रूस के राष्ट्रपति पुतिन 12-13 सितंबर के BRICS Summit के लिए भारत आएंगे। PM मोदी से द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, रक्षा और Su-57 पर चर्चा संभव है।
Putin India Visit: Modi Meet and Su-57 Talks

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। रूस ने पुष्टि की है कि पुतिन नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS Summit 2026 में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अलग से द्विपक्षीय बातचीत भी होने की उम्मीद है। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
भारत इस साल 12 और 13 सितंबर को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। सम्मेलन नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। BRICS के मंच पर वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। वहीं, पुतिन की भारत यात्रा के दौरान रूस और भारत के बीच व्यापार, आर्थिक सहयोग और रक्षा संबंधों से जुड़े मुद्दे भी बातचीत के केंद्र में रह सकते हैं।
रूसी राष्ट्रपति की यात्रा की पुष्टि क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने की है। भारतीय पत्रकारों के साथ वर्चुअल बातचीत में उन्होंने कहा कि पुतिन जल्द भारत की यात्रा शुरू करेंगे।
पुतिन 11 सितंबर को पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के मुताबिक, पुतिन 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। इसके बाद वह BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
इस बैठक को भारत और रूस के संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से रणनीतिक और रक्षा साझेदारी रही है। इसके अलावा ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में भी दोनों देश सहयोग करते हैं।
पेस्कोव ने दोनों नेताओं के व्यक्तिगत संबंधों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक मोदी और पुतिन के बीच संवाद व्यावहारिक और खुला रहा है। ऐसे संबंध दोनों देशों को संवेदनशील मुद्दों पर सीधे और रचनात्मक तरीके से बातचीत करने का अवसर देते हैं।
PM Modi Putin Meeting इसलिए भी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि दोनों देशों के बीच सहयोग के कई नए क्षेत्रों पर आगे बढ़ने की संभावनाएं मौजूद हैं।
भारत-रूस संबंधों में रक्षा क्षेत्र अहम
भारत और रूस के रिश्तों में रक्षा सहयोग लंबे समय से एक प्रमुख आधार रहा है। भारतीय सशस्त्र बलों में रूसी मूल के कई हथियार और रक्षा प्रणालियां इस्तेमाल होती रही हैं।
ऐसे में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग पर चर्चा की संभावना स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि किसी भी नए रक्षा सौदे को लेकर अंतिम निर्णय तभी माना जाएगा जब भारत सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा की जाए।
रक्षा क्षेत्र के अलावा दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग भी काफी महत्वपूर्ण है। रूस भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार रहा है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा दोनों देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।
Su-57 फाइटर जेट पर हो सकती है चर्चा
पुतिन की यात्रा से पहले जिस मुद्दे ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है, वह रूस के Su-57 Fighter Jet से जुड़ा है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता पेस्कोव ने कहा है कि भारत को Su-57 लड़ाकू विमान बेचने की संभावना पर भी बातचीत हो सकती है। अगर इस मुद्दे पर चर्चा होती है तो यह भारत-रूस रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण विषय हो सकता है।
Su-57 रूस का उन्नत लड़ाकू विमान है। इसे आधुनिक युद्धक क्षमताओं के लिए विकसित किया गया है। भारत लंबे समय से अपनी वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को मजबूत करने और आधुनिक विमानों की जरूरत पर ध्यान देता रहा है।
हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि चर्चा होने की संभावना और सौदा तय होने में अंतर है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार केवल यह कहा गया है कि Su-57 की बिक्री की संभावना बैठक के एजेंडे में आ सकती है। भारत सरकार की ओर से इस संबंध में अभी कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग भी एजेंडे में
पुतिन और मोदी की बातचीत सिर्फ रक्षा क्षेत्र तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग भी महत्वपूर्ण मुद्दा हो सकता है।
रूस और भारत के बीच ऊर्जा, उर्वरक, औद्योगिक उत्पाद और अन्य क्षेत्रों में आर्थिक संबंध हैं। ऐसे में दोनों पक्ष व्यापार को और बढ़ाने के रास्तों पर चर्चा कर सकते हैं।
रूस की ओर से BRICS के भीतर आर्थिक और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने की बात भी कही गई है। इसलिए नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन केवल राजनीतिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विकास और आर्थिक सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण मंच बन सकता है।
अमेरिका के प्रस्तावित टैरिफ पर रूस नाराज
पुतिन की भारत यात्रा से पहले रूस ने रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की प्रस्तावित टैरिफ योजना को लेकर भी अपनी नाराजगी जताई है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता ने रूसी कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की प्रस्तावित योजना की आलोचना की और इसे गैर-कानूनी तथा अस्वीकार्य बताया।
यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक तेल बाजार में रूस की भूमिका के कारण भारत-रूस ऊर्जा व्यापार अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय रहा है।
हालांकि भारत और रूस के बीच इस मुद्दे पर क्या बातचीत होगी, यह सम्मेलन और द्विपक्षीय बैठक के दौरान ही अधिक स्पष्ट हो सकता है।
18वां BRICS Summit भारत के लिए क्यों खास है?
भारत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें BRICS Summit की मेजबानी कर रहा है। भारत ने 1 जनवरी 2026 को BRICS की अध्यक्षता संभाली थी। यह चौथी बार है जब भारत इस समूह की अध्यक्षता कर रहा है।
साल 2026 BRICS के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी वर्ष समूह की स्थापना के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
इसलिए भारत की मेजबानी में होने वाला यह सम्मेलन केवल नियमित वार्षिक बैठक नहीं है। यह समूह के दो दशकों के सफर को देखने और आने वाले वर्षों के लिए इसकी दिशा तय करने का भी अवसर होगा।
भारत की अध्यक्षता के दौरान विकासशील देशों के हित, आर्थिक सहयोग, तकनीकी सहयोग और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है।
BRICS की शुरुआत कैसे हुई?
BRICS को समझने के लिए इसके इतिहास पर नजर डालना जरूरी है।
आज BRICS में कई प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं और विकासशील देश शामिल हैं, लेकिन इसकी शुरुआत एक छोटे समूह के रूप में हुई थी।
शुरुआत में इसे BRIC कहा जाता था। BRIC नाम ब्राजील, रूस, भारत और चीन के अंग्रेजी नामों के पहले अक्षरों से बना था।
इन चार देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई थी। इसके बाद 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया।
दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद बना BRICS
2011 में दक्षिण अफ्रीका के इस समूह में शामिल होने के बाद BRIC का नाम BRICS हो गया। इसके बाद यह मंच धीरे-धीरे वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका बढ़ाता गया।
BRICS का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को मजबूत करना है। इसके अलावा विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक संस्थानों में अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश भी इस मंच की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
समय के साथ BRICS की गतिविधियों का दायरा भी बढ़ा है। अब इसके एजेंडे में सिर्फ व्यापार और अर्थव्यवस्था नहीं बल्कि ऊर्जा, वित्त, तकनीक, स्वास्थ्य, शिक्षा और वैश्विक शासन जैसे विषय भी शामिल हैं।
भारत की BRICS अध्यक्षता का महत्व
भारत के लिए 2026 में BRICS की अध्यक्षता कई कारणों से महत्वपूर्ण है। भारत दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों के मुद्दों को सामने रखने की कोशिश करता रहा है।
भारत की अध्यक्षता में होने वाला सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से गुजर रही है। व्यापार तनाव, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी बदलाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियां दुनिया के सामने बड़े मुद्दे हैं।
ऐसे माहौल में BRICS देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की कोशिश भारत की अध्यक्षता के लिए अहम हो सकती है।
पुतिन की यात्रा से भारत को क्या उम्मीदें?
पुतिन की भारत यात्रा को सिर्फ BRICS सम्मेलन तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उनकी प्रधानमंत्री मोदी के साथ अलग द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना दोनों देशों के संबंधों को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत देती है।
बैठक में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे उठ सकते हैं। Su-57 पर संभावित बातचीत विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
वहीं, BRICS के संदर्भ में भारत और रूस वैश्विक आर्थिक व्यवस्था, विकासशील देशों के बीच सहयोग और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने पर भी विचार साझा कर सकते हैं।
12-13 सितंबर को दुनिया की नजर नई दिल्ली पर
18वां BRICS Summit India नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने जा रहा है। सम्मेलन में कई देशों के नेता और प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
भारत के लिए यह आयोजन कूटनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगा। एक तरफ भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ रूस के राष्ट्रपति पुतिन की मौजूदगी और मोदी-पुतिन द्विपक्षीय बैठक इस सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना रही है।
Su-57 जैसे रक्षा मुद्दे पर चर्चा होती है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना तय है कि पुतिन की भारत यात्रा के दौरान भारत-रूस संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बातचीत की संभावना है।
इस यात्रा और BRICS सम्मेलन से निकलने वाले फैसलों पर इसलिए भी नजर रहेगी क्योंकि 2026 BRICS के गठन के 20 वर्ष पूरे होने का साल है। ऐसे में नई दिल्ली का शिखर सम्मेलन संगठन के अगले दशक की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Author: AK
! Let us live and strive for freedom ! Freelance Journalist ! Politics ! News Junky !



















