राज्यसभा चुनाव 2026 में जेडीयू की दो कार्यकाल सीमा नीति से हरिवंश नारायण और रामनाथ ठाकुर की उम्मीदवारी पर संकट, जानें बिहार का पूरा राजनीतिक गणित।
Rajya Sabha Poll 2026: Harivansh, Thakur in Trouble
राज्यसभा चुनाव 2026: हरिवंश-रामनाथ पर संकट, क्या लागू होगा नीतीश का नियम?
भारत की राजनीति में राज्यसभा चुनाव हमेशा से बेहद अहम माने जाते रहे हैं, लेकिन इस बार बिहार में होने वाला राज्यसभा चुनाव 2026 कई कारणों से खास चर्चा में है। इसकी सबसे बड़ी वजह जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की वह आंतरिक नीति है, जिसके तहत किसी भी नेता को दो से ज्यादा बार राज्यसभा भेजने के पक्ष में पार्टी नहीं मानी जाती। इसी नीति के कारण राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और वरिष्ठ नेता रामनाथ ठाकुर की उम्मीदवारी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने जा रहा है और राजनीतिक गलियारों में यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी पुरानी नीति पर कायम रहेंगे या इस बार अपवाद किया जाएगा।
राज्यसभा चुनाव 2026 का कार्यक्रम और महत्व
निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। नामांकन प्रक्रिया 26 फरवरी से शुरू होगी और मतदान 16 मार्च को कराया जाएगा। बिहार की जिन पांच सीटों पर चुनाव होना है, उनमें जेडीयू, आरजेडी और अन्य दलों के सदस्य शामिल हैं, जिनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
राज्यसभा संसद का उच्च सदन है और इसमें भेजे जाने वाले सांसदों का चयन राज्य विधानसभा के निर्वाचित विधायक करते हैं। इसलिए विधानसभा में जिस गठबंधन का बहुमत होता है, उसे राज्यसभा में भी अधिक सीटें मिलती हैं।
जेडीयू की दो कार्यकाल सीमा की नीति क्या है?
तीसरे कार्यकाल पर रोक का पुराना फैसला
जेडीयू की यह नीति नई नहीं है। कुछ वर्ष पहले पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह को तीसरी बार राज्यसभा भेजने से इनकार कर दिया था। उस समय पार्टी ने स्पष्ट किया था कि किसी भी नेता को दो से अधिक कार्यकाल नहीं दिया जाएगा।
इस फैसले को पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन और नए नेताओं को मौका देने की रणनीति के रूप में देखा गया था।
अब हरिवंश और रामनाथ ठाकुर पर असर
इसी नीति के कारण हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर की उम्मीदवारी पर सवाल खड़े हो गए हैं। दोनों नेता पहले ही दो कार्यकाल पूरे कर चुके हैं। अगर पार्टी अपनी नीति पर कायम रहती है, तो दोनों नेताओं को राज्यसभा से बाहर होना पड़ सकता है।
यह फैसला आसान नहीं होगा, क्योंकि हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उपसभापति जैसे महत्वपूर्ण पद पर हैं और उनकी पहचान एक अनुभवी संसदीय नेता के रूप में है।
बिहार विधानसभा का गणित क्या कहता है?
एनडीए की मजबूत स्थिति
बिहार विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की स्थिति बेहद मजबूत है। हाल के विधानसभा चुनाव में एनडीए को 202 सीटें मिली थीं, जबकि विपक्षी गठबंधन को केवल 35 सीटों पर संतोष करना पड़ा था।
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए एक उम्मीदवार को लगभग 40 वोटों की जरूरत होती है। इस हिसाब से एनडीए आसानी से अधिकांश सीटें जीत सकता है।
विपक्ष के लिए मुश्किल
विपक्ष की कमजोर स्थिति के कारण इस चुनाव में उनके लिए एक भी सीट जीतना मुश्किल माना जा रहा है। इसका मतलब है कि राज्यसभा में बिहार से भेजे जाने वाले अधिकांश सदस्य एनडीए से ही होंगे।
एनडीए में टिकट के दावेदार कौन-कौन?
नितिन नवीन का नाम चर्चा में
बीजेपी की ओर से एक नाम नितिन नवीन का सामने आ रहा है। उन्हें हाल ही में पार्टी में नई जिम्मेदारी दी गई है और माना जा रहा है कि उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है।
यदि ऐसा होता है, तो उन्हें अपनी विधानसभा सीट छोड़नी पड़ सकती है।
सहयोगी दलों की भी उम्मीदें
एनडीए में शामिल अन्य दल भी राज्यसभा सीट की उम्मीद कर रहे हैं। इनमें लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा जैसे दल शामिल हैं।
इन दलों का कहना है कि गठबंधन में उनकी भूमिका और योगदान को देखते हुए उन्हें भी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
उपेंद्र कुशवाहा की स्थिति
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा पहले से ही राज्यसभा सदस्य हैं। उन्हें बीजेपी के समर्थन से उपचुनाव में राज्यसभा भेजा गया था।
हालांकि, एनडीए के अंदर यह चर्चा है कि उन्हें पहले ही काफी राजनीतिक लाभ मिल चुका है। इसलिए इस बार उन्हें दोबारा मौका मिलना तय नहीं माना जा रहा।
क्या होगा नीतीश कुमार का अंतिम फैसला?
यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है कि क्या नीतीश कुमार अपनी नीति पर कायम रहेंगे या इस बार बदलाव करेंगे।
यदि नीति लागू होती है, तो हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर को राज्यसभा से बाहर होना पड़ेगा। लेकिन अगर पार्टी अपवाद बनाती है, तो दोनों नेताओं को तीसरा कार्यकाल मिल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केवल संगठनात्मक नीति का मामला नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक संतुलन और गठबंधन की मजबूती भी अहम भूमिका निभाएगी।
राज्यसभा चुनाव का बिहार की राजनीति पर असर
नए चेहरों को मिल सकता है मौका
यदि जेडीयू अपनी नीति पर कायम रहती है, तो नए नेताओं को राज्यसभा जाने का मौका मिलेगा। इससे पार्टी में नई ऊर्जा और संतुलन आएगा।
अनुभवी नेताओं की भूमिका कम हो सकती है
दूसरी ओर, अनुभवी नेताओं के बाहर होने से पार्टी को संसदीय अनुभव का नुकसान भी हो सकता है।
राज्यसभा चुनाव क्यों है महत्वपूर्ण?
राज्यसभा में सांसदों की भूमिका कानून बनाने, राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करने और सरकार को जवाबदेह बनाने में होती है।
इसलिए राज्यसभा में भेजे जाने वाले नेताओं का चयन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
निष्कर्ष
बिहार में राज्यसभा चुनाव 2026 केवल एक नियमित चुनाव नहीं है, बल्कि यह जेडीयू की आंतरिक नीति, गठबंधन की राजनीति और नेतृत्व की रणनीति की परीक्षा भी है।
हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर जैसे वरिष्ठ नेताओं का भविष्य इस चुनाव पर निर्भर करता है।
अब सभी की नजर नीतीश कुमार के फैसले पर टिकी हुई है, जो तय करेगा कि पार्टी अपनी नीति पर कायम रहती है या राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदलाव करती है।
यह चुनाव बिहार की राजनीति में आने वाले समय की दिशा भी तय कर सकता है।
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Author: AK
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