रूप ले लें और कब संवैधानिक पद पर बैठे इंसान को जाति, धर्म और समाज के अन्य अनछुए पहलुओं से जोड़ा जाए, किसी को नहीं पता। पहले से ही देश का चौथा स्तंभ कहे जाने वाली पत्रकारिता गायब हो चुकी है और अब ऐसा लगता है कि विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका भी एक हो चुकी है। दिल्ली भाजपा का भी कुछ ऐसा ही हाल चल रहा है। द्रौपदी मुर्मू के अभिनंदन यात्रा के लिए सबसे पहले 20 जुलाई को मैसेज आता है कि बृहस्पतिवार को होने वाले अभिनंदन यात्रा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा और दिल्ली विंग के अध्यक्ष आदेश गुप्ता रहेंगे। इस बात को सभी मेन स्ट्रीम मीडिया ने प्रमुखता से जगह दी। बहस का मुद्दा भी बना।

बात जब आज रोड शो की आई तो भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा का आना अचानक कैंसिल हो गया। इसके पीछे कारण बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट के साथ जे पी नड्डा भी द्रौपदी मुर्मू से मिलने उनके आवास पर जाएंगे। हालांकि विपक्ष ने तो यहां तक हमला बोला है कि जब इस पर कड़ी बहस होने लगी कि एक राष्ट्रपति की जीत पर पार्टी विशेष का जश्न उस राष्ट्रपति पद की गरिमा को तारतार करने पर लगा हुआ है।

इसलिए भाजपा अध्यक्ष इस यात्रा में आने से उलट गए। लेकिन शायद ये बातें दिल्ली भाजपा के प्रतिनिधि को नहीं समझ आ पाई। हालांकि कुछ मीडिया संस्थान की यह भी शिकायत आई कि दिल्ली भाजपा का कोई भी पदाधिकारी इस द्रौपदी मुर्मू के बारे में कोई बयान नहीं दे रहा है लेकिन फिर ठीक इसके उलट बड़े धूमधाम के साथ भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली के सभी सांसद जिसमें केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी, मनोज तिवारी, नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी, डॉक्टर हर्षवर्धन सहित तमाम नेता की मौजूदगी में अभिनंदन यात्रा का निकाला जाना कही न कही इस मामले पर भाजपा की धुंधली नीति को दर्शाता है।

बात यही तक नहीं रुकी। ढोल नगाड़ों के साथ निकाली गई यह अभिनंदन यात्रा पंडित पंत मार्ग से होते हुए गोल डाकखाना-अशोका रोड- रायसीना मार्ग से होते हुए राजपथ पहुँची। राजपथ पर रोड शो खत्म तो हुआ लेकिन जिस अंदाज में खत्म हुआ उसकी भी चर्चाएं शुरू हो गई। राजपथ तक जिस वैन में बैठकर प्रदेश भाजपा पहुँचे वे वही उस गाड़ी के ऊपर ही नाचने लगे। मतलब ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे मानो भाजपा का कोई ‘कैंडिडेट’ जीता हो। मीडिया में भी उस वीडियो को खुद प्रदेश भाजपा ने भेजा है। विपक्ष पहले ही मोदी सरकार पर संविधान को ताख पर रखने, जांच एजेंसियों को अपने इशारों पर काम करने को विवश करने, विपक्ष को प्रताड़ित और गिरफ्तारी से डराने जैसे सैकड़ों आरोप लगाता रहा है और उसमें भी इस तरह की अभिननन्द यात्रा कई सारे प्रश्नचिन्ह लगाता है।

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Author: AK

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