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वट सावित्री पूजा आज, पति की लंबी आयु के लिए सुहागिन महिलाएं रखती हैं व्रत, जानिए इसका पौराणिक महत्व

आज यानी की 26 मई को वट सावित्री व्रत रखा जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को वट सावित्री व्रत करने की परंपरा होती है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और सोलह श्रृंगार कर वट के पेड़ की पूजा करती हैं। … Read more

Vat Savitri Puja

आज यानी की 26 मई को वट सावित्री व्रत रखा जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को वट सावित्री व्रत करने की परंपरा होती है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और सोलह श्रृंगार कर वट के पेड़ की पूजा करती हैं। इस व्रत का महत्व करवा चौथ जैसा ही है। मान्यता है कि इस व्रत से पति की उम्र लंबी होती है और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा करती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, माता सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही अपने मृत पति सत्यवान को यमराज से वापस पाया था। तभी से वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। हिंदू शास्त्रों में वट वृक्ष को बेहद पूजनीय माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश- तीनों देवों का वास होता है। आइए आपको वट सावित्री व्रत की पूजन विधि, सामग्री, शुभ मुहूर्त और कथा के बारे में बताते हैं।

वट सावित्री व्रत मूहर्त और शुभ संयोग

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इस वर्ष 2025 में वट सावित्री व्रत पर कल भरणी नक्षत्र, शोभन योग और अतिगण्ड योग का शुभ संयोग बन रहा है। इसके साथ ही, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 से दोपहर 12:42 तक रहेगा। यह समय व्रत और पूजा के लिए अत्यंत फलदायक माना जाता है।
खास बात यह है कि इस बार वट सावित्री व्रत सोमवार को पड़ रहा है, जिससे यह सोमवती अमावस्या भी बन रही है। यह संयोग अत्यंत दुर्लभ और सौभाग्यशाली माना जाता है। साथ ही, चंद्रमा इस दिन अपनी उच्च राशि वृषभ में संचार करेगा, जो शुभ संकेत है। यह ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 26 मई यानी आज दोपहर 12 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 27 मई यानी कल सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर खत्म होगा।

वट सावित्री व्रत पूजन विधि

इस दिन वट वृक्ष के नीचे सावित्री सत्यवान और यमराज की मूर्ति स्थापित करें। आप चाहें तो इनकी पूजा मानसिक रूप से भी कर सकते हैं। वट वृक्ष की जड़ में जल डालें, फूल-धूप और मिठाई से पूजा करें। कच्चा सूत लेकर वट वृक्ष की परिक्रमा करते जाएं, सूत तने में लपेटते जाएं। उसके बाद 7 बार परिक्रमा करें, हाथ में भीगा चना लेकर सावित्री सत्यवान की कथा सुने। फिर भीगा चना, कुछ धन और वस्त्र अपनी सास को देकर उनका आशीर्वाद लें।

क्यों कि जाती है वट वृक्ष की पूजा

शास्त्रों के अनुसार वट वृक्ष (बरगद) एक देव वृक्ष माना जाता है। इस वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु, महेश और ,सावित्री भी रहते हैं। प्रलय के अंत में श्री कृष्ण भी इसी वृक्ष के पत्ते पर प्रकट हुए थे। तुलसीदास ने वट वृक्ष को तीर्थराज का छत्र कहा है। ये वृक्ष न केवल अत्यंत पवित्र है बल्कि काफी ज्यादा दीर्घायु वाला भी है। विवाह, पूजा आदि समय भी लंबी आयु, शक्ति, धार्मिक महत्व को ध्यान में रखकर इस वृक्ष की पूजा की जाती है। साथ हीं पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए भी इस वृक्ष को ज्यादा महत्व दिया गया है।

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Author: AK

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