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विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनाथ धाम के कपाट भी छह माह के लिए बंद किए गए, चार धाम यात्रा का भी हुआ समापन

उत्तराखंड में स्थित चारों धाम के कपाट बंद बंद हो चुके हैं। सबसे आखिर में बद्रीनाथ धाम के कपाट रविवार रात 9:07 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए । बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने के मौके पर मंदिर को 15 क्विंटल गेंदे के फूलों से सजाया गया। श्री बद्रीनाथ धाम के सिंह … Read more

Portals of Badrinath closed
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उत्तराखंड में स्थित चारों धाम के कपाट बंद बंद हो चुके हैं। सबसे आखिर में बद्रीनाथ धाम के कपाट रविवार रात 9:07 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए । बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने के मौके पर मंदिर को 15 क्विंटल गेंदे के फूलों से सजाया गया। श्री बद्रीनाथ धाम के सिंह द्वार परिसर में गढ़वाल स्काउट बैंड की धुनों के बीच मंदिर के पट बंद हुए। इसके साथ ही इस साल की चारधाम यात्रा भी संपन्न हो गई है। कपाट बंद होने के मौके पर धाम में पहुंचे लगभग 10 हजार श्रद्धालुओं ने बदरीनाथ के दर्शन किए। कपाट बंद होने के बाद बद्रीनाथ धाम जय बदरीविशाल के उद्घोष से गूंज उठा। बीकेटीसी मीडिया प्रभारी हरीश गौड़ ने बताया कि सोमवार सुबह 10 बजे उद्धव, कुबेर और गुरु शंकराचार्य की गद्दी बदरीनाथ धाम के रावल योग बदरी पांडुकेश्वर प्रस्थान करेगी। जहां शीतकाल में उद्धव एवं कुबेर पांडुकेश्वर प्रवास करेंगे।

जबकि, पांडुकेश्वर प्रवास के बाद 19 नवंबर को आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी रावल धर्माधिकारी वेदपाठी समेत नृसिंह मंदिर ज्योतिर्मठ प्रस्थान करेगी। मंदिर बंद करने की एक सप्ताह प्रक्रिया 13 नवंबर से शुरू हुई, जब श्री गणेश मंदिर के कपाट बंद किए गए। इसके बाद आदि केदारेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद हुए। यह प्रक्रियाएं पंच पूजा का हिस्सा होती हैं, जिसमें पूरे मंदिर परिसर को लंबे शीतकाल के लिए तैयार किया जाता है। शुक्रवार को पंच पूजा के तहत महत्वपूर्ण ‘खताग पूजा’ पूरी हुई। इसके बाद माता लक्ष्मी के मंदिर में कढ़ाई भोग का प्रसाद चढ़ाकर भगवान बद्रीनाथ के गर्भगृह में सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना की गई। उत्तराखंड के चारधाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ – सभी शीतकाल के लिए बंद हो रहे हैं। यह 2024 की तीर्थ यात्रा का समापन है। गंगोत्री मां गंगा को समर्पित है, सबसे पहले 2 नवंबर को बंद हुआ। इसके बाद यमुनोत्री और केदारनाथ के कपाट 3 नवंबर को भाई दूज के दिन बंद किए गए। अन्य प्रमुख मंदिर के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद हो चुके हैं। रुद्रनाथ 17 अक्टूबर को और तुंगनाथ 4 नवंबर को बंद किया गया और मध्यमहेश्वर 20 नवंबर को बंद होगा। केदारनाथ के रक्षक देवता भकुंटा भैरवनाथ के कपाट 29 अक्टूबर को बंद कर दिए गए।

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यह बंद होने की प्रक्रिया दशहरा के आसपास होती है और शीतकाल के दौरान मंदिरों और उनके आसपास के क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है। यह मंदिर अगले साल अप्रैल या मई में खुलेंगे और 2025 की तीर्थयात्रा के लिए तैयार होंगे। पवित्र गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट 10 अक्टूबर को बंद हो गए थे। बता दें कि हर साल सर्दी के मौसम में भारी बर्फबारी की संभावना होती है और मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद भगवान बदरी विशाल की पूजा और दर्शन पांडुकेश्वर और जोशीमठ स्थित शीतकालीन तीर्थ स्थानों पर होती है।

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AK
Author: AK

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