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Bangladesh Election 2026: ढाका की सत्ता बदली, क्या इस्लामाबाद से नजदीकी बढ़ेगी?

Bangladesh Election 2026: ढाका की सत्ता बदली, क्या इस्लामाबाद से नजदीकी बढ़ेगी?
Tarique Rahman to Take Oath as Bangladesh PM, 13 Nations Invited

तारिक रहमान की संभावित ताजपोशी के बाद बांग्लादेश-पाकिस्तान रिश्तों, विदेश नीति और दक्षिण एशिया की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा, जानें विस्तार से।

Tarique Rahman’s Rise and Bangladesh-Pakistan Ties

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प्रस्तावना: ढाका की राजनीति में बड़ा बदलाव

बांग्लादेश की राजनीति में करीब दो दशक बाद बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रचंड जीत के साथ तारिक रहमान का देश का अगला प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। 17 साल के स्वनिर्वासन के बाद लंदन से लौटे तारिक रहमान अब सत्ता की दहलीज पर खड़े हैं। उनके नेतृत्व में बांग्लादेश की विदेश नीति, खासकर पाकिस्तान और भारत के साथ संबंधों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

‘न दिल्ली, न पिंडी, सबसे पहले बांग्लादेश’ का नारा देकर उन्होंने साफ संकेत दिया है कि उनकी प्राथमिकता राष्ट्रीय हित होगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या उनकी सरकार पाकिस्तान के साथ रिश्तों को और मजबूत करेगी या संतुलित दूरी बनाए रखेगी?


कौन हैं तारिक रहमान?

पारिवारिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक विरासत

तारिक रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य नेता जनरल जियाउर रहमान के बेटे हैं। उनकी मां खालिदा जिया तीन बार प्रधानमंत्री रह चुकी हैं और लंबे समय तक बांग्लादेश की राजनीति में प्रमुख चेहरा रही हैं।

2001 में जब बीएनपी सत्ता में आई थी, तब तारिक रहमान को समानांतर शक्ति केंद्र माना जाता था। आरोप लगे कि कैबिनेट नियुक्तियों और सरकारी ठेकों में उनका प्रभाव था। अमेरिकी कूटनीतिक केबल में उन्हें “डार्क प्रिंस” तक कहा गया था। हालांकि, उनके समर्थक इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हैं।

17 साल का निर्वासन और वापसी

भ्रष्टाचार और हिंसा के आरोपों के बाद वे लंदन में रह रहे थे। दिसंबर 2025 में उनकी वापसी ने राजनीतिक माहौल बदल दिया। अब चुनाव में मिली सफलता ने उन्हें राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित कर दिया है।


बांग्लादेश चुनाव और सत्ता में वापसी

चुनावी नतीजों की तस्वीर

अनौपचारिक नतीजों के अनुसार, बीएनपी ने 151 सीटों का बहुमत पार कर लिया है। कई सीटों पर पार्टी बढ़त बनाए हुए है। यह जीत सिर्फ एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि राजनीतिक वापसी का प्रतीक है।

करीब 18 महीने पहले अगस्त 2024 में शेख हसीना के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार ने सत्ता संभाली थी। अब सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

जनता का जनादेश क्यों बदला?

महंगाई, बेरोजगारी और शासन में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों ने जनता को बदलाव की ओर प्रेरित किया। बीएनपी ने आर्थिक सुधार, युवाओं के लिए रोजगार और संतुलित विदेश नीति का वादा किया।


विदेश नीति: ‘सबसे पहले बांग्लादेश’ का अर्थ

भारत के साथ रिश्ते

तारिक रहमान ने चुनावी रैलियों में भारत के साथ “बराबरी और आपसी सम्मान” पर आधारित संबंधों की बात कही। इसका मतलब है कि वे किसी एक पक्ष पर निर्भरता से बचना चाहते हैं।

भारत-बांग्लादेश संबंध पहले से व्यापार, सुरक्षा और कनेक्टिविटी के स्तर पर मजबूत हैं। नई सरकार इन संबंधों को जारी रखेगी, लेकिन ज्यादा संतुलन के साथ।

चीन के साथ संतुलन

बीएनपी ने चीन और भारत दोनों के साथ संतुलित रिश्तों पर जोर दिया है। बांग्लादेश पहले से ही चीन के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का बड़ा लाभार्थी रहा है। आने वाले समय में यह संतुलन दक्षिण एशिया की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।

SAARC और ASEAN की दिशा

तारिक रहमान ने SAARC को फिर से सक्रिय करने और ASEAN की सदस्यता की कोशिश का संकेत दिया है। इससे बांग्लादेश की क्षेत्रीय भूमिका मजबूत हो सकती है।


बांग्लादेश-पाकिस्तान रिश्ते: नया अध्याय या पुराना रास्ता?

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1971 के मुक्ति संग्राम के बाद से बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्ते जटिल रहे हैं। हालांकि समय-समय पर दोनों देशों ने संबंध सुधारने की कोशिश की है।

अंतरिम सरकार के दौरान दोनों देशों के सैन्य और राजनीतिक अधिकारियों ने एक-दूसरे के दौरे किए। समुद्री मार्ग से सीधा व्यापार शुरू हुआ और सैन्य उपकरणों की खरीद पर भी चर्चा हुई।

क्या बदलेगा अब?

बीएनपी का पाकिस्तान के साथ पुराना रिश्ता रहा है। पार्टी ने अतीत में जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन किया था, जिसे पाकिस्तान समर्थक माना जाता है। लेकिन अब राजनीतिक समीकरण बदल चुके हैं।

तारिक रहमान का नारा यह संकेत देता है कि वे पाकिस्तान के साथ संबंध रखेंगे, लेकिन राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार पाकिस्तान के साथ सहयोग तो बढ़ा सकती है, पर पूरी तरह झुकाव की नीति नहीं अपनाएगी।


पाकिस्तान के लिए बीएनपी की जीत के मायने

अवसर और सीमाएं

पाकिस्तान के लिए यह अवसर है कि वह बांग्लादेश के साथ संबंधों को सुधार सके। लेकिन ‘न दिल्ली, न पिंडी’ का संदेश साफ करता है कि बांग्लादेश अब किसी भी देश के प्रभाव में नहीं रहना चाहता।

नई सरकार पाकिस्तान के साथ व्यापार, रक्षा और कूटनीतिक संवाद जारी रख सकती है, परंतु सावधानी के साथ।

क्षेत्रीय राजनीति पर असर

दक्षिण एशिया में भारत, चीन और पाकिस्तान के बीच शक्ति संतुलन पहले से ही संवेदनशील है। ऐसे में बांग्लादेश की नई विदेश नीति क्षेत्रीय राजनीति को नया आयाम दे सकती है।


आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां

आर्थिक सुधार की जरूरत

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था ने पिछले दशक में तेजी से विकास किया है, लेकिन हाल के वर्षों में महंगाई और विदेशी मुद्रा संकट जैसी चुनौतियां सामने आईं। नई सरकार के सामने आर्थिक स्थिरता बहाल करना बड़ी जिम्मेदारी होगी।

युवा और रोजगार

देश की बड़ी आबादी युवा है। रोजगार सृजन और कौशल विकास पर ध्यान देना जरूरी होगा। यदि सरकार इन मुद्दों पर सफल होती है, तो उसकी लोकप्रियता मजबूत होगी।


निष्कर्ष: संतुलन की राह पर ढाका

तारिक रहमान की संभावित ताजपोशी बांग्लादेश की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ है। उनकी विदेश नीति का मूल मंत्र ‘सबसे पहले बांग्लादेश’ है, जो राष्ट्रवादी और संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

बांग्लादेश-पाकिस्तान रिश्तों में सुधार की संभावना है, लेकिन यह सुधार राष्ट्रीय हितों की कसौटी पर परखा जाएगा। भारत और चीन के साथ संतुलन बनाना भी आसान नहीं होगा।

आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि नई सरकार दक्षिण एशिया की राजनीति में किस तरह की भूमिका निभाती है। फिलहाल इतना तय है कि ढाका में सत्ता परिवर्तन ने क्षेत्रीय समीकरणों को नई दिशा दे दी है।

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Author: AK

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