गुरु, जनवरी 15, 2026

Shattila Ekadashi 2026: शटतिला एकादशी 2026, मकर संक्रांति पर बना दुर्लभ योग

Shattila Ekadashi 2026 Rare Makar Sankranti Yoga

शटतिला एकादशी 2026 और मकर संक्रांति का 23 साल बाद दुर्लभ संयोग, गंगा स्नान, तिल दान और विष्णु पूजा का विशेष महत्व।

Shattila Ekadashi 2026: Rare Makar Sankranti Yoga


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प्रस्तावना

साल 2026 की शुरुआत धार्मिक आस्था और पुण्य से भरी हुई रही, जब शटतिला एकादशी और मकर संक्रांति का दुर्लभ संयोग 23 वर्षों बाद बना। इस विशेष योग ने देशभर के श्रद्धालुओं को गंगा घाटों की ओर आकर्षित किया। पटना से लेकर हरिद्वार और प्रयागराज तक लोगों ने पवित्र गंगा में स्नान कर तिल दान किया और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने की कामना की। यह अवसर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी लोगों को जोड़ने वाला साबित हुआ।


शटतिला एकादशी 2026 का विशेष संयोग

शटतिला एकादशी हर वर्ष माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को आती है। लेकिन वर्ष 2026 में यह तिथि मकर संक्रांति के साथ एक ही दिन पड़ने से इसका महत्व कई गुना बढ़ गया। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसा योग 23 वर्षों बाद बनता है, जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उसी दिन भगवान विष्णु की प्रिय एकादशी आती है।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया गंगा स्नान, तिल दान और विष्णु पूजा जीवन के पापों को नष्ट कर देता है और मनोकामनाएं पूर्ण करता है।


पटना के गंगा घाटों पर उमड़ी आस्था की लहर

भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़

पटना के बांस घाट, कंगन घाट, दीघा घाट, गायघाट और कलेक्ट्रेट घाट पर सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। ठंड के बावजूद लोग गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के लिए घंटों कतार में खड़े दिखे। हर ओर “हर हर गंगे” और “जय श्री विष्णु” के जयकारे गूंज रहे थे।

स्नान और पूजा का विशेष महत्व

गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु घाटों पर ही सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा करते नजर आए। कई परिवारों ने सामूहिक रूप से हवन और तिल अर्पण किया। महिलाओं ने घर की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखा और बुजुर्गों ने दान-पुण्य किया।


शटतिला एकादशी का धार्मिक महत्व

तिल से जुड़े छह पुण्य कर्म

शास्त्रों के अनुसार शटतिला एकादशी के दिन तिल से जुड़े छह कार्य करने चाहिए:

  1. तिल से स्नान
  2. तिल से उबटन
  3. तिल का होम
  4. तिल का दान
  5. तिल का भक्षण
  6. तिल जल अर्पण

इन छह कर्मों से शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि होती है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित होता है, इसलिए इसे “श्रीहरि व्रत” भी कहा जाता है।


मकर संक्रांति 2026 और उसका महत्व

मकर संक्रांति वह दिन होता है जब सूर्य उत्तरायण होते हैं और मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसे नए जीवन, नई ऊर्जा और शुभ समय की शुरुआत माना जाता है। इस दिन दान और स्नान का विशेष फल बताया गया है।

2026 में शटतिला एकादशी के साथ यह पर्व पड़ने से इसका महत्व और बढ़ गया। लोग मानते हैं कि इस दिन किया गया दान और पूजा कई जन्मों के पापों को नष्ट कर देता है।


तिल दान और खिचड़ी का महत्व

मकर संक्रांति और शटतिला एकादशी पर तिल, गुड़ और खिचड़ी का दान विशेष माना जाता है। पटना के घाटों पर अस्थायी स्टॉल लगाए गए थे, जहां जरूरतमंदों को तिल, गुड़, कंबल और अन्न वितरित किया गया।

तिल को शुद्धता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, जबकि गुड़ जीवन में मिठास और सुख का संकेत देता है। इस दिन इनका दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।


प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था

घाटों पर कड़ी निगरानी

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे। घाटों पर गोताखोर, पुलिस बल और मजिस्ट्रेट तैनात किए गए थे। एनडीआरएफ की टीम भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट पर थी।

स्वच्छता और सुविधा

नगर निगम की ओर से घाटों पर सफाई, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था की गई थी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।


श्रद्धालुओं की आस्था और अनुभव

कई श्रद्धालुओं ने बताया कि इस दुर्लभ योग में गंगा स्नान करने से उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिली। कुछ लोगों ने कहा कि वे वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। परिवारों ने इसे एक धार्मिक यात्रा की तरह मनाया।


देशभर में दिखा धार्मिक उत्साह

केवल पटना ही नहीं, बल्कि वाराणसी, प्रयागराज, हरिद्वार और कोलकाता जैसे शहरों में भी गंगा और अन्य पवित्र नदियों के किनारे लाखों लोगों ने स्नान और दान किया। Shattila Ekadashi 2026 और Makar Sankranti 2026 सोशल मीडिया और समाचारों में भी छाए रहे।


आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश

यह पर्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग का संदेश भी लेकर आया। लोगों ने गरीबों को भोजन, कपड़े और जरूरी वस्तुएं दान कीं, जिससे सामाजिक एकता मजबूत हुई।


निष्कर्ष

शटतिला एकादशी 2026 और मकर संक्रांति का यह दुर्लभ संयोग श्रद्धा, आस्था और पुण्य का प्रतीक बन गया। गंगा स्नान, तिल दान और भगवान विष्णु पूजा के जरिए लोगों ने न केवल आध्यात्मिक लाभ पाया, बल्कि समाज में एकता और सेवा का भाव भी बढ़ाया। ऐसे पावन अवसर भारतीय संस्कृति की गहराई और उसकी निरंतरता को दर्शाते हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों को जोड़ते रहते हैं।

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Author: AK

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