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राहुल गांधी की एक सलाह और बदल गई थलापति विजय की राजनीति

थलापति विजय 2009 में कांग्रेस में शामिल होना चाहते थे, लेकिन राहुल गांधी की एक सलाह ने उनकी राजनीतिक दिशा बदल दी। जानिए पूरी कहानी। Thalapathy Vijay’s Political Journey Changed After Rahul Gandhi Meeting तमिलनाडु की राजनीति में विजय का बड़ा उभार तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों अभिनेता से नेता बने थलापति विजय के इर्द-गिर्द … Read more

Thalapathy Vijay’s Political Journey Changed After Rahul Gandhi Meeting

थलापति विजय 2009 में कांग्रेस में शामिल होना चाहते थे, लेकिन राहुल गांधी की एक सलाह ने उनकी राजनीतिक दिशा बदल दी। जानिए पूरी कहानी।

Thalapathy Vijay’s Political Journey Changed After Rahul Gandhi Meeting


तमिलनाडु की राजनीति में विजय का बड़ा उभार

तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों अभिनेता से नेता बने थलापति विजय के इर्द-गिर्द घूम रही है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनने का दावा पेश किया है। हालांकि बहुमत का आंकड़ा अभी भी उनके लिए चुनौती बना हुआ है, लेकिन विजय अब तमिलनाडु की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा बन चुके हैं।

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लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आज अपनी अलग राजनीतिक पहचान बना चुके विजय कभी कांग्रेस पार्टी में शामिल होना चाहते थे। साल 2009 में दिल्ली में हुई एक मुलाकात ने उनकी राजनीतिक दिशा पूरी तरह बदल दी। कहा जाता है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक सलाह के बाद विजय ने अपना रास्ता बदल लिया और बाद में खुद की पार्टी बनाकर राजनीति में नई पहचान बनाई।

आज जब विजय मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में हैं, तब 17 साल पुरानी वह कहानी फिर चर्चा में आ गई है।


2009 में कांग्रेस में शामिल होना चाहते थे विजय

दिल्ली पहुंचे थे पिता के साथ

रिपोर्टों के अनुसार, साल 2009 में थलापति विजय कांग्रेस पार्टी से जुड़ना चाहते थे। उस समय वह दक्षिण भारत के सबसे लोकप्रिय फिल्म सितारों में शामिल थे और राजनीति में एंट्री की तैयारी कर रहे थे।

बताया जाता है कि विजय अपने पिता एस.ए. चंद्रशेखर और कांग्रेस नेता गोपीनाथ पलानियप्पन के साथ दिल्ली पहुंचे थे। उनका उद्देश्य कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात करना था।

राहुल गांधी से हुई खास मुलाकात

उस समय राहुल गांधी कांग्रेस में महासचिव थे और युवाओं को पार्टी से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे थे। इसी दौरान विजय की राहुल गांधी से एक अहम मुलाकात हुई।

राजनीतिक गलियारों में इसे “सीक्रेट मीटिंग” के तौर पर भी याद किया जाता है क्योंकि उस समय इसकी ज्यादा चर्चा सार्वजनिक रूप से नहीं हुई थी।


राहुल गांधी ने क्या सलाह दी थी?

Thalapathy Vijay’s Political Journey Changed After Rahul Gandhi Meeting

पहले खुद को साबित करने की बात

सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने विजय को सीधे पार्टी में बड़ी भूमिका देने के बजाय सुझाव दिया कि वह पहले यूथ कांग्रेस के जरिए अपनी राजनीतिक क्षमता साबित करें।

यह सलाह विजय को शायद उम्मीद के मुताबिक नहीं लगी।

विधायक बनने की थी इच्छा?

कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि विजय विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा रखते थे। हालांकि दूसरी तरफ कुछ नेताओं का कहना था कि विजय सिर्फ कांग्रेस का सदस्य बनना चाहते थे और उन्होंने किसी टिकट की मांग नहीं की थी।


विजय के पिता की क्या भूमिका थी?

कांग्रेस विचारधारा से प्रभावित थे पिता

रिपोर्टों के मुताबिक विजय के पिता एस.ए. चंद्रशेखर कांग्रेस की विचारधारा से प्रभावित थे। माना जाता है कि उन्होंने ही विजय को कांग्रेस से जुड़ने के लिए प्रेरित किया था।

उस समय कांग्रेस तमिलनाडु में डीएमके के साथ गठबंधन में थी और राज्य की राजनीति में उसका प्रभाव बना हुआ था।


क्या DMK ने रोकी विजय की एंट्री?

राजनीतिक विरोध की चर्चाएं

कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उस समय डीएमके नहीं चाहती थी कि विजय कांग्रेस में शामिल हों।

स्टार पावर से डर?

विजय उस दौर में तमिल सिनेमा के बड़े सुपरस्टार बन चुके थे। उनके करोड़ों प्रशंसक थे और युवा वर्ग में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही थी।

ऐसे में माना जाता है कि उनकी राजनीतिक एंट्री कई दलों के लिए चुनौती बन सकती थी।

हालांकि इस दावे की कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।


कांग्रेस ने क्या खो दिया?

एक बड़े जनाधार वाले चेहरे का नुकसान

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस उस समय विजय को पार्टी में शामिल कर लेती, तो तमिलनाडु में उसका आधार मजबूत हो सकता था।

युवाओं के बीच प्रभाव

विजय की लोकप्रियता खासकर युवाओं और शहरी मतदाताओं के बीच काफी मजबूत रही है। यही वजह है कि उनकी सभाओं में भारी भीड़ देखने को मिलती है।

कई विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस ने उस समय एक बड़े जनाधार वाले चेहरे को खो दिया।


विजय ने क्यों चुना अलग रास्ता?

राजनीति से कुछ समय बनाई दूरी

राहुल गांधी से मुलाकात के बाद विजय ने तत्काल राजनीति में सक्रिय होने का फैसला नहीं लिया। वह चेन्नई लौट गए और फिल्मों पर ध्यान केंद्रित करने लगे।

फिल्मों में लगातार सफलता

अगले कई वर्षों तक विजय तमिल सिनेमा में लगातार सुपरहिट फिल्में देते रहे। उनकी लोकप्रियता और बढ़ती गई।

धीरे-धीरे उन्होंने अपनी अलग सामाजिक और राजनीतिक पहचान बनानी शुरू की।


TVK की स्थापना और राजनीतिक धमाका

अपनी पार्टी बनाकर बदला खेल

कई वर्षों की तैयारी के बाद विजय ने अपनी राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) बनाई।

राजनीतिक विश्लेषकों को शुरुआत में लगा कि यह सिर्फ फिल्मी लोकप्रियता तक सीमित रहेगा, लेकिन चुनाव परिणामों ने सभी को चौंका दिया।

108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में TVK ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल कर लिया।

यह परिणाम तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति के लिए बड़ा झटका माना गया।


DMK और AIADMK के लिए क्यों बढ़ी चुनौती?

तीसरे विकल्प के रूप में उभरे विजय

दशकों से तमिलनाडु की राजनीति DMK और AIADMK के बीच घूमती रही है। लेकिन विजय ने खुद को तीसरे मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया।

युवाओं और नए मतदाताओं का समर्थन

TVK को खासकर पहली बार वोट देने वाले युवाओं और शहरी क्षेत्रों में मजबूत समर्थन मिला।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विजय की साफ-सुथरी छवि और स्टार अपील ने उन्हें फायदा पहुंचाया।


क्या राहुल गांधी का फैसला विजय के लिए सही साबित हुआ?

अलग पहचान बनाने का मौका मिला

कई राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर विजय 2009 में कांग्रेस में शामिल हो जाते, तो शायद वह पार्टी के भीतर ही सीमित रह जाते।

खुद का राजनीतिक वजूद

आज विजय की अपनी पार्टी है, अपना वोट बैंक है और वह मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में शामिल हैं।

इस लिहाज से देखा जाए तो राहुल गांधी की उस सलाह ने विजय को अलग राजनीतिक रास्ता चुनने का मौका दिया।


सरकार गठन में क्यों फंसा है मामला?

बहुमत से अभी भी दूर TVK

हालांकि TVK सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा अभी भी उसके लिए चुनौती बना हुआ है।

विजय के पास अपने 107 विधायक हैं और सहयोगियों के साथ उनकी संख्या 116 तक पहुंची है।

एक सीट की कमी

सरकार बनाने के लिए 117 विधायकों की जरूरत है। इसी वजह से तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।


राज्यपाल और गठबंधन राजनीति की भूमिका

लगातार चल रही बैठकों का दौर

विजय लगातार सहयोगी दलों और राज्यपाल से बातचीत कर रहे हैं।

इस बीच DMK और AIADMK के संभावित गठबंधन की चर्चाएं भी तेज हैं।

कांग्रेस का समर्थन

दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस अब विजय को समर्थन दे रही है, जबकि कभी विजय कांग्रेस में शामिल होना चाहते थे।


तमिलनाडु की राजनीति में नया अध्याय

फिल्म स्टार से राजनीतिक नेता तक का सफर

विजय का सफर सिर्फ फिल्मों से राजनीति तक आने की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी भी है जिसमें एक सुपरस्टार ने खुद की राजनीतिक पहचान बनाई।

नई पीढ़ी की राजनीति

उनकी राजनीति पारंपरिक द्रविड़ दलों से अलग दिखाई देती है। यही वजह है कि युवा मतदाता तेजी से उनकी ओर आकर्षित हुए हैं।


निष्कर्ष

थलापति विजय और राहुल गांधी की 2009 वाली मुलाकात आज फिर चर्चा में है क्योंकि उसी मुलाकात ने शायद विजय की राजनीतिक दिशा बदल दी थी। कांग्रेस में शामिल न हो पाने के बाद विजय ने अपना अलग रास्ता चुना और आज वह तमिलनाडु की राजनीति के सबसे बड़े चेहरों में शामिल हैं।

17 साल पहले जो अभिनेता राजनीति में प्रवेश का रास्ता खोज रहा था, आज वही नेता मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में खड़ा है। राजनीति में समय और फैसले किस तरह भविष्य बदल देते हैं, विजय की कहानी इसका बड़ा उदाहरण बन चुकी है।


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AK
Author: AK

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